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तरुण तेजपाल केस: बॉम्बे हाई कोर्ट में 27 अक्टूबर को होगी सुनवाई, गोवा सरकार ने की है अपील

पत्रकार तरुण तेजपाल कोर्ट के बाहर (फ़ाइल फोटो)

पत्रकार तरुण तेजपाल कोर्ट के बाहर (फ़ाइल फोटो)

Tarun Tejpal Cace: यह कथित घटना सात नवंबर 2013 को हुई थी. यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद तेजपाल ने तहलका के प्रधान संपादक के पद से इस्तीफा दे दिया था.

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    पणजी. बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने सोमवार को कहा कि वह 2013 के दुष्कर्म मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal Cace) को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर 27 अक्टूबर को डिजिटल माध्यम से सुनवाई करेगी. न्यायमूर्ति एम एस सोनक और न्यायमूर्ति एम एस जावलकर की पीठ ने गोवा के महाधिवक्ता देवीदास पंगम और तेजपाल का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील द्वारा मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख देने का अनुरोध किए जाने पर सुनवाई 27 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी.

    न्यायमूर्ति सोनक ने कहा कि अदालत इस मामले में डिजिटल सुनवाई की व्यवस्था सुनवाई की अगली तारीख तक कर लेगी. मामले की सुनवाई डिजिटल माध्यम से होगी क्योंकि गोवा सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दिल्ली से अदालती कार्यवाही में हिस्सा लेंगे. महाधिवक्ता पंगम ने कहा कि सोमवार को सुनवाई अगली तारीख (मामले में सुनवाई की) तय करने के लिए की गई थी.

    ये भी पढ़ें:- बच्चे ने देश भर में स्कूल खोलने की रखी मांग, सुप्रीम कोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, याचिका भी रद्द

    इससे पहले उच्च न्यायालय ने 31 अगस्त को बलात्कार के मामले में तेजपाल को बरी करने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर सुनवाई 20 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी थी क्योंकि मामले में फिजिकल मौजूदगी के साथ ही डिजिटल सुनवाई के लिए अनुरोध मुख्य न्यायाधीश के समक्ष लंबित था. यह कथित घटना सात नवंबर 2013 को हुई थी. यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद तेजपाल ने तहलका के प्रधान संपादक के पद से इस्तीफा दे दिया था.

    तेजपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 342 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 354 (गरिमा भंग करने की मंशा से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354-ए (यौन उत्पीड़न), धारा 376 की उपधारा दो (फ) (पद का दुरुपयोग कर अधीनस्थ महिला से बलात्कार) और 376 (2) (क) (नियंत्रण कर सकने की स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) के तहत मुकदमा चला. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था.

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