पश्चिम बंगालः विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया सुवेन्दु अधिकारी का इस्तीफा, बताई ये वजह

शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.

शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.

ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले अधिकारी ने विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा 16 दिसंबर को विधानसभा सचिवालय में सौंपा था. उस वक्त विधानसभा अध्यक्ष सदन में उपस्थित नहीं थे.

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  • Last Updated: December 19, 2020, 5:36 AM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा के अध्यक्ष विमान बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस विधायक सुवेंदु अधिकारी (Trinamool Congress MLA Suvendu Adhikari) का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है क्योंकि यह संविधान के प्रावधानों और सदन के नियमों के अनुरूप नहीं है. बनर्जी ने इस बात का जिक्र किया कि अधिकारी ने त्यागपत्र उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं सौंपा. उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि अधिकारी का यह कदम ‘‘स्वैच्छिक और वास्तविक’’ है या नहीं.

बनर्जी ने कहा, ‘‘जब तक मैं इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाता कि इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है, मेरे लिए भारत के संविधान के प्रावधानों और पश्चिम बंगाल विधानसभा में कामकाज के नियमों के आलोक में इसे स्वीकार करना संभव नहीं है.’’ ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले अधिकारी ने विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा 16 दिसंबर को विधानसभा सचिवालय में सौंपा था. उस वक्त विधानसभा अध्यक्ष सदन में उपस्थित नहीं थे.

बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज

अधिकारी ने बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था जिससे ये अटकलें और तेज हो गईं कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बुधवार को वह अपराह्न डेढ़ बजे तक सदन में थे, लेकिन अधिकारी ने 2.10 बजे विधानसभा सचिवालय में अपना इस्तीफा सौंपा.
विधानसभा अध्यक्ष ने 21 दिसंबर को उपस्थित रहने की बात कही

अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारी को मामले में अपनी बात कहने के लिए व्यक्तिगत रूप से 21 दिसंबर को उपस्थित होने को कहा गया है. विमान बनर्जी ने कहा कि त्यागपत्र पर कोई तारीख नहीं लिखी थी. उन्होंने हालांकि कहा कि ई-मेल पर भेजे गए पत्र में तारीख थी. उन्होंने अंतर को ‘‘संदिग्ध मामला’’ करार देते हुए कहा कि वह अधिकारी द्वारा त्यागपत्र की प्रामाणिकता के बारे में उन्हें संतुष्ट किए जाने के बाद ही इस्तीफा स्वीकार करेंगे.
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