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कोरोनाकाल में भी नहीं रुका पेड़ लगाने का अभियान, पीपल बाबा ने लगाए 1 लाख से ज्यादा पौधे

इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट वाईपी सिंह के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से देश में 100 करोड़ रूपये से अधिक की पेड़ों की नर्सरी बर्बाद हो गई.
इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट वाईपी सिंह के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से देश में 100 करोड़ रूपये से अधिक की पेड़ों की नर्सरी बर्बाद हो गई.

इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट वाईपी सिंह के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से देश में 100 करोड़ रूपये से अधिक की पेड़ों की नर्सरी बर्बाद हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2021, 11:53 AM IST
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कोरोनाकाल में यह चर्चा लगातार बनी रही कि प्रकृति इंसानों को सबक दे रही है. दरअसल इंसानों ने अपनी सहूलियतों के लिए लगातार प्रकृति को नुकसान पहुंचाया. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान पेड़ों को काटने से हुआ. अब इंसानों की गलतियों को सुधारने का बीड़ा पर्यावरणकर्मी प्रेम परिवर्तन यानी पीपल बाबा ने उठाया है। उन्होंने ट्वीट कर के जानकारी दी है कि कोरोनाकाल के दौरान भी उनका पेड़ लगाने का अभियान जारी रहा. इसमें कोरोना के सोशल डिस्टेंसिंग जैसे जरूरी नियमों का पालन करते हुए उनके गीव मी ट्रीज ट्रस्ट के स्वयं सेवकों ने काम किया.

उन्होंने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए मास्क और ग्लव्स पहनकर कोरोना वर्ष में उनकी टीम नें कुल 1 लाख 11 हजार 780 पौधे लगाए. जानकारी के अनुसार पीपल बाबा की ओर से 43 साल से चल रहा पेड़ लगाओ अभियान में कोरोना-वर्ष में भी जारी रहा। इस दौरान पीपल बाबा के पौधरोपण अभियान का मुख्य केंद्र दिल्ली एनसीआर बना।

बता दें कि इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट वाईपी सिंह के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से देश में 100 करोड़ रूपये से अधिक की पेड़ों की नर्सरी बर्बाद हो गई. केवल दिल्ली में 8 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ. लेकिन पीपल बाबा की माने तो इस कठ‌िन दौर में भी उनकी नर्सरी का एक भी पौधा बर्बाद नहीं हुआ. क्योंकि बिना रुके वे पौधे लगाने का काम करते रहे।



पौधारोपण के लिए दिया फिक्स डिपाजिट फार्मूला
5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पिछले साल पीपल बाबा ने पौधारोपण का फिक्स डिपोजिट फॉर्मूला दिया था। तब उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन के बाद गांव की तरफ लौटे लोग कृषि कार्य में जुट रहे हैं। इससे प्रति व्यक्ति आय में कमी आएगी और पहले से ज्‍यादा उत्पादन से कृषि उत्पादों के मूल्य कम होंगे. ऐसे में अगर किसान अपने खेतों के किनारे या बंजर जमीनों में पौधारोपण का कार्य करते हैं तो आने वाले समय में इन पेड़ों के तैयार होने पर करोना काल के समय होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकती है। तब इसे उन्होंने “कोरोना काल का फिक्स डिपोजिट” कहा था।

1 जनवरी से 31 दिसंबर 2020 तक में लगाए 1 लाख 11 हजार पौधे
जानकारी के अनुसार कोरोनाकाल में गीव मी ट्रीज ट्रस्ट की टीम ने दिल्ली में 8340 पेड़, नॉएडा में 33,400, ग्रेटर नॉएडा में 28,600, गाजियाबाद में 4,200 पेड़ लगाया वहीँ लखनऊ में 30,280 पेड़, उत्तराखंड में 3820 पेड़ , हरियाणा (सोहना-बहादुरगढ़ रोड पर ) में 3140 पेड़ लगाए.



पीपल बाबा के काम का तरीका
पीपल बाबा अपने पेड़ लगाओ अभियान मुख्य तौर पर सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर करते हैं. अगर कोई व्यक्ति पेड़ लगाने के लिए उन्हें बुलावा भेजता है तो इनकी टीम वहां जाकर भी पेड़ लगाती है. पीपल बाबा मुख्य तौर पर सेना, अर्धसैनिक बलों, सैन्य स्टेशनों, स्कूलों कालेजों, विश्वविद्यालयों के परिसरों सार्वजनिक उपक्रमों सामाजिक और धार्मिक संगठनों, आश्रमों, मंदिरों, गुरुद्वारों आदि के साथ मिलकर कार्य करते हैं.
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