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लगातार दूसरी बार मौत को चकमा! जानिए IAF के जांबाज ऑफिसर वरुण सिंह की कहानी

लगातार दूसरी बार मौत को चकमा! जानिए IAF के जांबाज ऑफिसर वरुण सिंह की कहानी

हेलीकॉप्टर क्रैश: देवरिया के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही बचे जीवित, सीडीएस बिपिन रावत के साथ थे सवार.

हेलीकॉप्टर क्रैश: देवरिया के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही बचे जीवित, सीडीएस बिपिन रावत के साथ थे सवार.

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह (Group Captain Varun Singh) को वीरता पदक तब मिला जब वो भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के तेजस लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ विंग कमांडर थे. वह विमान के 'फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और प्रेशराइजेसन सिस्टम' की जांच करने के लिए पिछले साल 20 अक्टूबर को नए शामिल तेजस जेट की ट्रायल फ्लाइट पर थे. हालांकि ऊंचाई पर उड़ते समय फाइटर का प्रेशराइजेशन सिस्टम फेल हो गया.

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    नई दिल्ली. तमिलनाडु में किन्नूर के पास हुए हेलिकॉप्टर हादसे (Tamil Nadu Helicopter Crash) में इकलौते बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह (Group Captain Varun Singh) का फिलहाल सेना के अस्पताल में इलाज चल रहा है. गुरुवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी संसद में ग्रुप कैप्टन के स्वास्थ्य की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वरुण सिंह फिलहाल लाइफ सपोर्ट पर हैं और उनको बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है. ऐसा दूसरी बार है जब वरुण सिंह ने मौत को मात दे दी. पिछले साल अक्टूबर में स्वदेशी निर्मित तेजस लड़ाकू विमान को उड़ाते हुए वरुण सिंह बाल-बाल बचे थे. देश के तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार- शौर्य चक्र से सम्मानित, वरुण सिंह उसी हेलिकॉप्टर में सवार थे जो सीडीएस बिपिन रावत (Bipin Rawat), उनकी पत्नी मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) समेत 14 लोगों को ले जा रहा था. इस जहाज में सवार 13 लोगों का निधन हो गया है.

    वरुण सिंह को वीरता पदक तब मिला जब वो भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के तेजस लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ विंग कमांडर थे. वह विमान के ‘फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और प्रेशराइजेसन सिस्टम’ की जांच करने के लिए पिछले साल 20 अक्टूबर को नए शामिल तेजस जेट की ट्रायल फ्लाइट पर थे. हालांकि ऊंचाई पर उड़ते समय फाइटर का प्रेशराइजेशन सिस्टम फेल हो गया.

    ना विमान गिरने दिया, ना खुद हुए एग्जिट
    ग्रुप कैप्टन को जैसे ही दिक्कत पता चली तो उन्होंने लैंडिंग के लिए कम ऊंचाई पर उतरने का फैसला किया लेकिन उनकी दिक्कत यहीं खत्म नहीं हुई. इस दौरान उड़ान नियंत्रण प्रणाली भी फेल हो गई जिससे विमान पर उनका नियंत्रण नहीं रहा. विमान तेजी से नीचे गिरता रहा और इस दौरान जहाज में झटके भी लग रहे थे. इन सब खामियों के बीच ग्रुप कैप्टन ने विमान पर नियंत्रण हासिल कर लिया.

    ऐसा दूसरी बार भी हुआ, लेकिन उन्होंने विमान को छोड़ने और खुद एग्जिट होने बजाय इसे नियंत्रण में लाने और इसे सुरक्षित रूप से उतारने का फैसला किया. उनके शौर्य चक्र पत्र में कहा गया है, ‘इसके जरिए विमान में खामियों का सटीक विश्लेषण करने में मदद मिली.’

    Tags: Bipin Rawat, Indian army

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