Home /News /nation /

टाटा समूह में ट्रेनी से उसी के मुखिया तक, ‘पद्म-भूषण’ एन चंद्रशेखरन का सफर हर लिहाज से प्रेरक है

टाटा समूह में ट्रेनी से उसी के मुखिया तक, ‘पद्म-भूषण’ एन चंद्रशेखरन का सफर हर लिहाज से प्रेरक है

पद्मभूषण एन चंद्रशेखरन

पद्मभूषण एन चंद्रशेखरन

Tata son's chairman Padma Bhushan N Chandrasekharan's Inspiring Story : चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा समूह की कंपनी- टीसीएस (Tata Consultancy Services) में काम करना शुरू कर दिया. बतौर ट्रेनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर. लेकिन कंपनी के साथ उनका यह सफर ऐसा नहीं था, जो आज शुरू हुआ और कल खत्म.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्ली. टाटा समूह के मुखिया एन चंद्रशेखरन (N. Chandrashekharan, Chiarman, Tata Group). उन्हें 73वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान (भारत रत्न और पद्म विभूषण के बाद) देने की घोषणा हुई है. यह सिर्फ उनके और उनकी कंपनी के लिए गर्व का विषय नहीं है. बल्कि देश के लिए भी फख्र की बात है. क्योंकि एन चंद्रशेखरन (N. Chandrashekharan) उन चुनिंदा लोगों में शुमार होते हैं, जिन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है, जो तमाम लोगों के लिए हर लिहाज से प्रेरक भी है. जानते हैं इस बारे में…

सामान्य परिवार में जन्म और वैसी ही पढ़ाई-लिखाई 

नटराजन यानी एन चंद्रशेखरन (N. Chandrashekharan) का जन्म 1963 में हुआ. तमिलनाडु के नमक्कल कस्बे का एक गांव है, मोहनुर. वहीं, एक साधारण किसान परिवार में. शुरुआती शिक्षा भी उसी गांव के सरकारी स्कूल में हुई. फिर कोयंबटूर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंस में स्नातक तिरुचिरापल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर डिग्री. ये साल था 1986 का. इसके महज एक साल बाद ही चंद्रशेखरन ने 1987 में टीसीएस (Tata Consultancy Services) में काम करना शुरू कर दिया. बतौर ट्रेनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर. लेकिन कंपनी के साथ उनका यह सफर ऐसा नहीं था, जो आज शुरू हुआ और कल खत्म.

टीसीएस के साथ 30 साल का सफर और लगातार तरक्की

एन चंद्रशेखरन टीसीएस के साथ 30 साल तक रहे. इस दौरान वह कंपनी के एक साधारण कर्मचारी से तरक्की करते हुए उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) के पद तक पहुंचे. कंपनी की अगुवाई करते हुए उन्होंने खुद को काबिल बिजनेस लीडर साबित किया. कंपनी का कारोबार बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने पारंपरिक लीक से हटकर प्रबंधन में कई नए प्रयोग किए. ऐसे ही, एक प्रयोग के तहत उन्होंने टीसीएस (TCS) को 23 कारोबारी इकाईयों में बांट दिया. नतीजे में कंपनी की कार्यप्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन आया और TCS देश की सूचना-प्रौद्योगिकी (Information Technology) क्षेत्र की कंपनियों में पहले पायदान पर पहुंच गई. इससे पूर्व देश की एक और दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस (Infosys) को यह दर्जा हासिल था.

आईटी इंडस्ट्री के लिए विजन-2020 इन्हीं नेतृत्व में तैयार हुआ

नटराजन चंद्रशेखरन ‘तकनीकी उद्यमी’ (Techno Entrepreneur) हैं. उनकी विशेषज्ञता का परिणाम है कि जिस टीसीएस (TCS) की आमदनी 2010 में 30,000 करोड़ रुपए थी, आज बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. उनके नेतृत्व में कंपनी का मुनाफा तीन गुना बढ़ा है. वर्तमान में TCS को देश के सबसे मूल्यवान कंपनी का दर्जा प्राप्त है जिसका बाज़ार पूंजीकरण (Market Capitalisation) लगभग 4.2 लाख करोड़ रुपए है. वर्ष 2012 में चंद्रशेखरन के नेतृत्व ही में सूचना प्रोद्योगिकी इंडस्ट्री (IT Industry) के लिए ‘विजन-2020’ तैयार हुआ था.

टाटा समूह की कमान संभाली और ‘महाराजा’ को वापस ले आए 

चंद्रशेखरन ने 21 फरवरी 2017 को टाटा समूह (Tata Group) की कमान संभाली. उस वक्त जब समूह निवर्तमान प्रमुख साइरस मिस्त्री के साथ कड़वी लड़ाई में उलझा हुआ था. इससे कंपनी के कारोबार और मनोबल दोनों पर विपरीत असर पड़ रहा था. लेकिन चंद्रशेखरन ने न सिर्फ इस मुश्किल दौर से कंपनी को बिना किसी विवाद के बाहर निकाला बल्कि उसके खाते में एक ऐसी उपलब्धि दर्ज कराई, जो भावनात्मक रूप से उसके साथ जुड़ी थी. ये थी, ‘महाराजा’ यानी एयर इंडिया (Air India) की टाटा समूह (Tata Group) में वापसी, जो राष्ट्रीयकरण के पहले तक उसी की एयरलाइंस हुआ करती थी. सरकार ने जब एयर इंडिया (Air India) को बेचने का फैसला किया, तो टाटा समूह ने शुरू से इसे वापस हासिल करने की कोशिश की. और बड़ी मशक्कत के बाद वापस लिया भी.

शायद इसीलिए ‘मैराथन-मैन’ कहलाते हैं 

चंद्रशेखरन के खाते में जो उपलब्धियां हैं, वे किसी बेसब्र इंसान के बूते की बात नहीं हो सकतीं और वे ऐसे हैं भी नहीं. बहुत कम लोग जानते होंगे कि चंद्रशेखरन ‘मैराथन-मैन’ भी कहे जाते हैं. क्योंकि वे बेहतरीन फोटोग्राफर और मैराथन धावक भी हैं. उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मैराथन प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लिया है. इनमें मुंबई, एम्सटर्डम, बोस्टन, शिकागो, बर्लिन, न्यूयॉर्क और टोक्यो में हुईं मैराथन प्रमुख हैं. इन प्रतिस्पर्धाओं में उनका बेहतर रिकॉर्ड 5 घंटे 52 सेकंड का है, जो उन्होंने 2014 में न्यूयॉर्क मेराथन में बनाया था. चंद्रशेखरन के लिए ऐसे रिकॉर्ड कोई बड़ी बात है क्या?

Tags: Hindi news live, Padma Awards 2022, Tata

विज्ञापन
विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर