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अवैध संतान को भी मिले पिता की पैतृक संपत्ति में हक? सवाल पर उलझा सुप्रीम कोर्ट

News18Hindi
Updated: November 4, 2019, 12:48 PM IST
अवैध संतान को भी मिले पिता की पैतृक संपत्ति में हक? सवाल पर उलझा सुप्रीम कोर्ट
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर निर्णय दिया था कि अवैध संतान वैध संतान के बराबर संपत्ति के लिए दावा नहीं ठोक सकती.

पिता की खुद अर्जित की हुई संपत्ति के साथ ही उनकी पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में अवैध संतान (Illegitimate Child) को हिस्‍सेदारी के एक मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की बड़ी बेंच (Larger Bench) को भेजने के आठ साल बाद एक खंडपीठ (Division Bench) ने कहा कि इस मामले में एक अधिकारिक फैसले (Authoritative Decision) की जरूरत है. दरअसल, अदालतों में लगातार ऐसे मुकदमों की संख्‍या बढ़ रही है.

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  • Last Updated: November 4, 2019, 12:48 PM IST
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उत्‍कर्ष आनंद

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस सवाल पर एक बार फिर उलझ गया है कि किसी अवैध संतान (Illegitimate Child) को पिता की अर्जित की गई संपत्ति के साथ ही पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) में भी हिस्‍सेदारी मिलनी चाहिए या नहीं. इससे जुड़ा एक मामला शीर्ष अदालत की बड़ी बेंच (Larger Bench) को भेजने के आठ साल बाद एक खंडपीठ (Division Bench) ने इस मामले में एक अधिकारिक फैसले (Authoritative Decision) की जरूरत पर जोर दिया है. दरअसल, अदालतों में ऐसे मामलों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) और अनिरुद्ध बोस (Justice Aniruddha Bode) की खंडपीठ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.

पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दिया फैसला
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने सुप्रीम कोर्ट की कुछ रूलिंग के आधार पर फैसला दिया था कि अवैध संतान वैध संतान के बराबर संपत्ति के लिए दावा नहीं ठोक सकती. हाईकोर्ट ने कुछ फैसलों के आधार पर कहा कि अवैध संतान कानूनी तौर पर वैध शादी से हुए बच्‍चों के बराबर पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्‍सेदारी का दावा नहीं कर सकती. हालांकि, अवैध बच्‍चे पिता की अर्जित की हुई संपत्ति (Self Earned Property) में हिस्‍सेदारी के लिए दावा कर सकते हैं. जस्टिस ललित और बोस की अदालत में पहुंचे इस मामले में पीठ को तय करना है कि हिंदू मैरिज एक्‍ट, 1955 की धारा-16 के तहत अवैध संतान को पिता की अर्जित की हुई संपत्ति में हिस्‍सेदारी के अधिकार की तरह पैतृक संपत्ति में अधिकार दिया जाना चाहिए या नहीं.

अलग-अलग मामलों में सुप्रीम कोर्ट ही दे चुका है अलग-अलग फैसले
हिंदू मैरिज एक्‍ट (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा-16(3) के तहत अवैध संतान को अपने माता-पिता की संपत्ति के अलावा किसी रिश्‍तेदार की संपत्ति में हिस्‍सेदारी का अधिकार नहीं है. ऐसे में अवैध संतान को पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्‍सेदारी का दावा ठोकने का अधिकार नहीं है. पीठ को बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के विचार भी काफी अलग-अलग हैं. साल 2003 और 2010 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि अवैध संतान पिता की अर्जित संपत्ति में ही हिस्‍सेदारी का अधिकारी है. वहीं, 2011 के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध संतान को पिता की अर्जित की हुई और पैतृक संपत्ति में हिस्‍सेदारी का अधिकार है.

2011 में तीन जजों की बेंच को भेजा मामला, आज तक नहीं हुई सुनवाई
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साल 2011 के फैसले के बाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के पास भेजा गया ताकि तीन जजों की पीठ कोई अधिकारिक फैसला दे सके. इसके बाद 2013 में मामले को तीन जजों की बैंच को भेज दिया गया ताकि कानूनी आधार पर अंतिम फैसला लिया जा सके. आज तक इस मामले में कोई फैसला नहीं हो पाया है. इस मामले को दिसंबर, 2018 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन आज तक इस पर सुनवाई नहीं हो पाई है. ऐसे में जस्टिस ललित और बोस की पीठ ने भी फिलहाल मामले पर कोई फैसला नहीं दिया है. बेंच ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है.

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First published: November 4, 2019, 12:13 PM IST
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