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सीजफायर पर यूं ही नहीं माना पाकिस्तान, जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

सीमा पर शांति की संभावना अब बढ़ गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

सीमा पर शांति की संभावना अब बढ़ गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

पाकिस्तान सीमा (Pakistan Border) पर सीजफायर (Ceasefire) का यह निर्णय उसी वक्त आया है जब चीन के साथ भी LAC पर हालात सुधरते दिख रहे हैं. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान यूं ही इस सीजफायर के लिए नहीं माना है. बीते समय में सीमा पर भारत के कठोर रुख ने उसे इसके लिए मजबूर किया है.

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    नई दिल्ली. भारत और पाकिस्तान (India-Pakistan) के बीच तय किया गया है कि दोनों पक्षों को लाइन ऑफ कंट्रोल और दूसरे सेक्टर्स में सीजफायर (Ceasefire) करना होगा. यह फैसला 24-25 फरवरी की मध्यरात्रि से अमल में लाया जाएगा. इस फैसले को आश्चर्य की निगाहों से भी देखा जा रहा है. क्योंकि सामान्य तौर पर पाकिस्तान की तरफ से अक्सर सीजफायर का उल्लंघन किया जाता रहा है. दिलचस्प है कि पाकिस्तान सीमा पर सीजफायर का यह निर्णय उसी वक्त आया है जब चीन के साथ भी LAC पर हालात सुधरते दिख रहे हैं.

    रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सीमा पर अशांति की दृष्टि से साल 2020 बेहद बुरा रहा है. पूरे साल में सीजफायर उल्लंघन के 4645 मामले हुए. ये बीते सालों की तुलना में काफी ज्यादा है. 2018 में ऐसी 1629 घटनाएं हुई थीं तो वहीं 2019 में 3168 घटनाएं. इस साल के शुरुआती दो महीने में ही 591 घटनाएं हो चुकी हैं.

    गलतफहमी को दूर करने के लिए होगा हॉटलाइन का इस्तेमाल
    दोनों देशों के ज्वाइंट स्टेटमेंट के अनुसार, दोनों DGMO एक-दूसरे के ऐसे जरूरी मुद्दों और चिंताओं को मानने के लिए तैयार हुए हैं, जो शांति भंग कर सकती है और हिंसा भड़का सकते हैं. दोनों पक्षों ने आपसी हित और सीमा पर शांति बनाए रखने के इरादे से यह फैसला लिया है. बातचीत के दौरान दोनों देशों ने इस बात को दोहराया कि किसी भी गलतफहमी और अनदेखे हालातों के निपटारे के लिए हॉटलाइन का इस्तेमाल किया जाएगा.

    रक्षा मंत्रालय की तरफ से साझा बयान में कहा गया, ‘दोनों देश सभी समझौतों और LOC के साथ दूसरे सेक्टर्स में भी सीजफायर का सख्ती से पालन करने के लिए तैयार हो गए हैं. यह 24 से 25 फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएगा.’ बातचीत के दौरान दोनों सेनाओं ने एलओसी के साथ दूसरे सेक्टर्स पर हालात की समीक्षा की. दोनों देशों के बीच हॉटलाइन पर बात हुई है.

    क्यों सीजफायर के लिए मजबूर हुआ पाकिस्तान
    हालांकि कहा जा रहा है कि पाकिस्तान यूं ही इस सीजफायर के लिए नहीं माना है. दरअसल बीते समय में भारत ने लगातार सीमा पर कठोर रुख अख्तियार किया है. एक तरफ भारत लगातार चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर डटा हुआ है तो वहीं पाकिस्तान के हर सीजफायर का जवाब देता रहा है. बीते सालों दो बार आतंकियों पर कार्रवाई के लिए भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की है.

    एफएटीएफ में ब्लैक लिस्टेड होने का डर सता रहा
    खुद पाकिस्तान भी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट होने का खतरा झेल रहा है. आतंक के खिलाफ कार्रवाई न करने के आरोप उस पर हमेशा लगते रहे हैं. पाकिस्तान को 27 प्वाइंट एक्शन प्लान पर काम करना था. अगर पाक इसमें कामयाब हो जाता तो ग्रे-लिस्ट से बाहर आ सकता था लेकिन पाकिस्तान इसमें विफल रहा है. ऐसे में सीजफायर कर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश देना चाहता है.

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