भारतीय वायु सेना को मिलेगी तेजस की ताकत, 48 हजार करोड़ के सौदे पर मुहर आज

83 तेजस विमान अपडेटेड वर्जन के साथ वायुसेना में शामिल किए जाएंगे. (तस्वीर-News18 English)

Tejas Fighter Jet: तेजस एमके-1ए स्वदेश में डिजाइन, विकसित और निर्मित अत्याधुनिक चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं. यह विमान एईएसए रडार, दृश्यता के दायरे से बाहर, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक और हवा में ईंधन भरने की क्षमता (एएआर) से लैस है.

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    नई दिल्‍ली. सरकार भारतीय वायुसेना के लिए सरकारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटिड से 83 तेजस हल्के लड़ाकू विमान (Tejas Fighter Jet) खरीदने का 48000 करोड़ रुपए का सौदा बुधवार को आधिकारिक रूप से करेगी. अधिकारियों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना के शीर्ष अफसर और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटिड (HAL) के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बेंगलुरु में एयरो इंडिया एयर शो के दौरान अनुबंध पर हस्ताक्षर होंगे. यह अब तक का सबसे बड़ा स्वदेशी रक्षा खरीद सौदा होगा.


    प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति (सीसीएस) ने घरेलू रक्षा खरीद के तहत करीब 48,000 करोड़ रुपए की लागत से 83 तेजस विमान खरीदने को 13 जनवरी को मंजूरी प्रदान की थी. इसके तहत 73 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस एमके-1ए विमान और 10 तेजस एमके-1 प्रशिक्षण विमान शामिल हैं.


    चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है तेजस
    तेजस एमके-1ए स्वदेश में डिजाइन, विकसित और निर्मित अत्याधुनिक चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं. यह विमान इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए सक्रिय एरे (एईएसए) रडार, दृश्यता के दायरे से बाहर (बीवीआर), मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक (ईडब्ल्यू) और हवा में ईंधन भरने की क्षमता (एएआर) से लैस है.


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    एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर. माधवन ने पिछले महीने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा वायुसेना को तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) की आपूर्ति मार्च 2024 से शुरू हो जाएगी और कुल 83 विमानों की आपूर्ति होने तक हर वर्ष करीब 16 विमानों की आपूर्ति की जाएगी. माधवन ने कहा कि विमान की मूल लागत 25 हजार करोड़ रुपए है, जबकि 11 हजार करोड़ रुपए का इस्तेमाल हवाई अड्डों पर सहायक उपकरण एवं अन्य ढांचे के विकास में इस्तेमाल किया जाएगा. वहीं करीब सात हजार करोड़ रुपए सीमा शुल्क और जीएसटी पर खर्च होगा.




    एचएएल के अध्यक्ष ने बताया कि विमान के हर लड़ाकू संस्करण की कीमत 309 करोड़ रुपए होगी और प्रशिक्षण विमान की कीमत 280 करोड़ रुपए है। 48 हजार करोड़ की कुल लागत में 2500 करोड़ रुपए डिजाइन और विकास लागत है जो एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को दिया जाएगा और करीब 2250 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा विनिमय दर के लिए रखा गया है.

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