SURVEY: 2017 में 31 प्रतिशत लोगों को सरकारी कामकाज के लिए देनी पड़ी घूस

SURVEY: 2017 में 31 प्रतिशत लोगों को सरकारी कामकाज के लिए देनी पड़ी घूस
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भ्रष्टाचार का मसला देश में बेहद महत्वपूर्ण रहा है. इसने न केवल आम जीवन को बल्कि देश की राजनीति को भी प्रभावित किया है. लेकिन, अब भ्रष्टाचार को लेकर आई एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले 12 सालों में देश में भ्रष्टाचार का स्तर घटा है. इसमें अभी तक 22 प्रतिशत की कमी आई है.

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  • Last Updated: April 28, 2017, 5:42 PM IST
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भ्रष्टाचार का मसला देश में बेहद महत्वपूर्ण रहा है. इसने न केवल आम जीवन को बल्कि देश की राजनीति को भी प्रभावित किया है. लेकिन, अब भ्रष्टाचार को लेकर आई एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले 12 सालों में देश में भ्रष्टाचार का स्तर घटा है.  इसमें अभी तक 22 प्रतिशत की कमी आई है.

यह जानकारी नीति आयोग के सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज की 11वीं 'इंडियन करप्शन स्टडी-2017' रिपोर्ट में दी गई है. यह रिपोर्ट नीति आयोग के सदस्य बीबेक देबोरॉय ने जारी की.

इसके अनुसार साल 2017 में 31 प्रतिशत लोगों को सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा जबकि साल 2013 में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत तक था. इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भ्रष्टाचार को लेकर लोगों की सोच और अनुभवों में भी पिछले 12 सालों (2005-2017) में कमी आई है.



कौन-सी सेवाएं शामिल
भ्रष्टाचार पर किए गए इस सर्वे में 20 राज्यों के ग्रामीण और शहरी कुल 3000 घरों को कवर किया गया है. इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार को लेकर लोगों की सोच और अनुभव को आधार बनाया गया है. यह सर्वे दस सामान्य सार्वजनिक सेवाओं जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पानी आपूर्ति, बैंकिंग, पुलिस, न्यायिक सेवाओं, हाउसिंग और कर सेवाओं को लेकर किया गया.



सर्वे में शामिल किए गए 20 राज्यों में लोगों ने साल 2017 में 6350 करोड़ रुपए रिश्वत के तौर पर दिए हैं जबकि 2005 में 20,500 करोड़ रुपए दिए गए थे.

कर्नाटक सबसे आगे
राज्यवार बात करें तो भ्रष्टाचार के मामले में कर्नाटक सबसे आगे रहा हैं. यहां 77 प्रतिशत लोगों का भ्रष्टाचार से सामना हुआ है. इसके बाद आंध्र प्रदेश (74 प्रतिशत), तमिलनाडु (68 प्रतिशत), महाराष्ट्र (57 प्रतिशत), जम्मू और कश्मीर (44 प्रतिशत) और पंजाब (42 प्रतिशत) का नंबर है.

सीएमएस के अध्यक्ष एन. भास्कर राव ने कहा सार्वजनिक सेवाओं में रिश्वत देने के मुख्य कारण दिखाते हैं कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जमीनी स्तर के मुद्दों पर बहुत कम ध्यान दिया गया है. रिपोर्ट जारी करते हुए देबोरॉय ने कहा कि रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के बड़े मामलों की बजाए हर दिन लोगों की जिंदगी को प्रभावित करने वाले भ्रष्टाचार को केंद्र में रखा गया है.

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