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जस्‍टिस गोगोई ने न्यायपालिका के सिद्धांतों से समझौता किया: जस्टिस जोसेफ कुरियन

जस्‍टिस गोगोई ने न्यायपालिका के सिद्धांतों से समझौता किया: जस्टिस जोसेफ कुरियन

कुरियन ने कहा कि पूर्व सीजेआई द्वारा राज्यसभा मनोनयन को स्वीकार करने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता में आम आदमी का विश्वास डिगा है. (File Photo)

कुरियन ने कहा कि पूर्व सीजेआई द्वारा राज्यसभा मनोनयन को स्वीकार करने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता में आम आदमी का विश्वास डिगा है. (File Photo)

न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि वह जस्टिस जे चेलमेश्वर, गोगोई और लोकुर के साथ एक अभूतपूर्व कदम के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आए और देश को यह बताया कि न्यायपालिका के आधार पर खतरा है.

    नई दिल्ली. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कुरियन जोसफ (Justice Kurian Joseph) ने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई (Former CJI Ranjan Gogoi) को राज्यसभा (Rajyasabha) के लिए मनोनीत होने को लेकर सवाल उठाए हैं. कुरियन ने कहा कि पूर्व सीजेआई द्वारा राज्यसभा मनोनयन को स्वीकार करने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता में आम आदमी का विश्वास डिगा है. उन्होंने कहा कि पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता के ‘सिद्धांतों से समझौता’ किया.

    जस्टिस जोसेफ ने कहा "मैं आश्चर्यचकित हूं कि कैसे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, जिन्होंने एक बार न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए साहस का प्रदर्शन किया था, ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर महान सिद्धांतों से समझौता किया है."

    'लोगों का विश्वास हिला'
    न्यायमूर्ति जोसेफ ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्र इस सिद्धांत के कारण मूल संरचनाओं और संवैधानिक मूल्यों पर मजबूती से टिका हुआ है.

    उन्होंने कहा-"जिस पल लोगों का यह विश्वास हिल गया है, उस पल यह धारणा है कि न्यायाधीशों के बीच एक वर्ग पक्षपाती है या आगे देख रहा है, ठोस नींव पर बने राष्ट्र का विश्वास पूरी तरह से हिल गया है."

    कुरियन ने बताया क्यों उन्होंने नहीं लिया कोई पद
    न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि वह जस्टिस जे चेलमेश्वर, गोगोई और लोकुर के साथ एक अभूतपूर्व कदम के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आए और देश को यह बताया कि न्यायपालिका के आधार पर खतरा है.

    रिटायर्ड न्यायाधीश ने कहा- "और अब मुझे लगता है कि खतरा बड़े पैमाने पर है."

    इस बात की ओर इशारा करते हुए यही कारण था कि उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद नहीं लेने का फैसला किया, न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा “भारत के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामांकन की स्वीकृति ने निश्चित रूप से न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आम आदमी के विश्वास को हिला दिया है, जो भारत के संविधान की बुनियादी संरचनाओं में से एक है.”

    इससे पहले जस्टिस लोकुर ने भी गोगोई को राज्यसभा में मनोनित किए जाने की आलोचना की थी.

    उन्होंने कहा कि "यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता को फिर से परिभाषित करता है क्या आखिरी स्तंभ गिर गया है?"

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    Tags: CJI Ranjan Gogoi, Justice Joseph, Justice Ranjan Gogoi, Rajya sabha

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