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सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल

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Updated: October 8, 2018, 1:16 PM IST
सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल
सबरीमाला मंदिर की फाइल फोटो

नेशनल अयप्‍पा डिवोटी एसोसिएशन की अध्‍यक्ष शैलजा की अोर से दाखिल पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों ने महिलाओं के प्रवेश पर उम्र के प्रतिबंध को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई, वे भगवान अयप्‍पा के भक्‍त नहीं हैं.

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  • Last Updated: October 8, 2018, 1:16 PM IST
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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोमवार को पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि 28 सितंबर को आया फैसला पूरी तरह से तर्कहीन है जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता. नेशनल अयप्‍पा डिवोटी एसोसिएशन की अध्‍यक्ष शैलजा विजयन ने इस पुनर्विचार याचिका  ने दाखिल किया है.

शैलजा की अोर से कहा गया है कि जिन लोगों ने महिलाओं के प्रवेश पर उम्र के प्रतिबंध को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई, वे भगवान अयप्‍पा के भक्‍त नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मंदिर के प्रमुख देवता भगवान अयप्‍पा के लाखों भक्‍तों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है.

गौरतलब है कि 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और इससे हिन्दू महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है.

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जस्टिस आर. एफ. नरीमन और जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ अपने फैसलों में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस ए. एम. खानविलकर के फैसले से सहमत हुए. जबकि जस्टिस इन्दु मल्होत्रा ने बहुमत से अलग अपना फैसला पढ़ा.

बता दें कि केरल सरकार द्वारा यह स्पष्ट करने पर कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगी राज्य में प्रदर्शनों में तेजी आई है. राज्य के विभिन्न शहरों के अलावा रविवार को प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मतर पर भी प्रदर्शन किया.वहीं अब यह फैसला राजनीतिक रंग भी पकड़ने लगा है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंदोलन करते हुए विजयन सरकार पर बिना फैसले की समीक्षा किए हुए उसे लागू करने का आरोप लगाया है.

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First published: October 8, 2018, 12:42 PM IST
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