भारत में नशे के कारोबार के पीछे पाकिस्तान का हाथ, ड्रग पेडलर्स का सर्वे में बड़ा खुलासा

एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि इस गोरखधंधे के पीछे कोई और नहीं बल्कि आतंकवाद का पनहगार पाकिस्तान का हाथ है.
एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि इस गोरखधंधे के पीछे कोई और नहीं बल्कि आतंकवाद का पनहगार पाकिस्तान का हाथ है.

Drung Supply in India: देश के तीन शहरों के दोषी पाए गए 872 ड्रग्स पेडलर्स से किए गए सर्वे में कई हैरान करने वाले खुलासे सामने आए हैं. पंजाब, गुजरात और दिल्ली के सज़ायाफ्ता ड्रग पेडलर्स से बातचीत के आधार पर खुलासा हुआ है कि अधिकांश ड्रग्स दूसरे देशों से भारत आता है. 77.6 फीसदी पेडलर्स ने माना कि देश में ड्रग्स विदेशों से आता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 3:45 PM IST
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नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की रहस्यमयी मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं. सुशांत सिंह की मौत ने बॉलीवुड और ड्रग्स कारोबार ( Bollywood and Drugs Business) के बीच संबंधों पर भी सवाल खड़े किए हैं. ड्रग्स मामले में सुशांत की गर्लफ्रेंड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती (Reha Chakraborty) और उसके भाई शोविक चक्रवर्ती फिलहाल भायखला जेल में हैं. वहीं ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB बॉलीवुड के बड़े चेहरों से पूछताछ कर चुका है जिसमें दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) , सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुल प्रीत शामिल हैं. अब सबके मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिरकार देश में इतने बड़े काले कारोबार के पीछे ड्रग माफिया कौन है और देश में इतनी मात्रा में नशीले पदार्थ आते कहां से हैं?

एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि इस गोरखधंधे के पीछे कोई और नहीं बल्कि आतंकवाद का पनहगार पाकिस्तान का हाथ है. IIM रोहतक की टीम द्वारा किए गए सर्वे में कई चौकाने वाले जानकारियों का खुलासा हुआ है.

विदेशों से होती है ड्रग्स की सप्लाई
देश के तीन शहरों के दोषी पाए गए 872 ड्रग्स पेडलर्स से किए गए सर्वे में कई हैरान करने वाले खुलासे सामने आए हैं. पंजाब, गुजरात और दिल्ली के सज़ायाफ्ता ड्रग पेडलर्स से बातचीत के आधार पर खुलासा हुआ है कि अधिकांश ड्रग्स दूसरे देशों से भारत आता है. 77.6 फीसदी पेडलर्स ने माना कि देश में ड्रग्स विदेशों से आता है. वहीं 81.88 फीसदी पेडलर्स का कहना है कि भारत में ड्रग्स पडोसी मुल्कों से आता है. इन सबके बीच सबसे चौकाने वाली जानकारी यह है कि सबसे अधिक 83.94 फीसदी यानी 732 पेडलर्स का कहना है कि भारत में पाकिस्तान ड्रग्स की सप्लाई कर रहा है. वहीं 5.05 फीसदी पेडलर्स ने कहा कि नेपाल से ड्रग्स आता है तो 4.24 फीसदी पेडलर्स ने जवाब दिया कि अफग़ानिस्तान से भी ड्रग्स भारत आता है. जबकि 2.52 फीसदी रिस्पॉन्डेंट ने कहा कि बांग्लादेश से कारोबार होता है. 2.06 फीसदी पेडलर्स ने कहा कि श्रीलंका से भी ड्रग्स भारत पहुंचता हैं.
स्कूल और कॉलेजों में भी होती है ड्रग्स की सप्लाई


872 पेडलर्स से किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि देश में ड्रग्स सप्लाई करने का सबसे आसान प्लेटफॉर्म पब और बार होता है. पेडलर्स ने ये भी जानकारी दी कि पब और बार के बाद रेस्त्रां, होटल, कॉलेज और विश्वविद्यालय, ड्रग रिहैब सेंटर और स्कूलों में भी धड़ल्ले से ड्रग्स की सप्लाई की जाती है. पेडलर्स ने कहा कि इस धंधे से वे 1000 गुना मुनाफ़ा कमाते है. यानी 1 लाख रुपये का ड्रग्स बेचने पर पेडलर्स को औसतन 10 लाख रुपये से अधिक का मुनाफ़ा होता है. 86.12 फीसदी पेडलर्स ने खुलासा किया है कि ड्रग्स सेवन को आकर्षक दिखाने वाले गाने युवाओं को ड्रग्स लेने के लिए उकसाते हैं. वहीं 79.36 फीसदी ने माना कि ड्रग्स को महिमामंडित कर परोसने वाली फिल्मों की वजह से भी युवाओं में ड्रग्स लेने का प्रचलन बढ़ रहा है.

पेडलर्स और युवा ऐसे अभिनेता और अभिनेत्रियों की नकल करते है जो फिल्मों के दृश्यों में ड्रग्स लेते दिखाए जाते है. पेडलर्स ने ये भी जानकारी दी कि छात्र-छात्राओं के अलावा बिजनेसमैन, पर्यटक,अवैध ट्रेवलर्स और सीमा पार कर भारत पहुंचने वाले भी उनके ग्राहक होते हैं.

सर्वे में इस वर्ग के पेडलर्स ने लिया हिस्सा
पंजाब, दिल्ली और गुजरात के पेडलर्स के बीच सर्वे किया गया. ये सभी पैडलर्स इंडियन नार्कोटिक ड्रग्स और सायकोट्रोपिक सब्सटांस एक्ट के दोषी करार दिए गए है. स्वेच्छा से सर्वे में शामिल रिस्पांडेंट्स में 34.05 फीसदी  यानी 297 फीसदी पैडलर्स 21 से 30 साल आयु वर्ग के थे. 27.98 फीसदी या 244 पैडलर्स 31-40 साल के थे. 27.40 फीसदी या 239 पैडलर्स 41-50 आयुवर्ग के थे. लिंगानुपात में देखे तो सर्वे में हिस्सा लिए 97.36 फीसदी पैडलर्स पुरूष और 2.64 फीसदी पैडलर्स महिला थी.

ड्रग्स को लेकर दुनिया का ये है हाल
ड्रग्स के इस्तेमाल से न सिर्फ उस व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है बल्कि उसके आस-पास के लोगों और समाज पर बुरा प्रभाव छोड़ता है. एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नशे की वजह से 740 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है. ये खर्च अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं, अपराध नियंत्रण और प्रोडक्टिविडी को लेकर होता है. एक अनुमान के मुताबिक करीब 80 मिलियन लोग अवैध नशे के गिरफ़्त में है, जिसकी वजह से नशाखोरों के स्वास्थ्य, उनके काम, परिवार और समुदाय पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

सर्वे रिपोर्ट में कई अहम सुझाव भी दिए गए
स्कूलों में समय रहते सभी किशोर छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग की जानी चाहिए. उन्हें ड्रग्स से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी देना चाहिए. रिपोर्ट में ये भी सुझाव दिया गया है कि स्वास्थ्य सुविधाएं और ड्रग्स रिहैब सेंटर को और बेहतर करना चाहिए. फिल्मों में ड्रग्स के कारोबार और उसके इस्तेमाल के दृश्यों का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए. फिल्मों में अभिनेता या अभिनेत्रियों द्वारा ड्रग्स के इस्तेमाल के समय चेतावनी जरूर प्रसारित किया जाना चाहिए. नशे के इस्तेमाल और कारोबार करने के अपराधों की सज़ा और जुर्माने के बारे में भी प्रसारित किया जाना जरूरी है. संस्थानों में रेंडम टेस्ट कराये जाने की भी जरूरत है. बड़े पैमाने पर सीमा पार से ड्रग्स आते है लिहाजा उसे रोकने के लिए व्यवस्था को और ज्यादा चुस्त-दुरूस्त करने की जरूरत है. सीमा पर पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाना चाहिए. पब और रेस्त्रां को रेगुलेट किया जाना चाहिए. स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रशासन द्वारा रेंडम टेस्ट किया जाना चाहिए. नशे के कारोबार को रोकने के लिए जांच एजेंसियों और प्रशासन को मुस्तैदी से काम करना चाहिए. ड्रग्स के इस्तेमाल से ना सिर्फ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है बल्कि बौद्धिक विकास, सेक्सुअल जीवन और मानसिक शांति को भी प्रभावित करता है.
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