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Indo-Pak War 1971: इंडियन एयर फोर्स ने पाकिस्तानी सेना की नजर से 15 दिन तक ऐसे छिपाए रखा ताजमहल

ताज महल को पहली बार बंद करने का मौका भारत-पाक के 1971 (Indo-Pak War 1971) के दौरान आया था.
ताज महल को पहली बार बंद करने का मौका भारत-पाक के 1971 (Indo-Pak War 1971) के दौरान आया था.

ताजमहल (Taj Mahal) को 1920 में संरक्षित इमारत घोषित किया गया था. इसके बाद इसको पहली बार बंद करने का मौका भारत-पाक के 1971 (Indo-Pak War 1971) के दौरान आया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 16, 2020, 6:57 AM IST
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नई दिल्ली. दिसंबर की उन सर्द रातों में 1971 का भारत-पाकिस्तान (India-pakistan War 1971) का युद्ध लड़ा जा रहा था. पाकिस्तान अंदर तक घुसने की कोशिश कर रहा था. इसी के तहत कई बार पाकिस्तान के लड़ाकू विमान आगरा (Agra) तक भी आए थे. यहां बने एयर फोर्स स्टेशन को टॉरगेट करते हुए बम (Bomb) भी गिराए थे, लेकिन एक भी बम निशाने पर नहीं गिरा था. हालांकि पाकिस्तान की इस हरकत ने परेशानी बढ़ा दी थी. ताजमहल से अनुमान लगाकार दुश्मन कहीं एक बार फिर एयरफोर्स स्टेशन (Air Force Station) को निशाना बनाने न आ जाए, इसलिए ताजमहल (Tajmahal) की हिफाज़त भी जरूरी हो गई थी. इसके बाद एयर फोर्स के आदेश पर ताजमहल को 15 दिन तक के लिए ढक दिया गया था.

1971 की भारत-पाक युद्ध लड़ चुके कर्नल रिटायर्ड एसएम कुंजरू की मानें तो ताजमहल को पाकिस्तानियों की बमबारी से बचाने के लिए 15 दिन तक के लिए बंद कर दिया गया. यह इसलिए भी ज़रूरी हो गया था कि 3 दिसम्बर को पाकिस्तानी एयर फोर्स ने अंबाला, पठानकोट, आगरा और जोधपुर में हवाई हमले शुरू कर दिए थे. पाकिस्तान के लड़ाकू विमान के पायलटों को ताजमहल दिखाई न दे, इसलिए उसे हरे रंग के कपड़े से ढक दिया गया. ताज की मीनारों पर लकड़ी की पाड़ बनाकर उस पर हरा कपड़ा लटका दिया गया था.

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इतना ही नहीं चांदनी रात में ताजमहल के पत्थर चमकें नहीं इसलिए ताज के फर्श पर घास और पेड़ की टहनियां बिछा दी गई थीं. कहा जाता है कि इसके बाद भी पाक ने ताजमहल को निशाना बनाते हुए एक बम गिराया था. लेकिन वो ताज पर गिरने के बजाए यमुना नदी की रेत में गिरा था. और इस तरह से ताजमहल पाकिस्तानी बम का निशाना बनने से बच गया था.

अब तक तीन बार बंद हो चुका है ताजमहल

एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशुद्दीन का कहना है कि 1920 में ताजमहल को संरक्षित इमारत घोषित किया गया था. इसके बाद ताजमहल को पहली बार बंद करने का मौका भारत-पाक के 1971 के दौरान आया था. फिर जब 1978 में यमुना नदी में बाढ़ आई तो 7 दिन के लिए ताजमहल को बंद किया गया था और फिर अब जब कोरोना और लॉकडाउन के चलते मार्च से लेकर सितम्बर तक ताजमहल पूरी तरह से बंद रहा.
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