Rajasthan Crisis: 'व्हिप' के फेर में फंसी कांग्रेस, अदालत से सियासत में जीत का दांव

Rajasthan Crisis: 'व्हिप' के फेर में फंसी कांग्रेस, अदालत से सियासत में जीत का दांव
अशोक गहलोत और सचिन पायलट की फाइल फोटो

Rajasthan Political Crisis: खेमा चाहे अशोक गहलोत (Ashok Geglot) का हो, सचिन पायलट (Sachin Pilot) का हो या फिर हाल ही में इन दोनों के बीच अपने विधायकों के लिए आगे आई बहुजन समाज पार्टी (bsp) का, तीनों अपने-अपने हिस्से की राजनीतिक जंग के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं.

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(सुहास मुंशी)
नई दिल्ली/ जयपुर. 
राजस्थान में कांग्रेस (Rajasthan Political Crisis) के अंतर्कलह से उपजे राजनीतिक संकट में राजनीति से ज्यादा कानूनी दांवपेंच इस्तेमाल किये जा रहे हैं. खेमा चाहे अशोक गहलोत का हो, सचिन पायलट का हो या फिर हाल ही में इन दोनों के बीच अपने विधायकों के लिए आगे आई बहुजन समाज पार्टी का, तीनों अपने-अपने हिस्से की राजनीतिक जंग के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं. फिलहाल राजस्थान की राजनीति में मुख्यतः संविधान की 10वीं अनूसूची या दल बदल कानून ( Tenth Schedule of the Constitution-the anti-defection law) की लड़ाई लड़ी जा रही है.

सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने उन्हें और 18 अन्य 'बागी' कांग्रेस विधायकों को जारी किए गए अयोग्यता नोटिस को कानूनी चुनौती दी है. उनका कहना है कि सिर्फ असहमति व्यक्त करने के चलते उनकी सदस्यता नहीं छीनी जा सकती है. (दल बदल कानून का पैरा 2(1)(a) ).

पायलट के वकीलों ने दल-बदल कानून के पैरा 2 (1) (ए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है. उनका तर्क है कि इसे संविधान की मूल संरचना के तहत कार्यक्षेत्र के बाहर घोषित किया जाए. दसवीं अनुसूची के तहत एक विधायक को दो तरीकों से अयोग्य घोषित किया जा सकता है. पहला अगर वह स्वेच्छा से अपनी पार्टी की अपनी सदस्यता छोड़ देता है [पैरा2 (1) (a)], या यदि वह राजनीतिक पार्टी द्वारा जारी किये गये व्हिप से अलग 'वोट' करता है या अब्सेंट हो जाता है. [पैरा 2 (1) (बी)]'
स्पीकर के रास्ते सुप्रीम कोर्ट पहुंची राजस्थान सरकार


राजनीतिक संकट और आगे बढ़ने के बाद राजस्थान सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बजरिए स्पीकर डॉक्टर सीपी जोशी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इस बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) से संबंधित और अपने छह विधायकों को व्हिप जारी करने का अधिकार होने का दावा एक और राजनीतिक-कानूनी बहस का केंद्र बन गया है.

रविवार को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने पार्टी की ओर से एक व्हिप जारी किया और राजस्थान में छह विधायकों को विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए कहा. मिश्रा ने कहा कि लाखन सिंह, दीप चंद, आर. गुढ़ा, वाजिब अली, जेएस अवाना और संदीप कुमार अगर व्हिप के खिलाफ जाएंगे तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. सभी छह विधायकों ने राज्य में विधानसभा चुनाव होने के लगभग एक साल बाद पिछले साल सितंबर में कांग्रेस में विलय की घोषणा की थी.

स्पीकर ने संविधान की दसवीं अनुसूची या दलबदल विरोधी कानून के तहत बसपा विधायकों का कांग्रेस में विलय स्वीकार कर लिया था. बाद बसपा ने इस मुद्दे को चुनाव आयोग के समक्ष उठाया था. सोमवार को बीजेपी विधायक मदन दिलावर द्वारा राजस्थान हाई कोर्ट में बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ याचिका दायर की गई थी हालांकि इसे बाद में खारिज कर दिया गया था.

इस बीच राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को गहलोत सरकार से कहा कि अगर बहुमत परीक्षण एजेंडा है तो एक शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाया जा सकता है.

किसके पास है व्हिप का अधिकार?
दूसरी ओर विशेषज्ञों इस पर अलग-अलग राय है कि वास्तव में विधानसभा में व्हिप जारी करने का कानूनी अधिकार किसके पास है. कई लोगों ने तर्क दिया है कि प्रत्येक पार्टी को विधानसभा शुरू होने से पहले अपने व्हिप का नाम देना होगा।. अगर बीएसपी के मामले में मिश्रा व्हिप हैं उनके व्हिप को कानूनी तौर पर सही माना जा सकता है.'

इसका जवाब भी खुद मिश्रा ने दिया. एएनआई से उ न्होंने कहा, 'बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है, छह विधायकों के कहने पर राज्य स्तर पर कोई विलय नहीं हो सकता है जब तक कि राष्ट्रीय स्तर पर बीएसपी का विलय नहीं होता है.' उनके अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व को विलय को मंजूरी देनी होगी. राज्य इकाई एकतरफा यह फैसला नहीं ले सकती.

कांग्रेस के वकील ने क्या कहा?
वहीं मीडिया से बातचीत में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सुनील फर्नांडीस ने दावा किया है कि दसवी अनुसूची में एक राष्ट्रीय पार्टी की एक इकाई का दूसरे राष्ट्रीय पार्टी के साथ विलय करने की अनुमति दी गई है.

फर्नांडिस ने कहा 'विलय महीनों पहले हुआ था. यह आश्चर्य की बात है कि बीएसपी का केंद्रीय नेतृत्व अब जागा और विलय को गैरकानूनी मान लिया. भाजपा विधायक द्वारा बसपा विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए HC में याचिका दायर करने के बाद ही बसपा यह दलील दे रही है. बीएसपी और दिलावर दोनों गलत हैं.'

कांग्रेस के वकील ने कहा 'दसवीं अनुसूची विधायक दल के विलय की भी अनुमति देती है. एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय के लिए बीएसपी को गलत माना गया है. मूल पार्टी का विलय नहीं हो सकता है, लेकिन एक विधायक दल के सदस्यों को संविधान के एक्स शेड्यूल (एंटी-डिफेक्शन एक्ट) के तहत किसी अन्य पार्टी के साथ विलय करने का अधिकार है.' (यह लेख अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद किया गया है, मूल लेख यहां पढ़ें)
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