• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • NEET में इंग्लिश मीडियम, शहरी और CBSE छात्रों का दबदबा- तमिलनाडु पैनल की रिपोर्ट

NEET में इंग्लिश मीडियम, शहरी और CBSE छात्रों का दबदबा- तमिलनाडु पैनल की रिपोर्ट

नीट पर तमिलनाडु सरकार के पैनल ने तैयार की रिपोर्ट. (File pic)

नीट पर तमिलनाडु सरकार के पैनल ने तैयार की रिपोर्ट. (File pic)

NEET: राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नौ सदस्यीय पैनल ने पाया कि ग्रामीण छात्रों का जो औसतन अनुपात 61.45 फीसदी नीट से पहले था, वो नीट के बाद घटकर 50.81 फीसदी हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    चेन्‍नई. नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्‍ट (NEET) को लेकर तमिलनाडु सरकार की ओर से गठित कमेटी की रिपोर्ट चिंतित करने वाली है. इसके आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में नीट शुरू होने के बाद से तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मेडिकल कॉलेजों में ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर, तमिल-माध्यम के स्कूलों और राज्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के छात्रों का अनुपात काफी कम हो गया है.

    पैनल के नतीजों ने राज्य में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नीट को खत्म करने के तमिलनाडु सरकार के कदम को आधार बनाया है. मेडिकल प्रवेश के लिए नीट के प्रभाव का आकलन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नौ सदस्यीय पैनल ने पाया कि ग्रामीण छात्रों का जो औसतन अनुपात 61.45 फीसदी नीट से पहले था, वो नीट के बाद घटकर 50.81 फीसदी हो गया है.

    इसमें पाया गया है कि सरकारी स्कूलों के छात्र, जिनका नीट की शुरुआत से पहले भी कम प्रतिनिधित्व था, वे और पीछे रह गए. तमिलनाडु प्री-नीट में सरकारी स्कूल के छात्र एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के बैच का औसतन 1.12% हिस्सा रहे. नीट (अनारक्षित सीटें) के बाद यह आंकड़ा घटकर 0.16% रह गया. पिछले साल राज्य सरकार ने राज्य द्वारा संचालित स्कूली छात्रों के लिए 7.5% आरक्षण की शुरुआत की.

    समिति की रिपोर्ट के मुताबिक नीट के बाद से मेडिकल कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूली छात्रों की हिस्सेदारी 85.12% से बढ़कर 98.01% हो गई है. दूसरी ओर, तमिल-माध्यम के स्कूली छात्रों की संख्या अब केवल 1.99% है, जो चार साल पहले 14.88% थी.

    2.5 लाख रुपये से कम सालाना पारिवारिक आय वाले छात्रों का अनुपात 2016-17 में 47.42% से घटकर 2020-21 में 41.05% हो गया. वहीं जिनकी सालाना पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक थी, इस अवधि में उनका अनुपात 52.11% से बढ़कर 58.95% हो गया.

    पैनल के अनुसार सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के छात्रों को राज्य बोर्ड के छात्रों की तुलना में अधिक फायदा मिला है. नीट से पहले मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले 98.23 फीसदी छात्र राज्य बोर्ड के स्कूलों से थे और 1% से कम सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों से थे. अब सीबीएसई के छात्रों की संख्या 38.84% है, जबकि राज्य बोर्ड के स्कूलों के छात्रों की संख्या 59.41% है. पैनल का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि नीट मुख्य रूप से सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित है.

    सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार देश के किसी भी मेडिकल स्कूल में प्रवेश के लिए एकमात्र सिंगल-विंडो नीट परीक्षा है. यह शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से लागू हुआ है. नीट से पहले तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मुख्य रूप से बोर्ड के अंकों के आधार पर होता था. 2017 के बाद से राज्य ने अध्यादेश, मुकदमेबाजी और विरोध के माध्यम से परीक्षा से खुद को मुक्त करने की कोशिश की है. पिछले एक हफ्ते में ही राज्य में प्रवेश परीक्षा को लेकर कथित तौर पर दो आत्महत्याएं हुई हैं.

    तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को एक विधेयक पारित कर दिया गया जिसके कानून बनने के बाद राज्य में नीट परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में कक्षा 12 में प्राप्तांक के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज