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तालिबान की अफगानिस्तान पर जीत से पाकिस्तान और चीन के रिश्ते में दरार

तालिबान की अफगानिस्तान पर जीत से पाकिस्तान और चीन के रिश्ते में दरार

पाकिस्तान तालिबान की जीत पर ऐसे जश्न मना रहा है जैसे ये उनकी जीत है.(फाइल फोटो)

पाकिस्तान तालिबान की जीत पर ऐसे जश्न मना रहा है जैसे ये उनकी जीत है.(फाइल फोटो)

Taliban in Afghanistan: पाकिस्तान तालिबान की जीत के बाद से ही मिले ध्यान को प्रचारित करने में लगा हुआ है. वो सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का ही ध्यान खींचने की कोशिश नहीं कर रहा है बल्कि साथ ही साथ खाड़ी देशों के शासक जिनकी मध्यपूर्व खासतौर पर इजरायल के साथ गठबंधन की योजना है.

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  • News18Hindi
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    इस्लामाबाद. राजनीति से लेकर क्रिकेटर और इस्लामी चरमपंथियों तक पाकिस्तान में हर कोई तालिबान की जीत का जश्न मना रहा है. वहीं पाकिस्तान का हमराज, हमसफर चीन काबुल में प्रवेश के लिए जोर जुगत में लगा हुआ है, ताकि वो युद्धग्रस्त देश में अपने अरबों डॉलर की बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) परियोजना यानि बेल्ट और सड़क पहल परियोजना को अमली जामा पहना सके.

    कुंवर खुलदुने शाहिद हारीत्ज में लिखते हैं कि पाकिस्तान को भरोसा था कि तालिबान की जीत के बाद वो चीन के साथ सौदेबाजी के लिए बेहतर स्थिति में होगा, लेकिन पाकिस्तान की तालिबान और अफगानिस्तान तक पहुंच के तमाम दावे और इरादे धरे रह जाने हैं क्योंकि चीन की आर्थिक स्थिति के सामने पाकिस्तान कहीं टिकता नहीं है और अफगानिस्तान को अभी कोई लुभा सकता है तो वो आर्थिक आकर्षण ही है. चीन अपनी अरबों डॉलर की सड़क परियोजना के लिए इसे एक अवसर की तरह देख रहा है. चीन ने अपने बयान में कहा कि तालिबान के नेता बीआरआई का समर्थन करते हैं और उनका मानना है कि ये परियोजना युद्ध में तबाह हुए देश के विकास और खुशहाली के लिए बेहद अहम है. वहीं तालिबान ने चीन को एक अहम साझेदार बताते हुए कहा कि चीन हमारे देश को दोबारा खड़ा करने के लिए निवेश करने को तैयार है.

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     उधर पाकिस्तान तालिबान की जीत पर ऐसे जश्न मना रहा है जैसे ये उनकी जीत है. कुछ इस्लामी चरमपंथी इसे इस्लामी शासन की वापसी मान रहे हैं, वहीं क्रिकेटर से लेकर वरिष्ठ महिला जज और यहां तक कि महिलाओं के स्कूल और संगठन भी तालिबान का खुल कर समर्थन कर रहे हैं.

    अफगानिस्तान में श्रेष्ठता साबित करने में पाकिस्तान
    हारीत्ज में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि शिक्षित महिलाएं, पत्रकार और सांस्कृतिक हस्तियां इस जीत को अपनी जीत मान रही हैं. इसके अलावा पाकिस्तान का यह बयान पश्चिम को तालिबान को प्रभावित करने और वहां तक पहुंच बनाने के पाकिस्तान की जरूरत है. कहीं ना कहीं अफगानिस्तान में पाकिस्तान की श्रेष्ठता साबित करते हुए पश्चिमी ताकतों को धमकाने का प्रयास है.

    पाकिस्तान तालिबान की जीत के बाद से ही मिले ध्यान को प्रचारित करने में लगा हुआ है. वो सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का ही ध्यान खींचने की कोशिश नहीं कर रहा है बल्कि साथ ही साथ खाड़ी देशों के शासक जिनकी मध्यपूर्व खासतौर पर इजरायल के साथ गठबंधन की योजना है. उनको भी संदेश दे रहा है कि काबुल की घटना के बाद जो खाड़ी देशों के यहूदी देश के साथ संबंध स्थापित करने के मंसूबों पर अवरोध खड़ा हो गया है, उसके बाद पाकिस्तान अरब राज्यों की पूर्व में यहूदी विरोधी उन्माद भड़काने की साजिश को फिर से अपने हाथ में ले सकता है.

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    पाकिस्तान का आत्मप्रचार हो सकता है कि दबी जबान में चीन को समझाइश हो. जो पाकिस्तान पर आर्थिक नियंत्रण बढ़ाता जा रहा है. और हाल ही में पाकिस्तान के भीतर जिहादियों के खतरे के डर को याद दिलाया जो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की सबसे बड़ी रुकावट है, यही आर्थिक गलियारा चीन की महत्वकांक्षी सड़क परियोजना की रीढ़ है. वैसे भी अमेरिका की वापसी के बाद जिहादियों के साम्राज्य के साथ चीन को अकेला सामना करना है, जिनके पास करोड़ों के शस्त्र मौजूद हैं. लेकिन फिर भी पाकिस्तान को चीन को कमतर साबित करना इतना आसान नहीं होगा. क्योंकि आर्थिक रूप से वो चीन के सामने कहीं नहीं बैठता है.

    Tags: Afghanistan Taliban conflict, Pakistan, Taliban News, Taliban rule in Afghanistan

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