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चुनाव से पहले स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बंगाल में राजनीति, ममता और शुभेंदू के ट्वीट की हो रही चर्चा

स्वामी विवेकानंद की प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI Photo/Ashok Bhaumik)
स्वामी विवेकानंद की प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI Photo/Ashok Bhaumik)

स्वामी विवेकानंद अपने ओजपूर्ण और बेबाक भाषणों के कारण काफी लोकप्रिय हुए, विशेषकर युवाओं में. इसी कारण उनके जन्मदिन को पूरा राष्ट्र ‘युवा दिवस’ के रूप में मनाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 12, 2021, 5:21 PM IST
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नई दिल्ली. देश आज स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) की 150वीं जयंती मना रहा है. शीर्ष नेता और आम जन आज इस मौके पर स्वामी विवेकानंदऔर उनके विचारों का याद कर रहा है. हालांकि पश्चिम बंगाल में स्वामी विवेकानंद की जयंती भी राजनीति की चपेट में आती दिख रही है. एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने स्वामी विवेकानंद के विश्व बंधुत्व के संदेश को याद किया तो बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व टीएमसी नेता शुभेंदू अधिकारी ने उन्हें बंगाल का गौरव बताया. अगले कुछ महीनों में बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं. राज्य में बाहरी बनाम स्थानीय के राजनीतिक दांव पेंच में बीजेपी, टीएमसी प्रतीकों की राजनीति कर रही है.

इसी कड़ी में मंगलवार को सीएम ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के ट्वीट राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने रहे. एक ओर जहां ममता ने ट्वीट किया- महान नेता स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर याद करते हुए मैं स्वामी जी की दिए उपदेशों को नमन् करती हूं. शांति और भाईचारे का उनका संदेश वैश्विक स्तर पर आज प्रासंगिक है. यह संदेश हम सभी को अपने प्रिय राष्ट्र में इन आदर्शों की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है.
शुभेंदू अधिकारी ने क्या लिखा?वहीं शुभेंदू अधिकारी ने लिखा- 'आज, पूरा राष्ट्र भारत माता के एक सच्चे पुत्र - स्वामी विवेकानंद जी के प्रति सम्मान देने के लिए श्रद्धा से अपना सिर झुका रहा है.' अधिकारी ने कहा- 'स्वामी जी ने प्रत्येक सांस राष्ट्र के लिए समर्पित किया. उनके कालजयी विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कि वे 19 वीं सदी में थे. वह हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते हैं. एक ओर जहां पश्चिम बंगाल को उनकी जननी भूमि होने का सम्मान प्राप्त है, वहीं पूरे राष्ट्र को उनके कर्मभूमि होने का सौभाग्य प्राप्त है.'

अधिकारी ने लिखा- 'बेलूर (पश्चिम बंगाल) से खेतड़ी (राजस्थान), तुलमुल (कश्मीर) से कन्याकुमारी (तमिलनाडु) तक, हर राज्य के पास स्वामी जी का अपना अनुभव हैं जो आज तक याद किया जा रहा है. उनको सबसे बड़ी श्रद्धांजलि उनके आदर्शों पर चलना है.'



गौरतलब है स्वामी विवेकानंद का नाम इतिहास में एक ऐसे विद्वान के रूप में दर्ज है, जिन्होंने मानवता की सेवा को अपना सर्वोपरि धर्म माना. अमेरिका के शिकागो में धर्म सभा में अपने धाराप्रवाह भाषण के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आए भारतीय संन्यासी स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल में हुआ था.
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