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दहेज उत्पीड़न के इस फैसले पर दोबारा विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

हर लेखक को बोलने का मौलिक अधिकार: SC
(File photo)
हर लेखक को बोलने का मौलिक अधिकार: SC (File photo)

2012 से 2015 के बीच 32,000 महिलाओं की मौत की वजह दहेज उत्पीड़न था

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2017, 5:14 PM IST
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दहेज उत्पीड़न मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट दोबारा विचार करेगा. कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि दहेज उत्पीड़न को लेकर परिवार के सभी सदस्यों की तत्काल गिरफ्तारी न हो. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रही है और विचार कर रही है कि इसे लागू कैसे किया जाए.  दहेज उत्पीड़न के मामलों पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है.

मानव अधिकार मंच नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की है कि कोर्ट को उस संबंध में दूसरी गाइडलाइन बनाने की जरूरत है, क्योंकि कोर्ट के फैसले के बाद दहेज उत्पीड़न का कानून कमजोर हुआ है.



याचिका में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2012 से 2015 के बीच 32,000 महिलाओं की मौत की वजह दहेज उत्पीड़न था. आज भी दहेज के लिए बहुओं की प्रताड़ना जारी है. ऐसे मामलों में परिवार के सदस्यों की गिरफ्तारी से पीड़़िता को न्याय मिलने की उम्मीद बंधती है.
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने दहेज कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी. झूठे दहेज केस की बढ़ती संख्या को देखते हुए हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को हिदायत दी थी कि दहेज उत्पीड़न के केस में आरोपी की गिरफ्तारी सिर्फ जरूरी होने पर ही हो. यह भी कहा था कि गिरफ्तारी करते वक्त पुलिस को वजह बतानी होगी.
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