तमिलनाडु चुनाव: सत्ता के लिटमस टेस्ट में पलानीस्वामी पास होंगे या फेल?

तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी (PTI)

तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी (PTI)

Tamilnadu Assembly Elections 2021: AIADMK के लिए चुनौतियों की बात करें तो इसमें सत्ता विरोधी रुझान, BJP के साथ गठबंधन करके तमिल पहचान से समझौता करने के आरोप, जयललिता के निधन के बाद पहले की तरह पार्टी में अनुशासन और एकजुटता की कमी जैसे पहलू शामिल हैं. ऐसे में बेशक पलानीस्वामी के लिए ये चुनाव लिटमस टेस्ट है. ये देखना दिलचस्प होगा कि पलानीस्वामी इसमें पास होते हैं या फिर फेल.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 7:29 PM IST
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Tamilnadu Assembly Elections 2021: तमिलनाडु में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में काफी दिलचस्पी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) से मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी (Edappadi K Palaniswami) के व्यक्तित्व पर केंद्रित है. क्या चुनाव में उनकी सत्ता में वृद्धि होगी और क्या उनके पास अपनी पार्टी का नेतृत्व करने की क्षमता है? इन सवालों का जवाब इस चुनाव में खोजा जाएगा.

राज्य में AIADMK और भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों की असली परीक्षा होनी है. चुनाव में दोनों पार्टियों का बहुत कुछ दांव पर लगा है. एआईएडीएमके ने संसदीय चुनावों में खराब प्रदर्शन किया, पार्टी को सिर्फ 39 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी. हालांकि, तब भी पलानीस्वामी का दावा था किया कि जनता उनकी सरकार के साथ है, क्योंकि AIADMK ने लोकसभा चुनावों के साथ-साथ विधानसभा उपचुनावों में काफी बेहतर प्रदर्शन किया था.

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पार्टी ने 22 विधानसभा सीटों में हुए उपचुनाव में 9 पर जीत हासिल की. सरकार के अल्पमत में आने के बाद 9 का ये आंकड़ा सत्ता में बने रहने के लिए आवश्यक संख्या का अनुमान था, क्योंकि पार्टी ने अपने 18 विधायकों को वीके शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरण के समर्थन के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की थी. इन विधायकों को बागी के तौर पर देखा गया था.

इसके बाद पलानीस्वामी पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते थे, क्योंकि सरकार बिना किसी अड़चन के शेष कार्यकाल पूरा करने के लिए तैयार थी. पलानीस्वामी अब दावा करते हैं कि वह बाधाओं के बावजूद एक स्थिर सरकार देने में सफल रहे थे और यह अपने आप में एक उपलब्धि थी. मगर असलियत कुछ और ही है. पलानीस्वामी यह भी दावा करते हैं कि वह एक किसान हैं और वो 12,300 करोड़ रुपये के कृषि ऋण की माफी का उल्लेख करते हैं.

पिछले कुछ हफ्तों में पलानीस्वामी ने कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करके अपनी सरकार की छवि को चमकाने की कोशिश की है. इनमें से ज्यादातर मुफ्त योजनाएं हैं. जैसे छह मुफ्त गैस सिलेंडर, गृहणियों को 1,500 रुपये का मासिक भुगतान, सहकारी समितियों द्वारा लिखित ऋण और इसी तरह की कुछ योजनाएं हैं. हालांकि, मुख्य विपक्षी डीएमके भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में कई तरह की पेशकश लेकर आई है. यह मतदाताओं के लिए किसी भी तरह से मुफ्त की बौछार है.

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जयललिता के निधन के बाद पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री का पद कैसे संभाला, इस पर भी चर्चा हो रही है. ऐसे में चुनाव में पलानीस्वामी के काम को भी देखा और परखा जाएगा. पलानीस्वामी ने विनम्रता के साथ खुद की किसान वाली छवि दिखाते हुए राजनीति की शुरुआत की थी. वहीं, डीएमके चीफ स्टालिन ने पलानीस्वामी को लेकर बड़े आरोप लगाए थे.

स्टालिन ने कहा था कि कैसे 2017 की मीटिंग में पलानीस्वामी शशिकला के आगे गिड़गिड़ाए थे. क्योंकि अघोषित संपत्ति के केस में सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण शशिकला खुद सीएम का पद नहीं ले सकती थीं. फिर कुछ दिनों बाद ही उन्हें बेंगलुरु जेल में जाना पड़ा. जेल जाने से पहले शशिकला ने मुख्यमंत्री पद के लिए पलानीस्वामी का नाम आगे बढ़ा दिया.


आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पलानीस्वामी ने डीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि स्टालिन के पिता एम करुणानिधि 1969 में 'शॉर्टकट्स ’के जरिए सीएन अन्नादुरई की मौत के बाद मुख्यमंत्री बने थे. इस पर स्टालिन, अपने बचाव में कहते हैं कि वह DMK में काम करने के लगभग 50 साल बाद पार्टी विधायक चुने गए. फिर महापौर, मंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी कोषाध्यक्ष, कार्यवाहक अध्यक्ष और आखिरकार पार्टी अध्यक्ष बने. ये सब उन्होंने अपने बलबूते हासिल किया.

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AIADMK के लिए चुनौतियों की बात करें तो इसमें सत्ता विरोधी रुझान, BJP के साथ गठबंधन करके तमिल पहचान से समझौता करने के आरोप, जयललिता के निधन के बाद पहले की तरह पार्टी में अनुशासन और एकजुटता की कमी जैसे पहलू शामिल हैं. ऐसे में बेशक पलानीस्वामी के लिए ये चुनाव लिटमस टेस्ट है. ये देखना दिलचस्प होगा कि पलानीस्वामी इसमें पास होते हैं या फिर फेल.

(लेखक आर रंगराज वेटरन जर्नलिस्ट और इतिहासकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं)
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