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तबलीगी जमात केस में सभी 36 विदेशी बरी, कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार, कहा- कोई ठोस सबूत नहीं

अदालत ने विदेशी जमातियों को बरी कर दिया है.
अदालत ने विदेशी जमातियों को बरी कर दिया है.

Coronavirus In India: तब्लीगी जमात के मामले में आरोपित सभी 36 विदेशी लोगों को दिल्ली की एक कोर्ट ने बरी कर दिया. अदालत ने पाया कि अभियोजन मरकज में इनकी मौजूदगी को साबित करने में असफल रहा और गवाहों के बयान विरोधाभासी थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 16, 2020, 7:34 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने देश में कोविड-19 महामारी (Coronavirus In India) के मद्देनजर जारी सरकारी दिशानिर्देश का पालन नहीं करते हुए कथित तौर पर तबलीगी जमात (Tabligi Jamaat ) के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आरोपों का सामना कर रहे 36 विदेशियों को मंगलवार को बरी कर दिया. मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने 14 देशों के इन नागरिकों को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

अदालत ने 24 अगस्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी सेवक द्वारा लागू आदेश का पालन नहीं करना), 269 (संक्रमण फैलाने के लिए लापरवाही भरा कृत्य करना) और महामारी कानून की धारा तीन (नियमों को नहीं मानना) के तहत विदेशियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. आपदा प्रबंधन कानून, 2005 की धारा 51 के तहत भी उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे.

विदेशी कानून की धारा 14 (एक) (बी)(वीजा नियमों का उल्लंघन), आईपीसी की धारा 270 (संक्रमण फैलाने के लिए लापरवाही भरा कृत्य करना) और 271 (आइसोलेशन के नियमों को नहीं मानना) के तहत उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया. अदालत ने ठोस सबूत नहीं मिलने पर छह देशों के आठ विदेशी नागरिकों को भी आरोपमुक्त कर दिया था. उनके खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किए गए थे.



 विदेशियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया 
वीजा नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए मिशनरी गतिविधियों में हिस्सा लेने, कोविड-19 के मद्देनजर सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करते हुए निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए विदेशियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था.

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन "मरकज परिसर के अंदर अभियुक्तों की उपस्थिति को साबित करने में विफल रहा' और गवाहों के बयानों में 'विरोधाभास' थे. आदेश पारित करते हुए मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने हजरत निजामुद्दीन SHO को भी तलब किया.

गवाहों के बयानों में विरोधाभास का जिक्र करते हुए अदालत ने कुछ अभियुक्तों द्वारा दलील को स्वीकार किया कि 'उस अवधि के दौरान उनमें से कोई भी मरकज में मौजूद नहीं था और उन्हें अलग-अलग से उठाया गया था ताकि गृह मंत्रालय के निर्देश पर दुर्भावना से उन पर मुकदमा चलाया जा सके … '

अदालत ने कहा 'यह समझ से परे है कि कैसे IO (इंस्पेक्टर सतीश कुमार) ने 2,343 व्यक्तियों में से 952 विदेशी नागरिकों की पहचान कर सकता है. SHO के अनुसार /ये सभी दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए पाए गए. कोई  टेस्ट आइडेंटिटी परेड (TIP) नहीं कराई गई  बल्कि एमएचए (गृह मंत्रालय) द्वारा दी गई लिस्ट का इस्तेमाल किया गया.
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