सुषमा स्वराज ने फिल्म इंडस्ट्री को कराया था यह बड़ा फायदा

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार की रात हार्ट अटैक से निधन हो गया है. उन्हें गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हुआ. निधन के वक्त उनकी उम्र 67 साल थी.

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Updated: August 7, 2019, 2:59 PM IST
सुषमा स्वराज ने फिल्म इंडस्ट्री को कराया था यह बड़ा फायदा
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया है (फाइल फोटो)
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Updated: August 7, 2019, 2:59 PM IST
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार की रात हार्ट अटैक से निधन हो गया है. उन्हें गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हुआ. निधन के वक्त सुषमा स्वराज की उम्र 67 साल थी. भारतीय जनता पार्टी में सुषमा स्वराज अस्सी के दशक में पार्टी की शुरुआत के दौर से ही शामिल थीं. इससे पहले वे जनता पार्टी सरकार में मंत्री भी रही थीं.

बीजेपी में सुषमा स्वराज की काबिलियत के चलते उनका कद पार्टी के अंदर तेजी से बढ़ा. सुषमा स्वराज पर पार्टी का इस कदर विश्वास था कि जब अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 दिन की पहली सरकार बनाई तो सुषमा स्वराज को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण पद दिया गया. अगली बार बीजेपी के सत्ता में आने पर एक बार फिर सुषमा स्वराज को दूरसंचार मंत्रालय के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मिला.

सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री का रिकॉर्ड आज भी सुषमा स्वराज के नाम
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही सुषमा का राजनीति में रुझान दिखने लगा था. उसी दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़ीं. लेकिन उनके असली तेवर आपातकाल के दौरान देखने को मिले. जब वे जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन का हिस्सा बनीं तो आपातकाल में इंदिरा गांधी की निर्ममता के मद्देनज़र उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए उठाया गया ये कदम पूरे देश में आग की तरह फैल गया और इसके साथ ही जन्मी राजनीतिक सुषमा स्वराज. आपातकाल खत्म होने के साथ ही वे सक्रिय राजनीति के लिए जनता पार्टी से जुड़ीं. साल 1977 में ही उन्हें श्रममंत्री बना दिया गया था. इसी दौरान उन्हें मात्र 25 साल की उम्र में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ था.

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी थीं सुषमा स्वराज
दूसरी बार बनी वाजपेयी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनने के बाद सुषमा स्वराज ने ऐतिहासिक फैसला लैते हुए सुषमा स्वराज ने फिल्म इंडस्ट्री को उद्योग का दर्जा दे दिया था. इससे फिल्म इंडस्ट्री को बहुत फायदा हुआ था. फिल्म बनाने वाले सुषमा स्वराज के इस फैसले से बहुत खुश हुए थे क्योंकि इसके बाद आसानी से उन्हें लोन वगैरह मिलने लगा था. साल 1998 में सुषमा स्वराज दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. इसके बाद कुछ वक्त बाद वे इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं.

कर्नाटक में चुनाव अभियान में जातीं तो कन्नड़ में देती थीं भाषण
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सुषमा को बदलावों से कभी डर नहीं लगता था. बल्कि उनका सहज स्वभाव ही चुनौतियां स्वीकार करने का था. ऐसा ही वाकया यह है कि कर्नाटक में अपने चुनाव अभियानों के दौरान वे कन्नड़ में भाषण देती थीं, जिन्हें जनता बहुत पसंद करती थी. यूं तो सुषमा स्वराज की राजनैतिक उपलब्धियों की सूची बहुत लंबी हैं लेकिन आम लोगों के बीच वे काफी लोकप्रिय थीं. विदेशों में भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल में सुषमा स्वराज को बेस्ट लव्ड पॉलिटिशियन कहकर संबोधित किया गया था.



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First published: August 7, 2019, 12:25 AM IST
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