मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, SIT से जांच कराने की मांग

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. (फाइल फोटो)

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. (फाइल फोटो)

याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं के साथ धोखा करके कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की संपत्ति बिना किसी कानूनी अधिकार के अनधिकृत रूप से समझौता करके शाही ईदगाह को दे दी गई जो कि गलत है.

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  • Last Updated: April 19, 2021, 1:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश में भगवान की जन्‍मभूमि को लेकर विवाद रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. अयोध्‍या में रामजन्‍म भूमि (Ram Janmabhoomi) से शुरू हुआ विवाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Sri Krishna Janmabhoomi) तक पहुंच गया है. बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है, जिसमें कृष्ण जन्म भूमि को समझौते के जरिए मुसलमानों को देने को चुनौती दी गई है.

याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं के साथ धोखा करके कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की संपत्ति बिना किसी कानूनी अधिकार के अनधिकृत रूप से समझौता करके शाही ईदगाह को दे दी गई जो कि गलत है. कोर्ट घोषित करे कि श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान की ओर से 12 अगस्त, 1968 को शाही ईदगाह के साथ किया गया समझौता बिना क्षेत्राधिकार के किया गया था, इसलिए वह किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है.



याचिका में ये भी मांग की गई है कि श्रीकृष्ण सेवा संस्थान द्वारा बिना किसी अधिकार के कृष्ण जन्मभूमि और ट्रस्ट की संपत्ति को समझौते के जरिए मुसलमानों को दिए जाने और हिंदुओं से धोखा किए जाने की एसआईटी से जांच कराई जाए और सेवा संस्थान के सदस्यों के खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाया जाए.
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जुगल किशोर बिड़ला ने खरीदी थी संपत्ति

बता दें साल 8 फरवरी,1944 को 13,400 रुपये में जुगल किशोर बिड़ला ने राय किशन दास और राय आनंद दास से ईदगाह, कटरा केशव देव और कारागार समेत सारी संपत्ति खरीद ली थी. जमीन की रजिस्ट्री गोस्वामी गणेश दत्त, मदन मोहन मालवीय और भीकनलाल अत्री के नाम हुई. 1951 में जुगल किशोर बिड़ला ने कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन किया. उनका परिवार कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का आजीवन ट्रस्टी है.
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