तेलंगाना के चुनाव परिणाम में लगा भारी सट्टा, टीआरएस पर बाज़ार दे रहा है यह भाव

तेलंगाना के चुनाव परिणाम में लगा भारी सट्टा, टीआरएस पर बाज़ार दे रहा है यह भाव
प्रदेश में सट्टेबाज़ी आम है, क्योंकि वे पोंगल के दौरान मुर्ग़े की लड़ाई में भी सट्टा लगाते हैं जिसे “कोडी पंडालु” कहा जाता है।

प्रदेश में सट्टेबाज़ी आम है, क्योंकि वे पोंगल के दौरान मुर्ग़े की लड़ाई में भी सट्टा लगाते हैं जिसे “कोडी पंडालु” कहा जाता है।

  • Last Updated: December 10, 2018, 7:21 PM IST
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पीवी रमाना, हैदराबाद

तेलंगाना में चुनाव परिणामों की प्रतीक्षा हो रही है। राजनीतिक पार्टियाँ उम्मीदें लगाई बैठी हैं और उनमें यह जानने की छटपटाहट है कि कौन जीतता है। सब की नज़रें 11 दिसंबर को आने वाले चुनाव परिणाम पर लगी हुई हैं। पूरा राज्य इस बात की बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा है कि अगले पांच साल के लिए उनके राज्य के शासन की बागडोर किसके हाथ में होगी।

लोगों को न केवल चुनाव परिणामों को जानने की उत्सुकता है बल्कि वे इस उम्मीदों पर दांव लगाकर पैसे भी बनाना चाहते हैं। पेशेवर सट्टेबाज़ माफ़िया तेलंगाना के चुनाव परिणामों पर भारी सट्टा लगा रहे हैं। पिछले चार दिनों में इस पर करोड़ों रुपए के दांव लग चुके हैं। न केवल पेशेवर माफ़िया बल्कि मित्र, समूह और निजी स्तर पर भी लोग इस सट्टेबाज़ी के हिस्सा बन रहे हैं।



यह सट्टेबाज़ी क्रिकेट में होने वाली सट्टेबाज़ी जैसी ही है। चुनावी सट्टेबाज़ी में उपलब्ध विकल्प हैं - क्या तेलंगाना में टीआरएस की सरकार बनेगी? क्या टीआरएस को 58 सीटें मिलेंगी? क्या प्रजकुतामी की सरकार बनेगी? क्या हरीश राव को एक लाख वोट मिलेंगे?



लोग इन बातों पर सट्टा लगा रहे हैं और 1 लगाकर डेढ़ पाने के लिए इस दांव लगा रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई व्यक्ति इस बात पर दांव लगाता है कि “क्या टीआरएस की सरकार बनेगी?, तो अगर चुनाव परिणाम आने के बाद यह “हाँ” होता है तो उसे अपना एक लाख तो मिलेगा ही, उसे डेढ़ लाख अतिरिक्त भी मिलेगा। अगर निजी सट्टे और समूह की बात करें, तो यह एक के बदले एक का नियम है। टीडीपी की उम्मीदवार नंदमुरी सुहासिनी जो कूकतपल्ली से चुनाव लड़ रही हैं, उन पर भी काफ़ी सट्टेबाज़ी हो रही है। वह एनटीआर की पोती हैं। वे चुनाव जीतती हैं कि नहीं, इस बारे में लोगों की गहरी दिलचस्पी है।

एपी के लोग तेलंगाना की राजनीति पर सट्टा लगाने में काफ़ी दिलचस्पी ले रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने यहां चुनाव प्रचार में काफ़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। वे यहं के चुनाव परिणामों के बारे में जानने को काफ़ी उत्सुक हैं। चुनाव से पहले हुई सट्टेबाज़ी में काफ़ी लोगों ने पैसा लगाया था और किस पर सट्टा लगाएं इस बारे में उन्हें कोई दुविधा नहीं थी।

चुनाव के बाद भी, स्पष्टता थी क्योंकि सभी एग्ज़िट पोल में टीआरएस के जीतने की संभावना बताई गई है। एक नेता लगदपति राजा गोपाल ने काफ़ी भ्रम पैदा किया। और सभी आंकड़े नीचे आ गए। सट्टेबाज़ी में शामिल भीमावरम का एक व्यक्ति गिरिधर ने यह बात न्यूज़18 को बताई।

आंध्र प्रदेश के लोगों में तेलंगाना के चुनाव परिणामों को लेकर काफ़ी उत्सुकता है। तेलंगाना से अपने जुड़ाव को लेकर वे भावुक हैं। विशेषकर विजयवाड़ा, गुंटूर, प्रकाशम, पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिले, अनंतपुर, करनूल और यहां तक कि हैदराबाद को लेकर लोगों में काफ़ी उत्सुकता है।

खम्माम के एक वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवास रेड्डी ने बताया, “मुझे विजयवाड़ा और गुंटूर से हर दिन दोस्तों के फोन आते हैं। वे चुनाव परिणाम के बारे में पूछते हैं। जब मैंने इसका कारण पूछा तो उन्होंने मुझे सीधे कहा कि वे चुनाव परिणामों पर सट्टा लगा रहे हैं। और हां, मैंने इस बारे में अपने विचार उनसे साझा करने की कोशिश की”।

कूकतपल्ली के संबाशिव राव ने न्यूज़18 से कहा, “हां, हम चुनाव में सट्टा लगाएंगे। सिर्फ़ पैसे के लिए ही नहीं। पैसे तो आते जाते रहते हैं। हम अपनी पार्टी और अपने नेताओं के साथ अपने संबंधों को मज़बूत बनाना चाहते हैं।”

आंध्र प्रदेश में सट्टेबाज़ी आम है, क्योंकि वे पोंगल के दौरान मुर्ग़े की लड़ाई में भी सट्टा लगाते हैं जिसे “कोडी पंडालु” कहा जाता है। चाहे जो भी हो, कल जो चुनाव परिणाम आएंगे वह सिर्फ़ नेताओं के ही भविष्य तय नहीं करेंगे बल्कि सट्टा लगाने वालों के भाग्यों का भी फ़ैसला यह करेगा।
First published: December 10, 2018, 7:18 PM IST
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