दागी सांसद- विधायकों के मामलों की तेज सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पारित करेगी और आदेश

सुप्रीम कोर्ट  (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि MP-MLA के मामलों पर तेजी से सुनवाई पूरी करने के लिए अदालत कुछ और आदेश पारित करेगी

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 1:35 PM IST
  • Share this:
सुनील पांडे


नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि सांसदों और विधायकों के मामलों पर तेजी से सुनवाई पूरी करने के लिए अदालत कुछ और आदेश पारित करेगी. वहीं सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने दूसरे मामलों में व्यस्तता की वजह से सुनवाई टालने की मांग की.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं करने पर नाराजगी जाहिर की. जस्टिस रमन्ना ने कहा कि आपको लंबित चार्जशीट आदि के बारे में काउंटर दाखिल करना था, अभी तक नहीं दाखिल किया. जिस पर तुषार मेहता ने कहा कि अगली तारीख तक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर देंगे.
एमिकस क्यूरी हंसारिया ने कहा कि ऐसे न्यायिक अधिकारी जो मुकदमों का विचार करेंगे उनको कम से कम 2 साल की अवधि के लिए जारी रहना चाहिए, मामले में देरी की पूरी समस्या अभियोजन पक्ष के उपस्थित नहीं होने के कारण है. हंसारिया ने कहा कि मेरा अनुरोध है कि राज्य सरकारें इन विशेष अदालतों के लिए नोडल अभियोजन अधिकारी नियुक्त कर सकती हैं जो समन आदि जैसी कार्रवाइयों के लिए जिम्मेदार हों.



'उन्हें हमारे लिए कानून नहीं बनाना चाहिए'
हंसारिया ने बताया कि केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस MP/MLA को गिरफ्तार नहीं करती. हंसारिया ने कहा कि वर्तमान विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों को पूर्व विधायकों के मुकाबले प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि वे कानून निर्माता हैं. अगर उनके खिलाफ हत्या के मामले लंबित हैं, तो उन्हें हमारे लिए कानून नहीं बनाना चाहिए, यह सार्वजनिक हित में है.

हंसरिया ने कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के निपटारे की जांच करने के लिए महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थानों और राज्य ही हिसाब से महत्वपूर्ण है. हंसरिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक में विशेष मुद्दे हैं, भोपाल में ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में बेंच का गठन किया गया है. मद्रास HC ने सभी जिलों में विशेष अदालत की स्थापना के संबंध में आपत्ति उठाई है.

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि हम इस मामले में लंबा फासला तय कर चुके हैं, मद्रास हाइकोर्ट को छोड़कर किसी अदालत ने विशेष न्यायालयों के गठन को लेकर कोई आपत्ति नहीं की है. हम इस मुद्दे पर कुछ समय बाद विचार करेंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज