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48,000 रोडवेज कर्मचारियों की छुट्टी के बाद नर्म पड़े तेवर, बंटने लगे यूनियन

News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 5:15 PM IST
48,000 रोडवेज कर्मचारियों की छुट्टी के बाद नर्म पड़े तेवर, बंटने लगे यूनियन
फिलहाल समय TSRTC के 49,340 कर्मचारी और कॉन्ट्रेक्ट वर्करों में से सिर्फ 1200 ही बचे हैं.

तेलंगाना रोडवेजे कर्मचारियों की मांग है कि Tsrtc) को सरकार में मर्ज कर लिया जाए यानि वो एक निगम की जगह सरकारी विभाग बन जाए.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 5:15 PM IST
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हैदराबाद. तेलंगाना  (Telangana) सरकार के सख्त रुख के सामने राज्य सड़क परिवहन निगम (Tsrtc)) से जुड़े कर्मचारी संगठन बंटते नजर आने लगे हैं.  खासकर 'सड़क परिवहन निगम राष्ट्रीय मज़दूर यूनियन' का रुख थोड़ा नर्म पड़ गया है और वो मर्जर की डिमांड को फिलहाल टालने को तैयार है लेकिन तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम मजदूर यूनियन के लोग पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे.

तेलंगाना में 48,000 रोडवेज कर्मचारियों की एकमुश्त छुट्टी करने के तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao) के फैसले से सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.

48,000 से ज्यादा कर्मचारी और कामगारों की छुट्टी करने के बाद भी मुख्यमंत्री केसीआर के तेवर सख्त बने हुए हैं. इंद्रा पार्क पर विरोध प्रदर्शन की पुलिस ने इजाजत नहीं दी और गन पार्क पर कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया गया लेकिन सरकार की सख्ती के सामने कर्मचारी संगठन झुकने को तैयार नहीं.

सड़क और अदालत, दोनों जगह लड़ने को तैयार यूनियन

तेलंगाना में रोडवेज कर्मचारियों का सबसे बड़े संगठन 'तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम मज़दूर यूनियन' ने साफ कर दिया है कि आरटीसी को सरकार में मर्ज करने की डिमांड सबसे महत्वपूर्ण है और इससे पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता. कर्मचारी यूनियन के नेता इस लड़ाई को सड़क और अदालत दोनो मोर्चों पर लड़ने को तैयार हैं.

लेकिन सभी कर्मचारी इस मामले में एकजुट नहीं हैं. खासकर राष्ट्रीय मजदूर यूनियन से जुड़े कर्मचारियों का रुख नर्म पड़ गया है. संगठन के नेताओं का कहना है कि अगर तेलंगाना सरकार RTC कर्मचारियों कि बाकी मांग मानने को तैयार हो जाती है, तो RTC को सरकार में मर्ज करने की मांग को फिलहाल एक कमेटी के विचार के लिए सौंपकर समझौते का रास्ता निकाला जा सकता हैं.

यह यूनियन मर्जर की मांग टालने को तैयार
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राष्ट्रीय मजदूर यूनियन मर्जर की मांग टालने को तैयार है. उसका मानना है कि मर्जर की डिमांड सबसे प्रमुख नहीं है. आरटीसी के हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में तमाम राजनैतिक दल सामने आ गए हैं, लेकिन बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वो आरटीसी के सरकार में मर्जर करने की डिमांड का समर्थन नहीं करती.

रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल आम आदमी के लिए मुसीबत बनकर आई है. त्योहार के मौके पर यात्रियों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. निजी बस ऑपरेटर्स मौके का फायदा उठा रहे हैं और यात्रियों से ज्यादा किराया वसूल करने वाले तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

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First published: October 7, 2019, 5:15 PM IST
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