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Indo-Pak War 1971: जब पोंगली ब्रिज पर पैरा कमांडो के ऑपरेशन ने दिलाई थी पाकिस्तान पर जीत  

भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. (फाइल फोटो)
भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. (फाइल फोटो)

उस वक्त कमांडो (Commando) की 2 पैरा बटालियन ग्रुप का हिस्सा बने कैप्टन अब रिटायर्ड कर्नल शिव मोहन कुंजरू ने ये सब अपनी आंखों से देखा था. इसी युद्ध (War) की बरसी पर न्यूज18 हिन्दी ने कर्नल कुंजरू से बात की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 20, 2020, 12:05 PM IST
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नई दिल्ली. 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश (Bangladesh) के ढाका में जो कुछ भी हुआ, वो आज एक सुनहरा इतिहास है. बदन पर सेना की वर्दी... लाइन से खड़े हट्टे-कट्टे खड़े नौजवान... कंधे पर टंगे हथियार, लेकिन यह 93 हज़ार नौजवान सिर झुकाए और हाथ बांधे खड़े थे. इनके ठीक सामने थे भारतीय सेना (Indian Army) के अफसर और जवान. सीना गर्व से चौड़ा और चेहरे पर विजयी मुस्कान. एक मेज के सामने रखी दो कुर्सी पर बैठे थे मेजर जनरल जंगजीत सिंह अरोड़ा और पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) के जनरल नियाज़ी. नियाज़ी सरेंडर नामे पर साइन कर रहे थे.

किसी भी भारतीय को फख्र महसूस करने के लिए यह एक तस्वीर ही काफी है, लेकिन उस वक्त कमांडों की 2 पैरा (para Commando) बटालियन ग्रुप का हिस्सा बने कैप्टन अब कर्नल रिटायर्ड शिव मोहन कुंजरू ने ये सब अपनी आंखों से देखा था. इसी युद्ध की बरसी पर न्यूज18 हिन्दी ने कर्नल कुंजरू से बात की. कर्नल कुंजरू की ज़ुबानी ही जानते हैं उस किस्से को जब पैरा बटालियन ने एक पुल पर कब्जा कर पाक सेना की कमर तोड़ी और ढाका के अंदर तक घुस गई थी.

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'ये बात 11 दिसम्बर 1971 की है. उस वक्त हमारी 2 पैरा बटालियन किसी काम से कोलकाता गई हुई थी. उसी वक्त हमको आदेश मिला कि ढाका से 60 किमी अंदर जाना है. अंदर जाकर पोंगली पुल पर कब्जा करना है. भारतीय सेना पाक सेना के खिलाफ लडाई छेड़ चुकी थी. चार मोर्चों पर लड़ाई छेडी गई थी. लेकिन ढाका को जाने वाले एक मोर्च पर हमारी सेना अंदर नहीं जा पा रही थी. इसीलिए ये मिशन हमे दिया गया. तय हुआ कि रात आठ बजे हमारी बटालियन हवाई जहाज से कूदेगी. लेकिन इसी दौरान सूचना मिली कि पाक को हमारे इस कदम की भनक लग गई है.
लेकिन जाना जरूरी था. इसलिए तय हुआ कि अब हम रात आठ बजे नहीं शाम के चार बजे जाएंगे. हुआ भी ऐसा ही. हमारी सूचना भी सही निकली. पाक सेना हमे घेरने के लिए ढाका की ओर ही आ रही थी. उन्होंने हमे दूर से देखते ही फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन दूर होने की वजह से हमारा कोई भी जवान घायल नहीं हुआ. उनके आने से पहले ही हम लोग जम्प कर चुके थे.

अब हम लोग धीरे-धीरे उस पोंगली ब्रिज की ओर बढ़ने लगे. ये ब्रिज इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि अगर उस पर हमारा कब्जा नहीं होता तो हम लोग ढाका पर कभी कब्जा नहीं कर पाते. लेकिन ब्रिज पर पहुंचते ही पाक सेना भी आ गई. एक घंटे तक लड़ाई चली.

लेकिन ब्रिज पर कब्जा होते ही हमने उनकी रसद सप्लाई रोक दी. हमारी 600 जवानों की बटालियन थी. गोला-बारुद, भारी मशीनगन और अर्टिलरी भी थी. पाक सेना ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई. धीरे-धीरे पाक सेना कमजोर पड़ गई. इसके बाद जो कुछ भी हुआ उसे आज पूरी दुनिया जानती है.'
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