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तमिलनाडुः LGBTQIA का पुलिस उत्पीड़न रोकने के लिए कानून में बदलाव, बना देश का पहला राज्य

तमिलनाडुः LGBTQIA का पुलिस उत्पीड़न रोकने के लिए कानून में बदलाव, बना देश का पहला राज्य

तमिलनाडु अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के आचरण नियमों में संशोधन बुधवार को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया गया. News 18 Creative

तमिलनाडु अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के आचरण नियमों में संशोधन बुधवार को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया गया. News 18 Creative

LGBTQIA News: राज्य सरकार की ओर से जारी इस आदेश पर अतिरिक्त मुख्य सचिव एसके प्रभाकर ने हस्ताक्षर किया है, जिसमें कहा गया है कि 'कोई भी पुलिस अधिकारी LGBTQIA समुदाय (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्स और एसेक्सुअल) के किसी भी प्रकार के उत्पीड़न में शामिल नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही इस कम्युनिटी के हित में काम कर रहे किसी भी व्यक्ति के उत्पीड़न में भी शामिल नहीं होना चाहिए.'

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    चेन्नई. तमिलनाडु की एमके स्टालिन (MK Stalin Govt) सरकार ने राज्य पुलिस बल को नियंत्रित करने वाले कानून में संशोधन किया है और LGBTQIA (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्स और एसेक्सुअल) लोगों के पुलिस द्वारा उत्पीड़न पर प्रतिबंध लगाने वाला एक प्रावधान जोड़ा है. इस तरह तमिलनाडु के एक विशिष्ट कानून बनाने वाला भारत का पहला राज्य बनने की संभावना है, जहां हाशिए के समाज को पुलिस हिंसा से बचाने का कानूनी प्रावधान मौजूद हो. तमिलनाडु अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के आचरण नियमों में संशोधन बुधवार को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया गया. दरअसल कुछ महीने पहले मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन से LGBTQIA मुद्दों के बारे में पुलिस बल को संवेदनशील बनाने के लिए कहा था.

    राज्य सरकार की ओर से जारी इस आदेश पर अतिरिक्त मुख्य सचिव एसके प्रभाकर ने हस्ताक्षर किया है, जिसमें कहा गया है कि ‘कोई भी पुलिस अधिकारी LGBTQIA समुदाय (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्स और एसेक्सुअल) के किसी भी प्रकार के उत्पीड़न में शामिल नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही इस कम्युनिटी के हित में काम कर रहे किसी भी व्यक्ति के उत्पीड़न में भी शामिल नहीं होना चाहिए.’

    पिछले साल सितंबर महीने में परिवार द्वारा उत्पीड़न की शिकार होने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली दो महिला याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने LGBTQIA समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न और पूर्वाग्रह को खत्म करने के लिए कई आदेश पारित किए थे. मद्रास हाईकोर्ट के जज आनंद वेंकटेश ने अपने आदेश में प्रशासन से समान लिंग वाले जोड़ों का पुलिसिया उत्पीड़न रोकने को कहा था और यह भी कि पुलिस का व्यवहार असंवेदनशीलता और जागरूकता के अभाव के चलते ऐसा है.

    मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया था. दलित और ट्रांसजेंडर्स के अधिकारों के लिए काम करने वाले ग्रेस बानू ने कहा था, ‘हमारा मानना है कि कोर्ट का फैसला बहुत ही महत्वपूर्ण है और यह LGBTQIA समुदाय के खिलाफ पुलिस हिंसा को कम करने में मददगार साबित होगा. हमने उत्पीड़न और बर्बरता के चलते अपने बहुत सारे ट्रांस भाइयों और बहनों को खोया है. हमें हर दिन उत्पीड़न का सामना करना होता है और हर दिन पुलिस के अत्याचारों को हम झेलते हैं.’ उन्होंने कहा कि अगर सरकार मजबूती से कानून को लागू करती है तो इस उत्पीड़न और हिंसा के सिलसिले को खत्म किया जा सकता है.’

    Tags: MK Stalin, Tamilnadu

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