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Census 2021: इस बार डिजिटल माध्यम से होगी देश में जनगणना, जानें क्या होंगे बदलाव, कैसे देनी होगी जानकारी

जगणना में आंकड़ों को जुटाने के लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा (फोटो साभार ANI)

जगणना में आंकड़ों को जुटाने के लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा (फोटो साभार ANI)

बता दें कि सरकार ने मार्च में इस बात की घोषणा की थी कि इस साल दो चरणों में जनगणना 2021 (Census 2021 ) को आयोजित कराया जाएगा. पहली जनगणना अप्रैल-सितंबर 2020 में होनी थी जिसमें मकान सूचीकरण और आवास की जनगणना की जानी थी. जनसंख्या जनगणना को 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक आयोजित कराया जाना था.

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    नई दिल्ली: गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) ने बुधवार को राज्यसभा में बड़ी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देश में होने वाली आगामी जनगणना देश की पहली डिजिटल जनगणना (digital census) होगी. उन्होंने यह बात भाजपा सांसद रूपा गांगुली के सवाल का जवाब देते हुए बताई. उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना में स्व-गणना का प्रावधान होगा.

    राज्य मंत्री ने कहा कि जगणना में आंकड़ों को जुटाने के लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा. जनगणना से संबंधित गतिविधियों और कार्यों के साथ साथ इसके प्रबंधन के लिए एक पोर्टल भी तैयार किया गया है. उन्होंने सदन को बताया कि कोरोना महामारी के कारण जनगणना 2021 और दूसरे क्षेत्रों में होने वाली जनगणना की गतिविधियों को रोक दिया गया है.

    बता दें कि सरकार ने मार्च में इस बात की घोषणा की थी कि इस साल दो चरणों में जनगणना 2021 को आयोजित कराया जाएगा. पहली जनगणना अप्रैल-सितंबर 2020 में होनी थी जिसमें मकान सूचीकरण और आवास की जनगणना की जानी थी. जनसंख्या जनगणना को 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक आयोजित कराया जाना था. कोविड के बढ़ते प्रकोप को देखते हए जनगणना के कार्य को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है.

    जाति के आधार पर नहीं जारी होगा डाटा
    इससे पहले मार्च में केंद्रीय राज्य मंत्री राय ने जानकारी देते हुए कहा था कि सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 का आयोजन ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में क्रमशः आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (HUPA) द्वारा किया गया.

    राय ने बताया था कि जाति आधारित कच्चे आंकड़ों को डेटा के वर्गीकरण और कैटेगराइजेशन के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) को दिया गया है. जैसा कि मंत्रालय द्वारा बताया गया है, इस स्तर पर जाति के आंकड़े जारी करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. आजादी के बाद, भारत संघ ने, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातिगत जनसंख्या की गणना न करने की नीति के रूप में फैसला लिया है.

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