चंद्रयान-2 ने भेजी चंद्रमा की पहली तस्वीर, देखी आपने?

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Updated: August 23, 2019, 5:29 AM IST
चंद्रयान-2 ने भेजी चंद्रमा की पहली तस्वीर, देखी आपने?
चंद्रयान-2 ने चंद्रमा की कक्षा से चांद की पहली तस्वीर भेजी है (News18 क्रिएटिव)

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) ने चंद्रमा से पहली तस्वीर भेज दी है. इस तस्वीर मे चांद (Moon) का स्वरूप जैसा जमीन से दिखता है, उससे बहुत ज्यादा अलग दिख रहा है.

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चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) दो दिन पहले ही यानी 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा (Moon Orbit) में पहुंच गया था. अब चंद्रयान-2 ने वहां से चंद्रमा (Moon) की पहली तस्वीर भेजी है. इस तस्वीर में चंद्रमा का स्वरूप, धरती से दिखने वाले चंद्रमा से काफी अलग दिख रहा है. इसरो ने चंद्रयान-2 की इस तस्वीर की जानकारी ट्वीट करके दी.

इसरो ने बताया कि चंद्रमा से हजारों किमी ऊपर मौजूद उसकी कक्षा में रहते हुए ही चंद्रयान 2 (Chandrayaan-2) ने यह तस्वीर ली है. इस तस्वीर में चंद्रमा पर मौजूद कुछ चर्चित स्थानों को भी देखा जा सकता है.

तस्वीर में देखी जा सकती हैं चांद पर मौजूद ये चर्चित जगहें
इसरो (ISRO) ने अपने ट्वीट में लिखा है- देखें चंद्रयान 2 की खींची गई चंद्रमा की पहली तस्वीर. चंद्रयान 2, विक्रमलैंडर ने यह तस्वीर 21 अगस्त, 2019 को चंद्रमा की सतह से 2650 किमी की ऊंचाई से ली है.

इसरो ने अपने ट्वीट में यह भी बताया है कि चंद्रमा पर मौजूद दो फेमस जगहों मरे ओरियंटल बेसिन और अपोलो को इस तस्वीर में साफ-साफ देखा जा सकता है.



मंगलवार को चंद्रयान-2 ने चांद की कक्षा में किया था प्रवेश
इससे पहले 20 अगस्त को चंद्रयान 2 चंद्रमा की कक्षा में सुबह नौ बजे प्रवेश कर गया था. चंद्रयान 2 को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने की प्रक्रिया को इसरो ने 30 मिनट तक चली प्रक्रिया के जरिए अंजाम दिया था.

इस दौरान चंद्रयान 2 की गति 2.4 किमी/सेकेंड से घटकर 2.1 किमी/सेकेंड हो गई थी. इस घटना का जिक्र करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के. सिवन (K Sivan) ने कहा था कि ऐसा होने से उनके दिल की धड़कनें लगभग थम गई थीं लेकिन अंतत: वे इसे सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में प्रवेश कराने में सफल रहे.

सात सितंबर को होगी सॉफ्ट लैंडिंग
लैंडर सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा और यदि यह बेहद जटिल प्रक्रिया सफल होती है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. मंगलवार की प्रक्रिया सफल होने के बाद सिवन ने कहा कि यान 140 किलोमीटर के निकटतम बिंदु और 18,000 किलोमीटर के सुदूरतम बिंदु के साथ कक्षा में चांद के चक्कर लगाएगा.

उन्होंने कहा कि 100 किलोमीटर X 100 किलोमीटर का निकटतम और सुदूरतम बिंदु हासिल करने के लिए एक सितंबर को चार और प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा.

‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से जुड़ी जटिलता पर प्रकाश डालते हुए सिवन ने कहा कि चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास 90 डिग्री के झुकाव के साथ ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की अनन्य आवश्यकता है जो कि विगत के किसी भी मिशन में प्राप्त नहीं हुई है. सिवन ने बताया कि ‘विक्रम’ लैंडर (Vikram Lander) दो सितंबर को ऑर्बिटर से अलग होगा. इसके बाद इसरो का ध्यान लैंडर पर केंद्रित होगा.

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First published: August 23, 2019, 5:20 AM IST
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