तेलंगाना उपचुनाव में जीत से बढ़ा BJP का मनोबल, TRS के लिए नींद से जागने का मौका

तेलंगाना सीएम के. चंद्रशेखर राव के गढ़ में बीजेपी ने उपचुनाव में बाजी मारी है. (सांकेतिक तस्वीर)
तेलंगाना सीएम के. चंद्रशेखर राव के गढ़ में बीजेपी ने उपचुनाव में बाजी मारी है. (सांकेतिक तस्वीर)

मंगलवार को घोषित किये गए उपचुनाव के नतीजों में, भाजपा उम्मीदवार एम रघुनंदन राव (Madhavaneni Raghunandan Rao) ने टीआरएस की अपनी निकटम प्रतिद्वंद्वी एस सुजाता को 1,079 मतों से पराजित किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 9:59 PM IST
  • Share this:
हैदराबाद. तेलंगाना की दुब्बक विधानसभा सीट (Dubbak Assembly By-election) पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली विजय से पार्टी का मनोबल बढ़ा है और सत्ताधारी दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के लिए यह नींद से जागने का मौका है. मंगलवार को घोषित किये गए उपचुनाव के नतीजों में, भाजपा उम्मीदवार एम रघुनंदन राव ने टीआरएस की अपनी निकटम प्रतिद्वंद्वी एस सुजाता को 1,079 मतों से पराजित किया.

रामलिंगा रेड्डी की मृत्यु के बाद खाली हुई थी सीट
सुजाता के पति एस रामलिंगा रेड्डी की स्वास्थ्य कारणों से अगस्त में हुई मौत के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी जिसके चलते उपचुनाव कराना पड़ा. उपचुनाव के परिणाम से टीआरएस सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 119 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के 100 विधायक हैं.

TRS का गढ़ है दुब्बक सीट
हालांकि एक सीट पर भाजपा की जीत से राज्य की राजनीतिक स्थिति प्रभावित नहीं होगी लेकिन दुब्बक की सीट टीआरएस का गढ़ रही है और यह मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के गृह जिले सिद्दिपेट का एक हिस्सा है. रामलिंगा ने 2018 विधानसभा चुनाव में टीआरएस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 62,000 मतों से जीत हासिल की थी. उस समय भाजपा के रघुनंदन राव को 22,595 मत मिले थे. राव को अब 63,352 मत मिले हैं और उन्होंने जीत हासिल की है.



राज्य की राजनीति पर TRS का प्रभाव मजबूत
दुब्बक सीट पर भाजपा की जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्तमान में राज्य की राजनीति पर टीआरएस का प्रभाव काफी मजबूत है. पार्टी ने 2018 के विधानसभा और पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव तथा स्थानीय निकाय चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया था. भाजपा द्वारा दुब्बक सीट पर विजय प्राप्त करना सत्ताधारी दल के किले में सेंध लगाने जैसा है, विशेषकर सिद्दिपेट जिले में जो मुख्यमंत्री का गृह जिला है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकारिता के प्रोफेसर के नागेश्वर का मानना है कि एक उपचुनाव के नतीजे से राज्य की राजनीति नहीं पलटने वाली. उन्होंने कहा कि दुब्बक पर भाजपा की जीत को न तो नकारा जा सकता है न ही उसे आवश्कयता से अधिक महत्व देने की जरूरत है.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से कहा, 'यदि ऐसा ही होता तो भाजपा ने 2012 में महबूबनगर की सीट जीती थी. इसका 2014 के चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ा? (जब तेलंगाना बनने के बाद टीआरएस सत्ता में आई थी.) क्या भाजपा ने महबूबनगर की सीट पुनः जीती? महबूबनगर सीट जीतने की बात तो छोड़िये, वह तीसरे स्थान पर आ गई.'

नागेश्वर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच चुका है जहां हर चुनाव विशेष है. उन्होंने कहा कि एक उपचुनाव से राज्य की राजनीति नहीं बदलेगी लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लिया जा सकता क्योंकि भाजपा ने अपने मतों की संख्या तीन गुना तक बढ़ा ली है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज