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विरोध में उठती महिलाओं आवाज़ से डरा तालिबान! उठाने जा रहा है बड़ा कदम

इस महिला विंग में तालिबानी लड़ाकों की पत्नियां, बहनें और बेटियां शामिल होंगी.( FILE PHOTO)

इस महिला विंग में तालिबानी लड़ाकों की पत्नियां, बहनें और बेटियां शामिल होंगी.( FILE PHOTO)

इस महिला विंग में तालिबानी लड़ाकों की पत्नियां, बहनें और बेटियां शामिल होंगी. 7-8 महिलाएं जिनकी शिक्षा भारत,चीन,ब्रिटेन और ईरान में हुई है, वो इस फीमेल विंग को लीड करेंगी. ये महिलाएं पुलिस,सोशल वर्क जैसे कई अहम विभागों को लीड करेंगी.

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नई दिल्ली. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ जुल्म के विरोध में अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में तालिबान के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं. हथियारबंद तालिबानी लड़ाकों के सामने प्लकार्ड लेकर नारे लगाती महिलाओं की तस्वीरें आम हैं. खतरनाक हथियारों से लैस तालिबानी लड़ाकों के सामने बेखौफ प्रदर्शन करती महिलाओं को देखकर तालिबान को महिलाओं के बड़े विद्रोह का डर सताने लगा है. इस हालात से निपटने के लिए तालिबान ने एक महिला विंग तैयार किया है.

इस महिला विंग में तालिबानी लड़ाकों की पत्नियां, बहनें और बेटियां शामिल होंगी. 7-8 महिलाएं जिनकी शिक्षा भारत,चीन,ब्रिटेन और ईरान में हुई है, वो इस फीमेल विंग को लीड करेंगी. ये महिलाएं पुलिस,सोशल वर्क जैसे कई अहम विभागों को लीड करेंगी. इन सब की हेड एक महिला ऑफिस बेयरर सीधे इंटीरियर मिनिस्टर सिराजुद्दीन हक़्क़ानी और टॉप तालिबानी लीडरशिप को रिपोर्ट करेगी. तालिबान समर्थक ये  महिलाएं फिलहाल सरकारी दफ्तर,स्कूल और कॉलेज भी जा रही हैं, जबकि दूसरी महिलाओं को काम पर आने की इजाज़त नहीं.

प्रो. तालिबान ये महिलाएं और लड़कियां तालिबानी कानून को महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी बताकर अफ़ग़ानिस्तान की दूसरी लड़कियों और महिलाओं को तालिबान के समर्थन में लाने की कोशिश में जुटी हैं. इन महिलाओं को कंदधार और कुनार प्रान्त में 15 दिनों की ट्रेनिंग दी गयी है.
इनकी आगे की ट्रेनिंग के लिए तालिबान टर्की और पाकिस्तान से बात कर रहा है. ये तालिबान की बुर्का रिजीम की ब्रैंड एम्बेसडर होंगी.

सूत्रों के मुताबिक तालिबान के सत्ता पर काबिज़ होने में पीछे इन महिलाओं की भी बड़ी भूमिका रही है. ये महिलाएं तालिबान के जासूसी नेटवर्क का अहम हिस्सा थीं और इलाके में हो रही घटनाओं की पूरी जानकारी तालिबान को मुहैया कराती थीं. साफ ज़ाहिर है कि साम,दाम ,दंड ,भेद के इस्तेमाल के जरिये तालिबान अपने खिलाफ उठते विरोध के स्वर को दबाने और सत्ता पर अपनी पकड़ को मज़बूत बनाने में जुटा है.

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