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हरियाणा का वो जिला जहां से गुजरता है सत्ता का रास्ता

News18Hindi
Updated: October 20, 2019, 6:05 PM IST
हरियाणा का वो जिला जहां से गुजरता है सत्ता का रास्ता
. चौधरी देवीलाल की कर्मभूमि रहा है जींद जहां उन्होंने साल 1986 में न्याय युद्ध का ऐलान कर कांग्रेस का सफाया कर डाला था.

चौधरी देवीलाल की कर्मभूमि रहा है जींद जहां उन्होंने साल 1986 में न्याय युद्ध का ऐलान कर कांग्रेस का सफाया कर डाला था.

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  • Last Updated: October 20, 2019, 6:05 PM IST
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जींद. कहा जाता है कि हरियाणा की सत्ता का रास्ता जींद जिले से गुज़रता है और इसकी मिसाल चौधरी देवीलाल हैं. चौधरी देवीलाल की कर्मभूमि रहा है जींद जहां उन्होंने साल 1986 में न्याय युद्ध का ऐलान कर कांग्रेस का सफाया कर डाला था. चौधरी देवीलाल पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री तो बाद में देश के उप-प्रधानमंत्री बने. जींद से ही पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल की नींव पड़ी थी. 

जींद को इनेलो और कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. यहां मुख्य मुकाबला इनेलो और कांग्रेस के बीच ही रहा. लेकिन साल 2014 से हालात बदले. अब चौधरी देवीलाल की जगह बीजेपी के मनोहर लाल का कमाल दिखने लगा. साढ़े चार साल के शासन में एंटी इंकंबेंसी लहर के दावों के बीच मनोहर लाल खट्टर जींद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी के लिए सीट निकालने में कामयाब रहे. अपनी पहली और बड़ी अग्निपरीक्षा में बीजेपी के इस लाल ने करिश्मा कर दिखाया. बंजर माने जाने वाली जींद की जमीन पर पहली दफे कमल खिल गया. इसी के साथ ही जींद ने इनेलो-कांग्रेस की नींद उड़ाने का काम किया है. बीजेपी के उम्मीदवार कृष्ण मिड्डा यहां से विजयी हुए. जबकि दूसरे नंबर पर नवगठित जजपा के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला रहे. इस तरह हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले जींद से जीत का आगाज़ से ज्यादा बीजेपी के लिए क्या शुभ हो सकता है. 

इनेलो विधायक हरिचंद मिड्डा के निधन की वजह से जींद में उपुचनाव हुआ था जिसे यहां के राजनीतिक दलों ने साख का सवाल बना लिया था. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी, इनेलो, कांग्रेस और जजपा के बीच था. कांग्रेस के प्रवक्ता और कैथल से विधायक रहे रणदीप सुरजेवाला के जींद से चुनाव लड़ने से मुकाबला रोचक हो गया था. लेकिन बीजेपी की आंधी का दूसरी कोई पार्टी सामना नहीं कर सकी. बीजेपी में शामिल हो कर टिकट पाने वाले हरिचंद मिड्डा के बेटे कृष्ण मिड्डा जीत गारंटी शुरुआत में ही पक्की कर ली थी. 

पिछले 10 साल में जींद में इंडियन नेशनल लोकदल का ही दबदबा था. इनेलो के हरिचंद्र मिड्डा ने साल 2009 में कैबिनेट मंत्री मांगी राम को हराया था. इसके बाद साल 2014 में भी हरिचंद मिड्डा ने इनेलो से बीजेपी में आए सुरेंद्र बरवाला को हराकर दोबारा जींद सीट से चुनाव जीता था. 

जबकि कांग्रेस नेता मांगी राम जींद में सबसे ज्यादा चार बार जीत हासिल करने वाले कांग्रेस विधायक थे. जींद में अबतक 12 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं. कांग्रेस ने जिसमें पांच बार तो लोकदल-इनेलो ने चार बार जीत हासिल की है. जबकि एक-एक बार जींद की सीट हरियाणा विकास पार्टी और निर्दलीय विधायक के कब्जे में आई है. 

जींद विधानसभा में जाट वोटर की संख्या ज्यादा है. यहां तकरीबन 48 हजार जाट वोटर हैं तो पंजाबी, वैश्य और ब्राह्मण वोटरों की संख्या 15 हज़ार के लगभग है. इसके बावजूद यहां ज्यादातर पंजाबी और वैश्य समुदाय से ही विधायक चुने गए. 

जींद का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है. जींद से महाभारत की कई कथाएं जुड़ी हुई हैं. वहीं पुराणों में भी जींद का उल्लेख किया गया है. वामन पुराण, नारद पुराण और पद्म पुराण में जीन्द का उल्लेख मिलता है. जींद को लेकर पौराणिक कथा कहती है कि महाभारत काल में पाण्डवों ने यहां पर विजय की देवी जयंती देवी के मन्दिर का निर्माण किया था और युद्ध में कौरवों को हराने के लिए उन्होंने इसी मन्दिर में पूजा की थी. देवी के नाम पर ही इस इलाके का नाम जयंतापुरी रखा गया था जो कि समय के साथ बदलकर जीन्द हो गया.
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हरियाणा का दिल कहे जाने वाले जींद जिले कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं. यहां की पांच में से तीन सीटों पर इनेलो का कब्जा है जबकि एक सीट बीजेपी के पास है जो कि उसने उपचुनाव में जीती थी. साल 2014 विधानसभा चुनाव में जींद सीट से इनेलो के हरि चंद मिड्डा चुनाव जीते थे लेकिन उनके निधन की वजह से इस सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के कृष्ण मिड्डा जीतकर विधायक बने.

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First published: October 20, 2019, 5:37 PM IST
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