तमिलनाडु सरकार का ऐलान- अब 'आगम शास्त्र' की समझ रखने वाली महिलाओं को मिलेगा पुजारी बनने का मौका

कांचीपुरम में एकाम्बरेश्वर मंदिर (फ़ाइल फोटो)

बता दें कि महिलाओं को तमिलनाडु में पुजारी बनाने को लेकर लंबा विवाद रहा है. साल 2008 में मद्रास हाईकोर्ट ने एक आदेश में एक महिला पुजारी को उनके पिता की मृत्यु के बाद मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी थी

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    चेन्नई. तमिलनाडु के मंदिरों में अब महिलाओं को भी पुजारी (Women Priest) बनने का मौका मिलेगा. इस बात का ऐलान तमिलनाडु में हिंदू मंदिरों के प्रशासन के प्रभारी मंत्री शेखर बाबू ने किया. उन्होंने कहा कि सिर्फ उन महिलाओं को पुजारी के तौर पर नियुक्त किया जाएगा जिन्हें 'आगम शास्त्र' के बारे में जानकारी हो. बता दें कि आगम शास्त्र मंदिरों में पूजा करने की एक विधा है. मंत्री के इस ऐलान से तमिलनाडु के मंदिरों में महिलाओं के पुजारी बनने के लेकर बहस छिड़ गई है.

    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए शेखर बाबू ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार से किसी भी स्तर पर फिलहाल चर्चा नहीं हुई है. लेकिन वे इस पर विचार करेंगे और अगर आगम शास्त्र में ट्रेंड महिलाएं मंदिर के पुजारियों की भूमिका निभाना चाहती हैं तो वो सभी इंतजाम करेंगे. उन्होंने कहा, 'जब मीडिया वालों ने मुझसे पूछा कि क्या महिलाओं को मंदिर के पुजारियों की भूमिका निभाने की अनुमति दी जाएगी, तो मैंने कहा कि आगम शास्त्र में प्रशिक्षित लोगों को अनुमति दी जाएगी. हम निश्चित रूप से उन पर विचार करेंगे.'

    हर मुद्दे पर होगी चर्चा
    इस तरह के विचार को सामाजिक स्वीकृति के बारे में पूछे जाने पर, शेखऱ बाबू ने कहा कि वो उन सभी पहलुओं और अन्य व्यावहारिक चीज़ों पर भी विचार करेंगे. उनके मुताबिक इसमें मासिक धर्म के दौरान अनुष्ठानों से दूर रहने के लिए महिलाओं के लिए पांच दिन की छुट्टी भी शामिल है.

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    हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
    बता दें कि महिलाओं को तमिलनाडु में पुजारी बनाने को लेकर लंबा विवाद रहा है. साल 2008 में मद्रास हाईकोर्ट ने एक आदेश में एक महिला पुजारी को उनके पिता की मृत्यु के बाद मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी थी. महिला के पिता उसी मंदिर में पुजारी थे. हालांकि उनके पिता की 2006 में मृत्यु हो गई थी. लेकिन पिता के बीमार होने के कारण बेटी साल 2004 से ही उस मंदिर में पूजा कर रही थी. लेकिन उनकी मृत्यु के बाद गांववालों ने इस पर आपत्ति जताई थी.

    क्या कहा था हाईकोर्ट ने
    उच्च न्यायालय ने कहा था कि न तो कानून का न ही कोई प्रावधान उस मंदिर में पूजा करने वाली महिलाओं को प्रतिबंधित करती है. अदालत ने कहा था कि ये तर्क कि केवल एक पुरुष सदस्य ही पुजारी हो सकता है इसका कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है.

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