NRC और तीन फौजी भाइयों की कहानी, लिस्ट में एक शामिल दो बाहर

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Updated: September 1, 2019, 8:53 AM IST
NRC और तीन फौजी भाइयों की कहानी, लिस्ट में एक शामिल दो बाहर
टेल ऑफ़ थ्री 'फौजी' ब्रदर्स.

एनआरसी की अंतिम लिस्ट (Final NRC) से बाहर छूटे भारतीय सेना के जवान दिलबर कहते हैं, 'सालों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद मैं आज जितना अपमानित महसूस कर रहा हूं, उतना पूरी जिंदगी में कभी नहीं किया था. भगवान जानता है कि क्या चल रहा है.'

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नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) की आखिरी सूची से बाहर किए गए लोगों में पश्चिमी असम का एक परिवार भी शामिल है, जिसके कई सदस्य देश की रक्षा में सालों से सीमा पर तैनात हैं. एनआरसी की आखिरी सूची असम (Assam) के भारतीय नागरिकों की पहचान की पुष्टी करती है. ये सूची शनिवार को जारी की गई. 19 लाख से ज्यादा आवेदक इस सूची में जगह बनाने से असफल रहे. उनका भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है.

फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपील करने के लिए 120 दिन हैं
एनआरसी में शामिल होने के लिए कुल 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन किया था. उनमें से 3,11,21,004 को सूची में शामिल किया गया है, जबकि 19,06,657 नामों को बाहर रखा गया है. इसके बारे में एनआरसी राज्य समन्वयक के कार्यालय ने एक बयान में बताया कि जिन लोगों को एनआरसी से बाहर रखा गया है, उनके पास फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपील करने के लिए 120 दिन हैं.

हालांकि जो किसी भी परिस्थिति में एनआरसी सूची में नहीं आते हैं, उनको असम सरकार ने हिरासत में लेने से इनकार कर दिया है. वहीं इस लिस्ट को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं. यहां तक ​​कि रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले लोग भी अपनी राष्ट्रीयता को साबित करने में असफल रहे हैं, जिसमें कारगिल युद्ध के जांबाज़ और बीएसएफ जवान भी शामिल हैं.

NRC और तीन फौजी भाई
ट्रिब्यूनल में अपना मुकदमा लड़ने के बाद बारपेटा निवासी साहिदुल को आखिरकार इस सूची में शामिल कर लिया गया, लेकिन उनके भाइयों दिलबर और मिजानुर का नाम इसमें से गायब है. 1 अप्रैल, 2019 को ट्रिब्यूनल में केस जीतने वाले साहिदुल ने अपने दस्तावेज दाखिल करते समय अपने परिवार के सभी सदस्यों का विवरण भी शामिल किया था, लेकिन अंतिम अपडेट की गई सूची में उनके भाइयों का नाम गायब है.

जबकि साहिदुल जलपाइगुड़ी के बिन्नागुरी में तैनात सूबेदार हैं, दिलबर लखनऊ में तैनात भारतीय सेना का सिपाही है और मिज़ानूर सीआईएसएफ कांस्टेबल हैं, जो फिलहाल चेन्नई में तैनात है. साहिदुल के दो और भाई हैं, जिनकी पहचान रुस्तम और दानिश के रूप में हुई है, दोनों स्थानीय व्यवसायी हैं. उन दोनों का नाम एनआरसी सूची में शामिल किया गया है. हालांकि, दानिश की बेटी सुमैया को शामिल नहीं किया गया, जबकि उनकी पत्नी नजमा का नाम सूची में हैं. इन सबसे ऊपर, उनकी मां खुदेजा बेगम का नाम भी सूची से गायब है.
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साहिदुल ने न्यूज 18 के सामने रखी अपनी बात
इन सारे घटनाक्रमों के बीच ट्रिब्यूनल में राष्ट्रीयता का मुकदमा जीतने के बाद भी वह उदास हैं. साहिदुल ने न्यूज 18 से कहा, 'सर, हम सदमे में हैं. हम भ्रमित हैं और ये नहीं समझ रहे कि क्या करना है. मेरे परिवार के कुछ सदस्यों के नाम शामिल हैं, जबकि कुछ के नाम गायब हैं. क्या चल रहा है? क्या आप हमारी मदद के लिए किसी को भेज सकते हैं? हम पांच भाइयों में से तीन आर्मी और CISF के लिए काम करते हैं. हमने अपना जीवन अपने प्यारे देश की सेवा के लिए दिया और इनाम के रूप में सरकार ने हमारे भाई के नामों को एनआरसी की सूची से बाहर कर दिया है.'

आगे उन्होंने कहा, "हम राज्य सरकार से हमारे मामले को देखने का अनुरोध कर रहे हैं. नहीं तो हम तबाह हो जाएंगे. जब से एनआरसी सूची सामने आई, हम सदमें में हैं.' दिलबर ने कहा, 'सालों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद मैं आज जितना अपमानित महसूस कर रहा हूं, उतना पूरी जिंदगी में कभी नहीं किया था. भगवान जानता है कि क्या चल रहा है.'

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First published: September 1, 2019, 8:27 AM IST
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