गर्लफ्रेंड का इनामी कातिल 8 साल तक पुलिस को ऐसे देता रहा धोखा, और जब मिला तो...

राजू के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाने का कोई फायदा नहीं हुआ. राजू पुलिस के हाईटेक तरीके को भी गच्चा दे रहा था. 8 साल बाद जब पुलिस राजू तक पहुंची भी तो उसी की मर्जी से, लेकिन.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 3:28 PM IST
गर्लफ्रेंड का इनामी कातिल 8 साल तक पुलिस को ऐसे देता रहा धोखा, और जब मिला तो...
सांकेतिक फोटो.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 3:28 PM IST
गर्लफ्रेंड का मर्डर करने के बाद राजू गहलौत 8 साल तक दिल्ली पुलिस के हाथ नहीं लगा. पुलिस ने राजू पर 2 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था. राजू की तलाश में पुलिस नेपाल, गोवा, मुम्बई, बेंग्लूर, सोनीपत तक तलाश कर आई थी. राजू के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाने का कोई फायदा नहीं हुआ. राजू पुलिस के हाईटेक तरीके को भी गच्चा दे रहा था. 8 साल बाद जब पुलिस राजू तक पहुंची भी तो उसी की मर्जी से, लेकिन राजू की मौत के 5 घंटे बाद.

2011 में किया था गर्लफ्रेंड का कत्ल

राजू उत्तम नगर के गांव नवादा का रहने वाला था. वो एक कॉल सेंटर में काम करता था. उसकी गर्लफ्रेंड नीतू सोलंकी एक मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी करती थी. दोनों एक ही गांव और जाति के थे. जिसके चलते राजू ये बात अच्छी तरह से जानता था कि दोनों कभी भी एक-दूसरे के नहीं हो सकते. दोनों ने अलग-अलग बहाने बनाकर दिल्ली छोड़ दी और मुम्बई में जाकर रहने लगे.

लेकिन कुछ दिन बाद ही दोबारा से दिल्ली आ गए और हरिनगर आश्रम में लिव इन में रहने लगे. एक दिन राजू ने नीतू का मर्डर कर दिया और उसकी लाश को एक बैग में रखकर नई दिल्ली स्टेशन के पास फेंक दिया. 8 दिन बाद पुलिस को नीतू की लाश मिली.

पुलिस को ऐसे पता चला कातिल राजू है

नीतू का मर्डर करने के बाद राजू ने अपने चचेरे भाई को फोन किया. राजू के चाचा दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी हैं. राजू ने अपने भाई से नीतू की लाश को ठिकाने लगाने के लिए कार मांगी. राजू ने अपने भाई को मर्डर वाली सारी बात सच-सच बता दी थी.

पुलिस से बचने को राजू ने उठाया था ये बड़ा कदम
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मर्डर केस में राजू का नाम आते ही पुलिस उसके घर नवादा पहुंच गई. लेकिन राजू वहां नहीं मिला. पुलिस के घर तक पहुंचने की बात राजू को मिल चुकी थी. उसके बाद से राजू ने कभी घर का रुख नहीं किया. न ही किसी भी घर वाले को कभी कोई फोन किया.

पुलिस से बचने के लिए राजू ने इस शहर को बनाया ठिकाना

राजू की तलाश में दिल्ली पुलिस नेपाल, साउथ इंडिया और मुम्बई-गोवा तक दाविश दे चुकी थी. लेकिन उसे राजू तो दूर उसके बारे में कोई जानकारी तक नहीं मिली. जबकि राजू रोहित दाहिया बनकर गुरुग्राम को अपना ठिकाना बना चुका था. यहां उसने एक कॉल सेंटर में नौकरी भी शुरु कर दी. पिता का नाम भी बदल लिया. जबकि थोड़ी दूरी पर ही मौजूद दिल्ली पुलिस सरगर्मी के साथ राजू की तलाश में लगी हुई थी.

पुलिस से बचने को ये कदम भी उठाय राजू ने

-फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए.

-शराब के नशे में भेद न खुल जाए इसलिए अकेले शराब पीता था.

-कंपनी और साथ काम करने वालों की किसी भी पार्टी में फोटो नहीं खिचवाता था.

-सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी.

मौत के 5 घंटे बाद राजू तक पहुंची पुलिस

ज्यादा शराब पीने की वजह से राजू के कई अर्गन ने काम करना बंद कर दिया था. कॉल सेंटर में साथ काम करने वाले दोस्तों ने राजू को अस्पताल में भर्ती करा दिया था. उसकी हालत ज्यादा खराब हो चुकी थी. बचने की कोई उम्मीद न देख 8 साल बाद राजू अपने घर फोन कर इसकी सूचना दे दी. घर वाले अस्पताल पहुंच गए. किसी तरह से पुलिस को भी खबर लग गई. लेकिन 25 जून को जब दिल्ली पुलिस राजू को हिरासत में लेने पहुंची तो उससे 5 घंटे पहले ही राजू उर्फ रोहित दाहिया की मौत हो चुकी थी.

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First published: July 8, 2019, 2:17 PM IST
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