पाक सीमा पर सख्त पहरा, तो अब नदी के रास्ते कश्मीर में घुसपैठ की फिराक में आतंकी: सूत्र

खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी रबर बोट, ट्यूब के साथ ही हथियार संग कश्मीर में घुसपैठ की तैयारी में हैं.

Sandeep Bol | News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 3:44 PM IST
पाक सीमा पर सख्त पहरा, तो अब नदी के रास्ते कश्मीर में घुसपैठ की फिराक में आतंकी: सूत्र
खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकी रबर बोट, ट्यूब के साथ ही हथियार संग कश्मीर में घुसपैठ की तैयारी में हैं.
Sandeep Bol
Sandeep Bol | News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 3:44 PM IST
नई दिल्ली. भारतीय सेना  (Indian Army) की चौकसी और सीमा पर मुस्तैदी ने पाकिस्तान (Pakistan) के मनसूबों पर पानी फेर रखा है तो वहीं पाकिस्तान अब पानी के रास्ते घाटी में अपना सफर तय करने की फिराक में हैं.

हालांकि भारतीय खुफिया तंत्र ने पाक की इस चाल पर भी पानी फेर दिया. खुफिया एजेंसी ने अलर्ट जारी किया है कि पाकिस्तान अब अपने आतंकियों को भारतीय सेना को चकमा देने के लिए नया रिवर प्लान (River Plan) पर काम कर रहा है.

पाकिस्तान का यह प्लान तो पुराना है लेकिन लंबे अरसे से इसका इस्तेमाल नहीं गया. रिपोर्ट में ये कहा गया है कि नदी के रास्ते आतंकी सेना को चकमा देने के फिराक में हैं.

मौजूद हैं आतांकियों के गुट

गुरेज सेक्टर (Gurez Sector) के दूसरी ओर पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में डोमेल और पाकिस्तान की फॉर्रवर्ड चौकियों में से एक मस्जिद कांम्पलेक्स लॉन्च पैड पर कई ऐसे आतंकियों के गुट मौजूद हैं जो हथियारों के साथ-साथ छोटी रबर बोट , गाड़ियों के टायरों के ट्यूब के साथ घुसपैठ की तैयारी में हैं

यह है आतंकियों की कोशिश
दरअसल इनकी कोशिश है कि अगर गुरेज सैक्टर से आतंकी घुसपैठ करने में अगर कामयाब भी हो जाते है तो सुरक्षा का तंत्र अंदर भी इतना मज़बूत है की रास्तों के जरिए श्रीनगर पहुंचना मुश्किल है. सेना के चेक पोस्ट को पार न करना पड़े इसके लिए बाकायदा उसे बायपास करने के लिए किशनगंगा नदी से बोट के जरिए अपने सफ़र को आगे बढ़ाया जा सके.
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सूत्रों के मुताबिक यह कोई नई तकनीक नहीं है. 90 के दशक में इस तरह से पानी के रास्ते आतंकी घाटी में घुसते थे लेकिन लंबे समय से इस तरकीब का इस्तेमाल नहीं हुआ. हालांकि पाक एक बार फिर से पुरानी तकनीक का सहारा लेने को मजबूर है.

आतंकियों के सामने समस्या
फिलहाल आतंकियो के सामने समस्या यह है कि एक तो सुरक्षा चाक चौबंद है तो वही मौसम में ठंडक होने के चलते बर्फ नहीं पिघल रही ऐसे में नदी में पानी की गहराई कम है. इसके चलते पूरा सफर नदी के रास्ते तय करना मुश्किल होगा. आतंकी सिर्फ उन इलाकों में बोट का इस्तेमाल कर सकते है जहाँ पानी का बहाव और गहराई ज़्यादा हो.

जानकारों का यह भी मानना है की पहले के समय में जैसे ही आतंकियों सफ़र पूरा हो जाता था तो वो इस तरह की रबर बोट को नदी के किनारे पंचर कर के आगे बढ जाते थे. साल 2011 में एक बडा एंकाउंटर भारतीय सेना ने गुरेज सेक्टर में किया था. उस वक्त नदी के रास्ते आ रहे 11 आतंकियों को सेना ने ढेर कर दिया था.

यहां देखें वीडियो


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First published: September 12, 2019, 11:07 AM IST
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