थापर यूनिवर्सिटी पटियाला सार्वजनिक अथॉरिटी घोषित, RTI के तहत देनी पड़ेगी सूचना

समझौते के अंतर्गत संयुक्त चैरिटेबल ट्रस्ट बनाई गई और मोहिनी चैरिटेबल ट्रस्ट और पैपसू सरकार द्वारा इंस्टीट्यूट के लिए 30-30 लाख रुपए दिए गए थे.

समझौते के अंतर्गत संयुक्त चैरिटेबल ट्रस्ट बनाई गई और मोहिनी चैरिटेबल ट्रस्ट और पैपसू सरकार द्वारा इंस्टीट्यूट के लिए 30-30 लाख रुपए दिए गए थे.

आयोग प्रवक्ता ने बताया कि थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (Thapar Institute of Engineering and Technology) की स्थापना 1955 में उस समय की पैपसू (Patiala and East Punjab States Union)सरकार ने राज्य में तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अग्रणी थापर चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ समझौते के अंतर्गत की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 8:42 PM IST
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चंडीगढ़. राज्य सूचना आयोग (State Information Commission) ने थापर यूनिवर्सिटी पटियाला (Thapar University Patiala) को ‘‘सार्वजनिक अथॉरिटी’’ घोषित किया है और अपीलकर्ता को अपेक्षित जानकारी मुहैया करवाने के निर्देश दिए हैं. आर.टी.आई. एक्टिविस्ट आकाश वर्मा ने सूचना अधिकार एक्ट (Right of Information, RTI Act) के अंतर्गत जानकारी मांगी थी परन्तु थापर यूनिवर्सिटी ने जानकारी देने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि यूनिवर्सिटी आर.टी.आई. के दायरे में नहीं आती.

उन्होंने 24 दिसंबर, 2020 को थापर यूनिवर्सिटी द्वारा पास किए गए आदेशों के विरुद्ध अपील दायर राज्य सूचना आयोग के पास एक याचिका दायर की थी. थापर यूनिवर्सिटी ने आर.टी.आई. एप्लीकेशन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि थापर यूनिवर्सिटी को यू.जी.सी. एक्ट 1956 की धारा 3 के अंतर्गत प्राईवेट यूनिवर्सिटी माना जाता है और यह सार्वजनिक अथॉरिटी नहीं है.

पैपसू सरकार यूनिवर्सिटी को जमीन दी थी मुफ्त

आयोग प्रवक्ता ने बताया कि थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (Thapar Institute of Engineering and Technology) की स्थापना 1955 में उस समय की पैपसू (Patiala and East Punjab States Union)सरकार ने राज्य में तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अग्रणी थापर चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ समझौते के अंतर्गत की थी.
समझौते के अंतर्गत संयुक्त चैरिटेबल ट्रस्ट बनाई गई और मोहिनी चैरिटेबल ट्रस्ट और पैपसू सरकार द्वारा इंस्टीट्यूट के लिए 30-30 लाख रुपए दिए गए थे. 19.09.1955 को पैपसू सरकार ने लैंड ऑफ ऐक्यूजि़शन एक्ट (Land of Acquisition Act) की धारा 4 के अंतर्गत एक नोटीफिकेशन जारी किया, जिसमें यह कहा गया कि संभावित तौर पर 250 एकड़ वाली जमीन सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अपेक्षित है. इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए यह जमीन पैपसू सरकार द्वारा मुफ्त में दी गई और राज्य सरकार और यू.जी.सी. ने उक्त संस्था के लिए ग्रांटें दी थी.

अपील का किया निपटारा

अपील का निपटारा करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने आदेश दिया कि डी.ए.वी. कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी (DAV College Trust and Management Society) के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर, सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि अगर राज्य द्वारा दी गई जमीन पर कोई संस्था स्थापित की जाती है तो स्पष्ट तौर पर इसका अर्थ यह होगा कि इसको सरकार द्वारा उचित रूप में फाइनेंस किया गया है और यह सार्वजनिक अथॉरिटी है और आर.टी.आई. एक्ट, 2005 की शर्तों की पालना करने के लिए पाबंद है.
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