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सुषमा स्‍वराज के इन साहसिक काम की वजह से दुनिया ठोकती थी सलाम

छत्तीसगढ़ के बस्तर से भी उनका गहरा नाता रहा. तस्वीरों में देखिए कैसे बस्तर के नेताओं ने संभाल रखी है उनकी यादें.

छत्तीसगढ़ के बस्तर से भी उनका गहरा नाता रहा. तस्वीरों में देखिए कैसे बस्तर के नेताओं ने संभाल रखी है उनकी यादें.

बीजेपी की दिग्‍गज नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) का निधन हो गया है. उनके नाम दर्जनों रिकॉर्ड और उपलब्धियां दर्ज हैं. वह सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री रहीं, तो दिल्‍ली की पहली महिला सीएम की उपलब्धि भी उन्‍हीं के नाम दर्ज है.

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    बीजेपी की दिग्‍गज नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज (Sushma Swaraj) का 67 साल की उम्र में मंगलवार देर रात करीब 11 बजे दिल्‍ली के एम्‍स अस्‍पताल में निधन हो गया. उन्‍हें सीने में दर्द की शिकायत पर एम्‍स में भर्ती कराया गया था. 70 के दशक में भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर सियासी सफर शुरू करने वाली सुषमा स्‍वराज के नाम सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड है.

    वह महज 25 साल की उम्र में 1977 में अंबाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के लिए विधायक का चुनाव जीतीं और चौधरी देवी लाल की सरकार में राज्य की श्रम मंत्री बनीं. उनके नाम दिल्‍ली की पहली महिला मुख्‍यमंत्री बनने का रिकॉर्ड भी है. उन्‍होंने 12 अक्टूबर, 1998 को दिल्ली की पहली महिला सीएम के रूप में कार्यभार संभाला. हालांकि 3 दिसंबर, 1998 को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं. इसके बाद मोदी सरकार 1.0 में विदेश मंत्री रहीं. इस दौरान उन्‍होंने ट्विटर पर सक्रिय रहकर लोगों की खूब मदद की.

    सुषमा स्‍वराज के प्रयासों का ही नतीजा था कि बार-बार चीन के अड़ंगा अड़ाने के बावजूद 1 मई, 2019 को मसूद को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया.


    मसूद अजहर को अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी घोषित कराने में रहीं सफल
    सुषमा स्‍वराज ने विदेश मंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद से ही 13 दिसंबर, 2001 को भारत की संसद पर हुए आतंकी हमले के मास्‍टरमाइंड और पाकिस्‍तान से संचालित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी घोषित कराने की कवायद शुरू कर दी. उनके प्रयासों का ही नतीजा था कि बार-बार चीन के अड़ंगा अड़ाने के बावजूद 1 मई, 2019 को मसूद को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया. इससे पहले फरवरी में सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति में फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर चीन ने मसूद को बचाने के लिए तकनीकी रोक लगा रखी थी‌. सुषमा स्‍वराज की कूटनीति ही थी कि 1 मई, 2019 को चीन ने अडंगा नहीं अड़ाया.

    सुषमा स्वराज के लिए पाकिस्तान ने खोला एयर स्‍पेस
    भारत में नई सरकार बनने और नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान ने बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बाद बंद किए अपने एयर स्‍पेस को पहली बार सुषमा स्‍वराज के लिए ही खोला था. लंबे तनाव के बाद भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने की दिशा में जुटे पाकिस्‍तान ने सुषमा स्‍वराज की फ्लाइट को किर्गिस्‍तान जाने का रास्‍ता दिया.

    विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने वर्ष 2015 में सऊदी अरब की मदद से यमन में फंसे हजारों भारतीयों और विदेशियों को निकालने में सफलता हासिल की.


    सऊदी अरब की मदद ले यमन से निकाले 4000 भारतीय
    यमन में जब हूथी विद्रोहियों और सरकार के बीच जंग छिड़ी थी तो हजारों भारतीय वहां फंसे थे. जंग लगातार बढ़ रही थी और सऊदी अरब की सेना लगातार यमन में बम गिरा रही थी. इसी बीच यमन में फंसे भारतीयों ने विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मदद की गुहार लगाई. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने वर्ष 2015 में सऊदी अरब की मदद से यमन में फंसे भारतीयों और विदेशियों को निकालने में सफलता हासिल की. उस दौरान यमन से 4000 से ज्‍यादा भारतीयों व विदेशियों को निकालने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन राहत' शुरू किया था. अदन बंदरगाह से 1 अप्रैल, 2015 को समुद्र से इन लोगों को निकालने का काम चला था, जो 11 दिन तक चला था.

    सूडान से 150 और लीबिया से 29 भारतीयों को निकाला
    सुषमा स्‍वराज ने दक्षिण सूडान में छिड़े गृह युद्ध के दौरान वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी में बड़ी भूमिका निभाई. सूडान से भारतीयों को निकालने के लिए उन्‍होंने 'ऑपरेशन संकटमोचन' की शुरुआत की. इस ऑपरेशन के तहत दक्षिण सूडान में फंसे 150 से ज्‍यादा भारतीयों को बाहर निकाला गया. इसमें 56 लोग केरल के रहने वाले थे. इसके अलावा वह लीबिया में सरकार और विद्रोहियों के बीच छिड़ी जंग के दौरान 29 भारतीयों को वहां से सुरक्षित भारत लेकर आईं. हालांकि, इस दौरान एक भारतीय नर्स और उसके बेटे की मौत हो गई.

    महज 11 साल की उम्र में भटककर सरहद पार पाकिस्‍तान पहुंची मूक-बधिर भारतीय लड़की गीता को सुषमा स्‍वराज की कोशिशों के कारण ही भारत वापस लाया जा सका.


    भटककर पाकिस्‍तान पहुंची गीता को लाईं भारत
    महज 11 साल की उम्र में भटककर सरहद पार पाकिस्‍तान पहुंची मूक-बधिर भारतीय लड़की गीता को सुषमा स्‍वराज की कोशिशों के कारण ही भारत वापस लाया जा सका. गीता भारत आने के बाद सबसे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मिली. कराची स्थित एधि फाउंडेशन में भारत के उच्चायुक्त ने सुषमा स्‍वराज की गीता से मुलाकात कराई थी. गीता की मदद का प्रयास कर रहे पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी गीता की तस्वीरें लेकर अक्टूबर, 2012 में भी भारत आए थे, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली थी. इसके बाद सुषमा स्‍वराज की सक्रियता के चलते ही गीता भारत लौट पाईं.

    सरहद पार से लगाई गई गुहार को भी दी पूरी तव्‍वजो
    विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के लाहौर के उस नवजात शिशु को मेडिकल वीजा देना का भरोसा दिया, जो दिल की बीमारी से पीडि़त था. दरअसल उस बच्चे रोहान की मां ने सुषमा स्‍वराज से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था. इस पर सुषमा स्‍वराज ने ट्वीट कर कहा था कि हम भारत में रोहान के इलाज के लिए मेडिकल वीजा देंगे. रोहान की मां माहविश मुख्तान ने सुषमा स्‍वरात को ट्वीट किया था, 'जब मैं बच्चे को सीने से लगाती हूं, वह मुस्कराता है. वह जानता है कि मेरे साथ वह महफूज है. वीजा देने में मदद करें.' इससे पहले भी सुषमा स्वराज की पहल पर दो पाकिस्तानी नागरिकों को मेडिकल वीजा दिया गया था. कैंसर पीड़ित 25 वर्षीय फैजा तनवीर को 13 अगस्त, 2017 को, जबकि ढाई माह के बच्चे रोहन कंवल सिद्दीकी को जून, 2017 में मेडिकल वीजा दिया गया था. उसके दिल में छेद था.

    सुषमा स्‍वराज के प्रयासों का ही नतीजा था कि इराक में आईएस के चंगुल में फंंसी 46 भारतीय नर्सो को 5 जुलाई, 2014 को कोच्चि में परिजनों से मिलाया जा सका.


    युद्ध में फंसे इराक से 46 भारतीय नर्सों की कराई वतन वापसी
    इराक में आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट (ISIS) ने भारत की नर्सों को बंधक बना लिया था. इसके बाद तत्‍कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने भारतीय नर्सों की वतन वापसी के लिए अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कवायद शुरू की. उन्‍होंने इस पूरे मामले पर खुद नजर रखी और तब तक चैन से नहीं बैठीं जब तक सभी नर्सें सकुशल भारत नहीं पहुंच गईं. उन्‍हीं के प्रयासों का नतीजा था कि इराक से 46 भारतीय नर्सो सहित एयर इंडिया का विशेष विमान 5 जुलाई, 2014 की सुबह मुंबई पहुंचा. इसके बाद विमान कोच्चि पहुंचा, जहां सभी नर्सें अपने परिजनों से मिलीं.

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