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Worlds Lightest Satellite: तमिलनाडु के छात्र ने बनाई सबसे हल्की सैटेलाइट, मात्र 33 मिलीग्राम है वजन

सांकेतिक फोटो (pixabay)
सांकेतिक फोटो (pixabay)

Worlds Lightest Satellite: रियासदीन सम्सुद्दीन ने FEMTO वैराइटी की सैटेलाइट विजन सैट 1 और 2 तैयार की हैं. ये दोनों सैटेलाइट चौकोर हैं, जिसमें 11 सेंसर लगे हुए हैं. खास बात है कि ये सेंसर माइक्रोग्रैविटी पर शोध में मददगार साबित होंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 4:11 PM IST
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चेन्नई. वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष (Space) मामलों में भारत अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है. इस तरह का एक कारनामा तमिलनाडु के एक छात्र रियासदीन सम्सुद्दीन (Riyasdeen Samsudeen) ने किया है. रियास ने दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट तैयार किया है. खास बात है कि इस भारतीय युवा की खोज की तारीफ अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा (NASA) भी कर रही है. हालांकि, उनका यह अविष्कार अभी नासा के लॉन्च पर निर्भर करता है. ये सैटेलाइट प्रिंटेड पॉलीथेरीमाइड थर्मोप्लास्टिक से बनी है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगर यह मैटेरियल स्पेस में बचा रहा, तो गोल्ड और टाइटेनियम जैसे चीजों का उपयोग सैटेलाइट (Satellite) में कम हो जाएगा.

रियास फिलहाल त्रिची की शस्त्र यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं. वो मेकट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र हैं. गौरतलब है कि रियास की बनाई हुई सैटेलाइट का वजन 33 मिलीग्राम है. वहीं, इसका आकार महज 33 मिलीमीटर है. उन्होंने FEMTO वैराइटी की सैटेलाइट विजन सैट 1 और 2 तैयार की हैं. ये दोनों सैटेलाइट चौकोर हैं, जिसमें 11 सेंसर लगे हुए हैं. खास बात है कि ये सेंसर माइक्रोग्रैविटी पर शोध में मददगार साबित होंगे.

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इन सैटेलाइट को जिस मैटेरियल से तैयार किया है, वह एक तरह का रेजिन है. खास बात है कि इसका उपयोग सैटेलाइट के इस्तेमाल में आने वाले सोने और टाइटेनियम जैसी चीजों की जगह पर हो सकता है. सैटेलाइट में इन मैटेरियल का इस्तेमाल लंबे समय तक चलने और वजन में हल्का रहने के लिए किया जाता है.



पुणे में 13 साल की छात्राओं ने खोजे एस्ट्रॉयड
कुछ दिनों पहले 13 साल की दो स्कूली छत्राओं आर्या पुलाटे (Arya Pulate) और श्रेया वाघमारे (Shreya Waghmare) ने 6 शुरुआती एस्ट्रॉयड का पता लगाया है. दोनों छात्राओं ने कलाम सेंटर एस्ट्रॉयड सर्च कैंपेन में हिस्सा लिया था. इस अभियान का आयोजन कलाम सेंटर ने इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलेबोरेशन (IASC) के साथ मिलकर किया था. इस अभियान के तहत शामिल हुए लोगों को पृथ्वी के नजदीक चीजें या मेन बेल्ट एस्ट्रॉयड खोजने का मौका दिया था.
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