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मंदिर मस्जिद विवाद फिर पहुंचा अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस कानून को चुनौती दी है.

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस कानून को चुनौती दी है.

Places of Worship Act 1991: इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने 1991 में कानून बनाया था की 1947 में जो धार्मिक स्थल जैसी है वैसे ही रहेगी. सिर्फ अयोध्या (Ayodhya) के बाबरी मस्जिद और राम जन्म भूमि मामले को इस कानून से अलग रखा गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 2:27 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को 1991 के Places of Worship Act यानि धार्मिक स्थल कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी कर केंद्र सरकार (Central Government) से जवाब मांगा. यानी अदालत अब उस कानून की समीक्षा करेगी जिसमे कहा गया था की 1947 में जिस धार्मिक स्थल का जो कैरेक्टर है वो बना रहेगा. ऐसा कानून मंदिर मस्जिद के विवाद को खत्म करने के लिए बनाया गया था. देश भर में ऐसे कई मामले सामने आए थे जहां एक धार्मिक स्थल पर दो समुदाय अपना अपना दावा कर रहे थे. जैसे अयोध्या, मथुरा और काशी.

इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने 1991 में कानून बनाया था की 1947 में जो धार्मिक स्थल जैसी है वैसे ही रहेगी. सिर्फ अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि मामले को इस कानून से अलग रखा गया था. राम जन्म भूमि पर सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुना चुका है. लेकिन मथुरा और काशी का मामला अभी बाकी है. 1991 के कानून के मुताबिक उस धार्मिक स्थल को बदला नहीं जा सकता. यानी मथुरा और काशी का विवादित स्थल मस्जिद ही रहेगा.

इसलिए बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस कानून को चुनौती दी है. उनका कहना है की ये उनके धार्मिक अधिकार का हनन है. सुप्रीम कोर्ट अब ये तय करेगा की 1991 का धार्मिक स्थल कानून सही है या नहीं. याचिका में कहा गया है की ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं, जिन्हें मुस्लिम शासन काल में मस्जिद में बदल दिया गया था. लेकिन 1991 के कानून की वजह से हिंदू, सिख और बौद्ध अपने धार्मिक स्थल को वापस नहीं ले सकते. इसलिए ये कानून गैर संविधानिक है.
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