कानून मानते हैं तबलीगी, सही व्यवहार नहीं हुआ तो खड़ी हो सकती है समस्या: ब्रिटिश इतिहासकार

तबलीगी जमात, भारत में कोरोना वायरस के प्रसार की चर्चा के केंद्र में है (सांकेतिक तस्वीर, Reuters)
तबलीगी जमात, भारत में कोरोना वायरस के प्रसार की चर्चा के केंद्र में है (सांकेतिक तस्वीर, Reuters)

लंदन यूनिवर्सिटी (London University) के प्रोफेसर फ्रांसिस रॉबिन्सन ने कहा है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार ने जमात के पारंपरिक रूप से काम करने पर रोक लगा दी है और भारत में कुछ ऐसे तत्व हैं, जो इसे मुस्लिमों (Muslims) पर हमला करने के एक मौके के तौर पर देखेंगे.

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दिल्ली. दिल्ली (Delhi) में आयोजित निजामुद्दीन मरकज़ (Nizamuddin markaz) में तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) के कार्यक्रम से कई कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले सामने आने के साथ ही, इस मिशनरी संगठन को लेकर कई लोगों में जिज्ञासा और विवाद पैदा हो गया है. इस संगठन की स्थापना मुस्लिमों, मुस्लिम बनो के सूत्रवाक्य के साथ की गई थी.

मार्च के मध्य में राष्ट्रीय राजधानी (National Assembly) में एक बड़ी सभा के आयोजन के लिए इस मिशनरी संगठन (Missionary Organisation) के अनुयायियों को गैर जिम्मेदाराना और अनियंत्रित कहा जा रहा है. इसके नेताओं के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत FIR दर्ज कराई गई है.

तबलीग के सदस्यों से हुई नाइंसाफी तो खड़ी हो सकती हैं समस्याएं
इस बीच कई मुस्लिमों ने खुद को तबलीग से अलग भी कर लिया है और कहा है कि यह पूरे मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करती है.
ऐसे में ब्रिटिश इतिहासकार और विद्वान फ्रॉन्सिस रॉबिन्सन, जो दक्षिण एशियाई और इस्लामिक इतिहास के जानकार हैं, उन्होंने कहा है कि तबलीग जो कि एक कानून को मानने वाला समूह है, अगर उसके सदस्यों के साथ नाइंसाफी की गई तो समस्याएं पैदा हो सकती हैं.



ब्रिटिश राजशाही से प्रतिष्ठित सम्मान पा चुके हैं रॉबिन्सन
न्यूज18 के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में 2006 में इस्लाम के इतिहास में उच्च शिक्षा और रिसर्च के अपने कामों के लिए ब्रिटिश राजशाही से प्रतिष्ठित CBE की उपाधि पाने वाले रॉबिन्सन ने इस जमात के यात्रा करने वाले अनुयायियों के बारे में बातचीत की.

लंदन यूनिवर्सिटी (London University) के प्रोफेसर ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार ने जमात के पारंपरिक तरीके से काम करने को प्रभावित किया है, जिसमें इसके अनुयायी समूहों में मिशनरी कामों के लिए यात्राएं किया करते हैं. पढ़ें इंटरव्यू के अंश-

तबलीग-ए-जमात का अंतरराष्ट्रीय केंद्र निजामुद्दीन मरकज़ कोरोना वायरस के प्रसार का एक हॉटस्पॉट बन गया है. आपको क्या लगता है कि वायरस इस जमात के लगातार यात्रा करने वाले अनुयायियों को कैसे प्रभावित करेगा?
पहली बात जो याद रखनी चाहिए कि तबलीगी साधारण मुस्लिम (Ordinary Muslims) हैं, जो जिंदगी को अलग तरह से जीते हैं. अगर राज्य लोगों को समूहों में मिलने से रोकना चाहता है, तो इससे वे भी प्रभावित होंगे, जैसे अन्य मुस्लिम प्रभावित होंगे.

लेकिन एक जगह जहां तबलीगी ज्यादा प्रभावित होंगे, वह उनका मिशनरी काम (Missionary Work) है. तबलीगी किसी निश्चित संख्या में हर साल तबलीग करने का फैसला करते हैं. इसके बाद वे समूह बनाकर, अक्सर 10-10 के भाषण देने के लिए जगह-जगह जाते हैं. इस गतिविधि को रोकना ही होगा क्योंकि सरकार ने आवाजाही और इकट्ठे होने पर रोक लगा दी है.

बड़ी संख्या में तबलीगी कार्यक्रम के चलते होने वाली मौतों की बात सामने आ रही है, इसके साथ ही सोशल मीडिया 'कोरोना जिहाद' और अन्य इस्लामोफोबिक हैशटैग के साथ भर गया है.
दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, भारत में भारत में ऐसे तत्व हैं जो मुस्लिमों (Muslims) पर हमले के किसी भी मौके को नहीं छोड़ना चाहते.

यहां क्लिक करके अंग्रेजी में पढ़ें पूरा इंटरव्यू

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