कोलकाता की वह लड़की जो बनना चाहती थी भारत की जिहादी वंडर लेडी

बांग्लादेश में युद्ध-अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सईदी को मौत की सजा सुनाए के आठ साल बाद उसकी सह-उपदेशक तानिया परवीन चर्चा में आई.
बांग्लादेश में युद्ध-अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सईदी को मौत की सजा सुनाए के आठ साल बाद उसकी सह-उपदेशक तानिया परवीन चर्चा में आई.

Tania Parveen: आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में कई महिला जिदादियों ने बड़ी भूमिका अदा की है. चाहे उसमें वह किसी की पत्नी हो या फिर बहन. वे सभी खुद को एक फाइटर कहलाने से पहले जिहादी मानती हैं. स्कोलर फरहात हक ने बताया लश्कर का असली राजनीतिक एजेंडा 'बंदूक और पूर्दाह' है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 4:58 PM IST
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परवीन स्वामी

नई दिल्ली. आतंकी संगठन लश्कर-ए- तैयबा (Lashkar-e-Taiba) की गुर्गी तानिया परवीन (Tania Parveen) भारत में जिहादियों की वंडर वुमन बनने का सपना देखती थी. कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (Special Task Force) ने इसी साल 18 मार्च को उत्तर 24 परगना जिले के बादुरिया से आतंकी परवीन को गिरफ्तार किया था. बाद में परवीन को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Ageny) ने हिरासत में ले कड़ी पूछताछ की थी. पूछताछ में परवीन के पास पाकिस्तान के व्हाट्सएप नंबर के उपयोग का खुलासा हुआ था. साथ ही वह पाकिस्तान के कई आंतकी संगठनों के वॉट्सएप ग्रुप में भी शामिल थी. आइए जानते हैं आखिर तानिया परवीन ने कैसे शुरू किया आंतकी बनने का सफर.

पाकिस्तानी सेना के बांग्लादेशियों पर अत्याचार
बांग्लादेश में बलेश्वरी नदी के किनारे एक गांव बसा हुआ है जहां सिर्फ मछली, चावल, मानव के सड़े हुए शरीर की दुर्गंध ही महसूस की जाती रही है. साल 1971 में गर्मियों के मौसम में भारतीय सैनिकों ने यहां सीमा पार गश्त लगाना शुरू कर दिया था. वहीं, बांग्लादेशी फोर्स मुक्तिवाहिनी पहले ही पिरोजपुर के दक्षिण-पश्चिमी जिले में पाकिस्तानी सेना की चौकियों को तबाह कर चुकी थी. पाकिस्तानी सेना और उनके मिलिशिया रजाकारों ने गांव में कई खाने-पीने के स्टोर पर लूटपाट मचाई, कई घरों में आग लगाई, संदिग्ध मुखबिरों के साथ घोर अत्याचार किया गया. गौंरग चंद्रा साहा एक दुकानदार के रूप में वहां गश्त लगा रहे थे. उन्होंने देखा इस्लामी नेता और दस मिलिशिया रजाकारों समूह का अध्यक्ष दिलावर हुसैन सईदी ने परेरहेट बंदोर के एक छोटे गांव में कूच किया. वहीं, दिलावर की तीनों बहनें मोहम्या, अन्नो रानी और कोमल रानी को अगवाकर पिरोजपुर में पाकिस्तानी कैंप में लाया गया, जहां पाकिस्तानी सैनिकों ने छोड़ने से पहले तीनों के साथ तीन दिन तक लगातार बलात्कार किया.
सईदी के भड़काऊ भाषणों से प्रभावित हुई थी परवीन


बांग्लादेश में युद्ध-अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सईदी को मौत की सजा सुनाए के आठ साल बाद उसकी सह-उपदेशक तानिया परवीन चर्चा में आई. प्रवीन कोलकाता में 70 लोगों के एक समूह में थी जिन्होंने उस पर ऑनलाइन गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया था. एनआईए (NIA) का आरोप है कि प्रवीण साल 2018 से मौलवियों की भड़काऊ भाषणों को सुन उनकी रिकॉर्डिंग करती थी और इसी से प्रभावित होकर उसका रुझान आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की ओर हुआ था. परवीन ने सईदी के उस भाषण को भी सुना जिसमें उसने पूछा था 'हिंदू भाईयों के हमारा देश छोड़ने पर हमे क्यों उदास होना चाहिए?, क्या हम अपने शरीर से बुरी चीजों को निकालने के बाद शोक करते हैं? परवीन की कहानी को बनाने में सईदी के इस भड़काऊ भाषण का बहुत योगदान रहा है.

परवीन का फैमिली बैकग्राउंड
परवीन का जन्म 1999 में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 के एक गांव मलायापुर में नुरेनहर खातुन और अलामिन मोंडल के घर में हुआ था. परवीन के परिजनों ने न्यूज 18 को बताया कि वह मुश्किलों में पली-बढ़ी थी, उसकी मां एक मान्याता प्राप्त सामाजिक हेल्थ कार्यकर्ता के रूप में काम करती है, जो सरकार के टीकाकरण और जन्म-नियंत्रण परियोजनाओं से जुड़ी हुई है. उसके पिता एक किसान थे लेकिन अब बेरोजगार हैं. सूत्र के मुताबिक, नुरनेहर खातुन अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देना चाहती थी, परवीन की छोटी बहन ने लंदन मिशनरी सोसाइटी स्कूल से स्नातक में 90 फीसदी अंक प्राप्त किए थे. वहीं, साल 2019 में परवीन कोलकाता में मौलाना आजाद कॉलेज से अरेबिक में स्नातक की डिग्री करने चली गई. बंगाली, अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और अरबी के अलावा प्रवीन ने कश्मीरी और बहासा इंडोनेशिया का भी थोड़ा ज्ञान लिया.

इन सोशल मीडिया पोस्ट से भड़के दंगे
परवीन कॉलेज शुरू करने की तैयारी कर ही रही थी कि उस एक घटना ने उसकी पूरी जिंदगी को बदलकर रख दिया. साल 2017 में परवीन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पैगंबर मोहम्मद की तस्वीरें पोस्ट की, जिससे उत्तर 24 परगना में व्यापक तनाव फैल गया. इसके बाद स्थानीय मुसलमानों ने हिंदू घरों, व्यवसायों और उनके धार्मिक स्थलों पर हमला किया. हिंदू समुदाय ने इसका जवाब अलग तरीके से दिया. उस वक्त दंगे में एक की मौत और 23 स्थानीय लोग घायल हुए थे. इस घटना से पूरे समाज में सांप्रदायिक सौहार्द में दरारें आने लगी थीं. इधर प्रवीण के मन ने जिहादी विचारधारा घर कई गई थी. एनआईए ने बताया कि साल 2018 के अंत में परवीन को उनके चचेरे भाई हबीबुल्लाह ने सईदी के धर्मोपदेश से परिचित कराया था. परवीन का चचेरा भाई स्थानीय मस्जिद में एक मौलवी था.

भारत के खिलाफ इस संदेश ने उगला जहर
सईदी के संदेशों को फैलाने वाली रिकॉर्डिंग एनआईए के हाथ लगी है. इसके आधार पर उसे आंतकी सगंठनों के व्हाट्सएप ग्रुप वॉइस ऑफ इस्लाम, इस्लामिक उम्महा और ह्यूमन ब्रदरहुड में शामिल किया गया. इन सभी ग्रुपों में एक ही तरह के संदेश भेजे जाते थे. उनमें से एक संदेश था 'भारत दुनिया में उन देशों का हिस्सा है जो मुस्लिम समुदाय का नरसंहार करता है और इसका जवाब सिर्फ जिहाद है.' जांच में पाया गया कि कश्मीर के अल्ताफ अहमद से उसके रिश्ते जुड़ गए थे. इधर ग्रुप में परवीन को बिलाल दुर्रानी नामक शख्स से संपर्क में रहने को कहा गया. बिलाल दुर्रानी पाकिस्तान में लश्कर-ये-तैयबा का एक कार्यकर्ता था. एनआईए ने बताया कि दुर्रानी ने ही परवीन को ग्रुप में शामिल होने के लिए पाकिस्तान का वर्चुअल नंबर दिलाया था, क्योंकि उस वक्त देश में सभी कॉन्टेक्ट नंबरों की निगरानी की जा रही थी.

लश्कर-ए-तैयबा में रही महिला जिहाहियों की बड़ी भूमिका
बता दें कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में कई महिला जिदादियों ने बड़ी भूमिका अदा की है. चाहे उसमें वह किसी की पत्नी हो या फिर बहन. वे सभी खुद को एक फाइटर कहलाने से पहले जिहादी मानती हैं. स्कोलर फरहात हक ने बताया लश्कर का असली राजनीतिक एजेंडा 'बंदूक और पूर्दाह' है. बंदूक उनके राजनीतिक मिशन और पुर्दाह ने केंद्रीय उद्देश्य का प्रतीक है. फरहात हक ने आगे बताया कि जिहादी महिलाएं खुद को आतंकी संगठन लश्कर के तैयबा की चारदीवारी मानती हैं. उन्होंने यहां लश्कर ए तैयबा की जिहादी महिला सदस्य इशरत जहां भी का उदाहरण दिया.

6 अलग-अलग नाम से फैलाया आतंकी जाल
ठीक इसी तरह जिहादी संगठनों ने परवीन को तैयार किया था. वहीं, साल 2019 के अंत में परवीन ने अबु जिंदाल के उपनाम का इस्तेमाल कर लश्कर के पांच व्हाट्सएप ग्रुप्स को चलाया. जांच एजेंसी ने आगे बताया कि वह पाकिस्तान में स्थित लश्कर के कमांडरों से नियमित रुप से संपर्क में रहती थी. उसके नये कॉन्टेक्ट में आईएसआई से भी जुड़े होने के तार मिले थे. खुफिया अधिकारी का उपनाम 'राणा' का इस्तेमाल कर ग्रुप में लोगों को शामिल करने और उन्हें जिहादी बनाने काम किया. परवीन सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी भी आतंकी संगठनों को भेजा करती थी. जांच में पता चला कि वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए नए युवाओं को जोड़ने से लेकर अपने जाल में सेना व सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को फंसाकर हनीट्रैप के जरिए अहम जानकारी जुटाकर आतंकी संगठन को भेजने का काम करती थी. इस काम के लिए खुफिया अधिकारी ने परवीन को मोटी रकम दी थी. एनआईए ने मार्च 2019 में देशभर में जिहादी गतिविधियों से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया था. इधर परवीन, मुस्तफा, हमजा ताहिर, मुताजिब, अरब्रार फहद, इब्नू अदम और अबु थुराब नाम से अकाउंट चला रही थी.
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