तमिलनाडु की बसों में हिंदी में लिखा था निर्देश, डीएमके हुई आग बबूला

बसों पर हिंदी और अंग्रेजी में लगाए गए निर्देश पर विपक्षीय दलों के नेताओं ने इसे सत्तारूढ़ अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पर हिंदी थोपने की दिशा में एक कदम बताया है.

News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 9:20 AM IST
तमिलनाडु की बसों में हिंदी में लिखा था निर्देश, डीएमके हुई आग बबूला
तमिलनाडु की बसों में हिंदी में लिखा था, डीएमके हुई आग बबूला
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Updated: July 8, 2019, 9:20 AM IST
दक्षिण भारत में एक बार फिर भाषा पर विवाद बढ़ता दिख रहा है. तमिलनाडु की कई राज्य परिवहन की बसों के आपातकालीन गेट पर हिंदी में संदेश लिखे देखे गए हैं. बताया जाता है कि सर्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए तमिलनाडु स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (TNSTC) और चेन्नई के मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MTC)ने संयुक्त रूप से 500 बसों को बेड़े में शामिल किया है.

इन सभी बसों में हिंदी में यात्रियों के लिए निर्देश लगाए गए हैं. बसों पर हिंदी और अंग्रेजी में लगाए गए निर्देश पर विपक्षीय दलों के नेताओं ने इसे सत्तारूढ़ अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गठबंधन पर हिंदी थोपने की दिशा में एक कदम बताया है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)के थुथूकोडी सीट से सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि यह राज्य में तमिल के महत्व को कम करने का प्रयास है. इस मामले पर ट्वीट करते हुए कनिमोझी ने लिखा, 'पहले से ही केंद्र सरकार ने यहां हिंदी को लागू करने की कोशिश की है. अब, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक सरकार भी यही कोशिश कर रही है. डीएमके इसकी कड़ी निंदा करती है.

हिंदी पढ़ने वाले स्टिकर पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं. हालांकि, परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सरकारी बसों में हिंदी शब्दों वाले स्टिकर हटा दिए गए हैं. अब किसी भी सरकारी बस में हिंदी में निर्देश नहीं लिखे हैं. चूंकि नई बसों का निर्माण अन्य राज्यों में किया गया था, इसलिए उनके पास हिंदी स्टिकर थे. बसों के यहां आने के बाद इन स्टीकर को हटा लिया गया था क्योंकि हम भी समझते हैं कि इसमें आम जनता सफर करती है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही डीएमके ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में तीन-भाषा के प्रस्ताव के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया था, जिसने गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाना अनिवार्य कर दिया था. इसके तुरंत बाद, केंद्र ने मसौदे से भाषा की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था.

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First published: July 8, 2019, 9:20 AM IST
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