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तेलंगाना मुठभेड़: सुप्रीम कोर्ट ने दिया न्यायिक जांच का आदेश, पूर्व जज सिरपुकर होंगे आयोग अध्यक्ष

भाषा
Updated: December 12, 2019, 6:49 PM IST
तेलंगाना मुठभेड़: सुप्रीम कोर्ट ने दिया न्यायिक जांच का आदेश, पूर्व जज सिरपुकर होंगे आयोग अध्यक्ष
तेलंगाना पुलिस का दावा है कि इन आरोपियों ने उनके हथियार छीनने की कोशिश की.

तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) इन आरोपियों को घटनास्थल पर ले गयी थी जहां सवेरे साढ़े छह बजे हुई मुठभेड़ में इन चारों आरोपियों को गोली मार दी गयी.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने तेलंगाना (Telangana) में पशु चिकित्सक से सामूहिक बलात्कार और हत्या के चारों आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच का गुरुवार को आदेश दिया. अदालत ने इस मुठभेड़ की जांच के लिये गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की बागडोर शीर्ष अदालत के पूर्व जस्टिस वी एस सिरपुरकर को सौंपी है.

जांच आयोग के अन्य सदस्यों में बंबई हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस रेखा संदूर बाल्डोटा और सीबीआई के पूर्व निदेशक डी आर कार्तिकेयन शामिल हैं. आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपनी है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय बेंच ने इसके साथ ही तेलंगाना हाईकोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में इस घटना के संबंध में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी है.

बेंच ने मुठभेड़ के इस मामले की जांच के लिये गठित विशेष जांच दल की रिपोर्ट तलब करने के साथ ही कहा कि उसके अगले आदेश तक जांच आयोग के समक्ष लंबित इस मामले में कोई अन्य प्राधिकार इसकी जांच नहीं करेगा. अदालत ने तीन सदस्यीय जांच आयोग को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की सुरक्षा मुहैया कराने का भी आदेश दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि रिपोर्ट पेश करने की छह महीने की समय-सीमा आयोग के समक्ष सुनवाई शुरू होने के पहले दिन से शुरू होगी और इसे छह दिसंबर की घटना की जांच करने के लिये जांच आयोग को कानून के तहत सभी अधिकार प्राप्त होंगे.

बेंच ने कहा कि 'इस घटना के बारे में परस्पर विरोधी तथ्यों को देखते हुये सच्चाई का पता लगाने के लिये जांच जरूरी है.' बेंच ने तेलंगाना सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के इस कथन का भी संज्ञान लिया कि पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल इस घटना की जांच कर रहा है और वह अपनी रिपोर्ट देगा. बेंच को यह भी बताया गया कि विशेष जांच दल इन चार व्यक्तियों की मौत की कारणों की भी जांच कर रहा है जो पशु चिकित्सक की हत्या और बलात्कार के आरोपी थे और उन्हें घटनास्थल पर ले जाने वाले पुलिस अधिकारियों की हत्या के प्रयास के आरोप में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

मृत व्यक्तियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता
बेंच ने अपने आदेश में कहा कि विशेष जांच दल की जांच के बाद मृत व्यक्तियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और न ही उन्हे सजा दी सकती है. बेंच ने कहा, 'हम नहीं समझ पा रहे कि यह कैसे प्रमाणित किया जाये कि ऐसे मुकदमे से इस घटना से संबंधित सच्चाई का पता कभी भी पता लग सकेगा जिसमें कहा जाता है कि पुलिस ने मुठभेड़ की और इसमें चारों आरोपी मारे गये.' बेंच ने कहा, 'इसलिए हमारी सुविचारित राय है कि छह दिसंबर की सुबह हैदराबाद में चारों आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने की परिस्थितियों की जांच करने के लिये जांच आयोग गठित करने की आवश्यकता है.

इससे पहले, सवेरे सुनवाई शुरू होते ही बेंच ने कहा कि उसका मानना है कि मुठभेड़ में चार आरोपियों के मारे जाने की घटना की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है. तेलंगाना मुठभेड़ की घटना को लेकर अदालत में दो जनहित याचिकायें दायर की गयी हैं. पहली याचिका अधिवक्ता जी एस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने दायर की है जबकि दूसरी याचिका एक अन्य अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है. इनमें संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया है.मणि और यादव की याचिका में दावा किया गया है कि कथित मुठभेड़ ‘फर्जी’ थी और इस घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए. इसी तरह, मनोहरलाल शर्मा ने शीर्ष अदालत की निगरानी में इस घटना की विशेष जांच दल से जांच कराने का अनुरोध किया था.

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First published: December 12, 2019, 6:35 PM IST
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