कोविड-19 मामलों में उछाल के बाद कर्नाटक के गांवों में बेंगलुरू वालों को बाहर ही रखने की कोशिश

कोविड-19 मामलों में उछाल के बाद कर्नाटक के गांवों में बेंगलुरू वालों को बाहर ही रखने की कोशिश
कोविड-19 संक्रमण के चलते बंद किया गया इलाका (सांकेतिक फोटो)

अब कर्नाटक (Karnataka) में सक्रिय मामलों में सूची का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा बेंगलुरु (Bengaluru) में है- और बाकी राज्य के लोग उसी राजधानी (Capital) से 'दूरी बनाए रखना चाहते हैं,' जिसमें कभी वे रहना चाहते थे.

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दीपा बालाकृष्णन । रेवती राजीवन

बेंगलुरु. बेंगलुरु (Bengaluru) और मैसूरु (Mysore) शहरों के बीच मांड्या के एक गांव (Village) में, पंचायत का एक प्रतिनिधि ढोल पीटकर घोषणा करता है: "बेंगलुरु और मैसूरु के लोग यहां न आएं. यदि आप ऐसा करते हैं, तो आप पर 5,000 का जुर्माना (Fine) लगाया जाएगा." आगे और दक्षिण में, चामराजनगर (Chamarajanagar) में, ग्रामीणों ने बेंगलुरु से सरकार की ओर से संचालित बसों (government-run buses) को भी प्रवेश करने से मना कर दिया.

उत्तरी कर्नाटक (Karnataka) के हवेरी के छिन्नमुलगुंड गांव में, निवासियों ने प्रत्येक घर (household) से एक स्वयंसेवक (Volunteer) की टीम बनाई है, जो एक-एक करके सभी को बाहरी लोगों को प्रवेश करने से रोकने के लिए डंडे के साथ सीमा (border) पर खड़े होने के लिए तैनात की जायेगी.



लोगों ने खुद से लगा दिया लॉकडाउन, संदेश- "जो बेंगलुरु से, उनका स्वागत नहीं"
यह निष्कासन सीधा है और लोगों को चोट पहुंचा रहा है. बेंगलुरु में कोविड-19 की संख्या बढ़ने के कारण, इसे कर्नाटक, बाकी हिस्सों के खिलाफ एक अजीब लड़ाई में फंस गया है. कई जिलों ने हाल ही में अपने यहां ऐसे मामलों को देखा है, जिसने बेंगलुरु की यात्रा की हो या जो किसी ऐसे व्यक्ति से मिला है, जो बेंगलुरु का है. और इसे वायरस के प्रसार का कारण माना गया था.

हालांकि राज्य में अनलॉक 2.0 में अच्छी तरह से जा रहा है लेकिन कई जिलों ने अपने स्वयं के लिए लॉकडाउन लगा दिया है- एक ऐसा लॉकडाउन जो कहता है: जो लोग बेंगलुरु से हैं, उनका स्वागत नहीं है.

लोग लाठी-डंडे लेकर सीमाओं पर शिफ्ट में कर रहे हैं रखवाली
हावेरी के एक ग्रामीण ने News18 को बताया, "कल पास के एक गांव में एक कोरोना मामला था, इसलिए हम अब अपने गांव की रखवाली कर रहे हैं. हम यह कैसे कर रहे हैं, प्रत्येक घर से स्वयंसेवकों को लाकर और सीमाओं पर अपनी स्वयं की टीम बनाकर. हम प्रत्येक टीम चार घंटे की शिफ्ट करते हैं."

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उनके पड़ोसी ने कहा कि उन्होंने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि वे गांव के बाहर भी न जायें. उन्होंने कहा, "अगले 15 दिनों के लिए, हम अपनी खुद की इच्छा से, सीमाओं को बंद कर दिया और हमारे द्वारा बनाए गए नियमों को रखने का फैसला किया. हम अपनी भलाई के लिए ऐसा कर रहे हैं, अपने जीवन को बचाने के लिए."
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