कोरोना वैक्सीन बन जाने के बाद भी आसान नहीं होगी राह, दुनियाभर के 3 अरब लोगों पर है संकट

हर नागरिक तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती होगी.
हर नागरिक तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती होगी.

तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस (Coronavirus) को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी साफ कर दिया है कि कोविड-19 (Covid-19) के संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन (Vaccine) ही एक मात्र उपाय है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2020, 7:41 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण ने एक बार फिर दुनियाभर के देशों में तेजी से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी साफ कर दिया है कि कोविड-19 (Covid-19) के संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन (Vaccine) ही एक मात्र उपाय है. हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि कोरोना वैक्सीन विकसित हो जाने के बाद भी चुनौती कम नहीं होंगी. भारत समेत दुनियाभर में खासकर गरीब और विकासशील देशों में सभी लोगों तक टीके की पहुंच सरकारों के लिए बड़ी मुश्किल साबित हो सकती है.

दुनियाभर में बनाई जा रही कोरोना वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए नॉन-स्टॉप रिफ्रिजरेशन की जरूरत होगी. इसके साथ ही फैक्ट्री से निकली वैक्सीन से लेकर सीरिंज तक की व्यवस्था करना सरकार के लिए आसान काम नहीं होगा. दुनियाभर की 7.8 अरब की आबादी में से 3 अरब की आबादी ऐसी जगहों पर रहती है जहां पर कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में इन जगहों पर वैक्सीन बन जाने के बाद भी उन्हें सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होगी.

कोरोना वायरस का असर खत्म करने के लिए तैयार की जा रही कोल्ड चेन बनाना अमीर देशों के लिए भी आसान नहीं होगा. खासकर उन वैक्सीन के लिए जिनके लिए -70 डिग्री सेल्सियस वाले अल्ट्राकोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता होगी. ठंड आने के साथ ही दुनियाभर के कई देशों में कोरोना की दूसरी लहर आती दिखाई दे रही है. कई देश जहां पर कोरोना पर लगाम कसी जा चुकी थी वहां भी कोरोना के केस बढ़े हैं. ऐसे में वैक्सीन के आने के बाद उनका रख रखाव एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है.

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 दुनिया के अधिकतर हिस्सों में रिफ्रिजरेशन का अभाव
लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट की ओर से पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि प्रभावी टीकाकरण के लिए दुनिया के अधिकतर हिस्सों में रिफ्रिजरेशन का अभाव है. एक्सपर्ट के मुताबिक भारत, दक्षिण एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों इस संकट का सामना करने के लिए अभी भी तैयार नहीं हैं.

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वैक्सीन के लिए -70 डिग्री सेल्सियस तापमान की होगी जरूरत
एक्सर्ट का कहना है कि कोरोना वैक्सीन को रखने के लिए -70 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होगी. अमेरिका और यूरोप जैसे अस्पतालों में भी इस तरह की सुविधा काफी कम है. एक्सपर्ट मानते हैं कि इस मामले में पश्चिमी अफ्रीकी देश अच्छी स्थिति में हैं. बता दें कि साल 2014 में जब इबोला का संक्रमण फैला था तब पश्चिमी अफ्रीकी देशों ने अपने यहां वैक्सीन के लिए बी अल्ट्राकोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था शुरू की थी. यही कारण है कि इन देशों में वैक्सीन के स्टोरेज की पूरी सुविधा उपलब्ध है.
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