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NEET खत्म, 12वीं की मेरिट पर छात्र बन सकेंगे डॉक्टर, तमिलनाडु विधानसभा में बिल पास

इस विधेयक में राष्ट्रपति से मेडिकल स्टूडेंट को स्थायी छूट देने की मांग की गई है. (फाइल फोटो)

इस विधेयक में राष्ट्रपति से मेडिकल स्टूडेंट को स्थायी छूट देने की मांग की गई है. (फाइल फोटो)

विधानसभा में सरकार के इस विधेयक का अन्नाद्रमुक ने समर्थन किया तो वहीं भाजपा ने इस विधेयक का विरोध करते हुए सदन से वाकआउट किया. इस विधेयक में सरकार ने राष्ट्रपति से प्रदेश के मेडिकल स्टूडेंट को नीट एग्जॉम में स्थायी तौर पर छूट देने की मांग की गई है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली: NEET परीक्षा से पहले सलेम के रहने वाले मेडिकल छात्र की आत्म हत्या का मामला सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में गूंजा. इस घटना के बाद राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए विधानसभा में NEET Exam को रद्द करने के लिए एक विधेयक पारित किया इस विधेयक में कहा गया कि एमबीबीएस/बीडीएस की प्रवेश परीक्षा के लिए 12 वीं कक्षा के अंकों को आधार बनाया जाता है.

    विधानसभा में सरकार के इस विधेयक का अन्नाद्रमुक ने समर्थन किया तो वहीं भाजपा ने इस विधेयक का विरोध करते हुए सदन से वाकआउट किया. इस विधेयक में सरकार ने राष्ट्रपति से प्रदेश के मेडिकल स्टूडेंट को नीट एग्जॉम में स्थायी तौर पर छूट देने की मांग की गई है.

    प्रमुख विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने सरकार को निशाना बनाया जबकि मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने राज्य में नीट परीक्षा आयोजित नहीं करवाने और मेडिकल पाठ्यक्रमों में कक्षा 12 में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश देने के लिए एक विधेयक पेश किया.

    विपक्ष ने सदन में उठाया मामला

    सदन की कार्यवाही शुरू होते ही, विपक्षी दल के नेता के. पलानीस्वामी ने अपने गृह जिले सलेम में रविवार को आत्महत्या करने वाले 19 वर्षीय छात्र धनुष का मुद्दा उठाया और सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि द्रमुक ने नीट को “रद्द” करने का वादा किया था लेकिन यह नहीं किया गया और बहुत से छात्र इसके लिए तैयार नहीं थे. पलानीस्वामी के कुछ बयानों को विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पवु ने रिकॉर्ड से हटा दिया.

    विपक्षी दल के विधायक काला बिल्ला लगा कर आए थे. उन्होंने पलानीस्वामी के नेतृत्व में सदन से बहिर्गमन किया. सलेम के पास एक गांव में रहने वाले धनुष ने रविवार को नीट परीक्षा में उपस्थित होने से कुछ घंटे पहले आत्महत्या कर ली थी क्योंकि उसे परीक्षा में असफल होने का डर था.

    पक्ष -विपक्ष के बीच शुरू हुआ आरोप प्रत्यारोप 

    इस घटना के बाद से अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है. राज्य सरकार का आरोप है कि इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है.

    मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में पहली बार नीट का आयोजन तब किया गया जब पलानीस्वामी मुख्यमंत्री थे और यह उस समय भी नहीं किया गया था जब जयललिता मुख्यमंत्री थीं. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में जिन छात्रों ने भी आत्महत्याएं की वह पलानीस्वामी के मुख्यमंत्री रहते हुई.

    गौरतलब है कि तमिनाडु में सलेम जिले के एक गांव के रहने वाले 19 वर्षीय एक किशोर ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में बैठने से चंद घंटे पहले रविवार को आत्महत्या कर ली थी. वह तीसरी बार इस परीक्षा में शामिल होने वाला था.

    सीएम बोले- अभ्यर्थी निराश था

    किशोर की मौत को लेकर आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया, अन्नाद्रमुक ने द्रमुक को जिम्मेदार ठहराया जबकि द्रमुक ने केंद्र पर निशाना साधा है. मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अभ्यर्थी धनुष ने आत्महत्या कर ली क्योंकि वह निराश था कि वह दो बार पहले परीक्षा में बैठने के बावजूद उसमें उत्तीर्ण नहीं हो सका.

    वहीं मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने जहां एक ओर किशोर की मौत के लिए द्रमुक शासन को जिम्मेदार ठहराया, वहीं स्टालिन ने इस मामले पर केंद्र पर ‘अड़ियल’ रवैया रखने का आरोप लगाया और तमिलनाडु को नीट के दायरे से ‘‘स्थायी रूप से छूट’’ देने के लिए 13 सितंबर को विधानसभा में एक विधेयक पारित करने का आश्वासन दिया.

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