राजद्रोह के मामलों में चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल कर पा रही कर्नाटक पुलिस?

स्टूडेंट एक्टिविस्ट अमूल्या को एक रैली में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया था.

स्टूडेंट एक्टिविस्ट अमूल्या को एक रैली में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया था.

कर्नाटक (Karnataka) में जनवरी महीने के आखिरी और फरवरी के शुरुआती सप्ताह में एक के बाद कई मामले राजद्रोह (Sedition) के आरोप में दर्ज किए गए. इन मामलों में पुलिस चार्जीशीट दायर करने में नाकाम रही है.

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बेंगलुरु. कर्नाटक पुलिस (Karnataka) ने बीते शुक्रवार को अपने एक इंस्पेक्टर (Inspector) को इसलिए सस्पेंड (Suspend) कर दिया क्योंकि वो तीन कश्मीरी छात्रों के मामले राजद्रोह (Sedition) की चार्जशीट नहीं पेश कर पाया. मामला हुबली ग्रामीण जिले का है. इसी तरह 19 वर्षीय स्टूडेंट एक्टिविस्ट अमू्ल्या लियोन के मामले में 107 दिन बीत जाने के बाद भी राजद्रोह की चार्जशीट न फाइल होने के कारण किसी पुलिसवाले पर गाज गिराई जा सकती है.

पुलिसकर्मियों के खिलाफ ये कार्रवाई इसलिए हो रही है कि कश्मीरी छात्रों और अमूल्या को गिरफ्तार तो राजद्रोह की धाराओं में किया गया, लेकिन फिर 90 दिनों के भीतर चार्जशीट नहीं दाखिल की गई. कह सकते हैं तफ्तीश में पुलिस को अभी तक ऐसे मजबूत साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिनके दम पर राजद्रोह जैसे बड़े अपराध को साबित किया जा सके.

लॉकडाउन है वजह!

कहा जा रहा है कि पुलिस के चार्जशीट फाइल न कर पाने के पीछे लॉकडाउन भी प्रमुख वजहों में से एक है. क्योंकि लॉकडाउन के दौरान पुलिस का पूरा ध्यान लोगों को घरों के भीतर बनाए रखने में लगा हुआ था. सोशल डिस्टेंसिंग का नियम न फॉलो करने पर कार्रवाई करनी थी.
जनवरी-फरवरी में दर्ज किए गए केस

जनवरी महीने के आखिरी और फरवरी के शुरुआती सप्ताह में कर्नाटक में एक के बाद कई मामले राजद्रोह की धाराओं में दर्ज किए गए. पहला मामला बिदर जिले की 10 साल स्कूली बच्ची, उसकी टीचर और मां का था. इन लोगों पर सीएए विऱोधी प्रदर्शन पर एक स्कूल प्ले करने का आरोप था. इन पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया.

इसके बाद एक गाने को लेकर तीन कश्मीरी छात्रों पर ये मुकदमा दर्ज किया गया. और फिर अमूल्या लियोना के केस ने देश भर में सुर्खियां बटोरी. एमआईएम के नेता असदु्द्दीन ओवैसी सीएए विरोधी एक रैली को संबोधित करने बेंगलुरु पहुंचे थे और उन्हीं के मंच से अमूल्या ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिए. आयोजकों ने जैसे ही इसे सुना तो भागकर अमू्ल्या से भागकर माइक छीन लिया. ऐसा करने वालों में खुद ओवैसी भी शामिल थे. अमूल्या अपनी बात पूरी नहीं कर सकी.



एक केस में जल्द मिल गई थी जमानत

बिदर जिले के मामले में तो कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि प्रथम दृष्टया उन्हें इस केस में कोई राजद्रोह जैसी बात नहीं दिखाई दे रही है. लेकिन कश्मीरी छात्रों और अमूल्या को कई महीने जेल काटनी पड़ी. इस सप्ताह तीन कश्मीरी छात्रों को बेल मिल गई. तीनों कश्मीरी छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं और केंद्र सरकार से स्कॉलरशिप पाते हैं. इन छात्रों को कोर्ट ने बेल भी इसी आधार पर दी कि 110 दिनों बाद भी चार्जशीट नहीं दाखिल की जा सकी थी.

अब अमूल्या को भी इसी आधार पर कोर्ट ने बेल दी है. जेल में 107 दिन बिताने के बावजूद अमूल्या के खिलाफ पुलिस राजद्रोह की धाराओं में चार्जशीट नहीं दाखिल कर सकी. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक-हमने चार्जशीट दायर कर पाने में असफल रहने के कारण एक इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया है.

आखिर क्यों हुई देर

लेकिन सोचने वाली बात है कि आखिर इतनी देर क्यों हुई? सूत्रों के मुताबिक पुलिस के भीतर कई लोगों का मानना है कि राजद्रोह जैसे गंभीर आरोप के लिए ये केस कमजोर थे. मानवाधिकार कार्यकर्ता बीटी वेंकटेश के मुताबिक ये क्रूर मजाक के सिवा और कुछ नहीं है.

तीनों कश्मीरी छात्रों का केस लड़ने वाले वकील आर.प्रसन्ना ने कहा है-ऐसा लगता है जैसे इन धाराओं में केस दर्ज किया जाना सिर्फ परेशान करने के लिए किया गया. ये बेहद काबिल छात्र हैं. अपने क्लास के टॉपर हैं. हम चाहते हैं वो अपनी डिग्री पूरी करें. लेकिन ये केस उन्हें आगे नौकरी या फिर सामान्य जिंदगी जीने में मुश्किलें पैदा करेेगा. दरअसल लोग धारणा बनाने लगते हैं.

(Deepa Balakrishnan की स्टोरी से इनपुट के साथ.)

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