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भारत के ‘शुक्रयान’ को स्वीडन देगा विशेष उपकरण, 2024 या 2026 में हो सकता है लॉन्च

(फोटो: NASA)
(फोटो: NASA)

पहली पीढ़ी के उपकरण का नाम ‘सारा’ (SARA) था और उसका इस्तेमाल 2008-2009 के दौरान चंद्रयान-एक अभियान में किया गया था. यह आईआरएफ और इसरो के बीच पहली सहयोगात्मक परियोजना थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 2:05 PM IST
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बेंगलुरु. भारत के शुक्र ग्रह ऑर्बिटर अभियान ‘शुक्रयान’ (Shukrayaan) के साथ स्वीडन (Sweden) ने भी जुड़ने का फैसला कर लिया है. इसके तहत वह ग्रह पर खोज करने के लिए एक वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध कराएगा. भारत में स्वीडन के राजदूत, क्लास मोलिन ने कहा कि इसमें स्वीडिश अंतरिक्ष भौतिकी संस्थान (आईआरएफ) भारत का सहयोग करेगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ आईआरएफ का यह दूसरा सहयोग है. मोलिन ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'आईआरएफ उपग्रह उपकरण विनसियन न्यूट्रल्स एनालाइजर (वीएनए) इस पर अध्ययन करेगा कि सूर्य से निकलने वाले आवेशित कण (शुक्र) ग्रह के वातावरण में कैसा व्यवहार दिखाते हैं.' उन्होंने कहा, 'शुक्र अभियान का मतलब है कि आईआरएफ और इसरो के बीच सहयोग जारी रहेगा.' स्वीडिश अधिकारियों के अनुसार वीएनए, आईआरएफ द्वारा विकसित नौवीं पीढ़ी का उपकरण है.

पहली पीढ़ी के उपकरण का नाम ‘सारा’ (एसआरए) था और उसका इस्तेमाल 2008-2009 के दौरान चंद्रयान-एक अभियान में किया गया था. यह आईआरएफ और इसरो के बीच पहली सहयोगात्मक परियोजना थी. मोलिन ने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग का दायरा बहुत बड़ा है. उन्होंने कहा कि इस दायरे में संस्थानों से लेकर तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.

इसरो ने सोमवार को 20 स्पेस आधारित प्रयोगात्मक प्रस्तावों को शॉर्ट लिस्ट किया था. इनमें फ्रांस भी शामिल था. देश के पहले शुक्र मिशन के लिए इसरो जून 2023 के लिए तैयारी कर रही थी, लेकिन संस्था के एक अधिकारी ने बताया 'महामारी के कारण हुई देरी के चलते हम मिशन की टाइमलाइन की समीक्षा कर रहे हैं. भविष्य में 2024 या 2026 में लॉन्च की स्थिति बन सकती है.' खास बात है कि ऑप्टिमल लॉन्च विंडो हर 19 महीने में आता है. यह वह वक्त होता है जब शुक्र, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है.
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