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डॉक्टर ने आवारा गायों को दुधारू बनाने की खोजी अनोखी तकनीक, जानिए इसके बारे में

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी सुराजी गांव योजना के अंतर्गत निर्मित गौठानों में गोवर्धन पूजा के दिन गौठान दिवस मनाये जाने का ऐलान किया गया है.

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी सुराजी गांव योजना के अंतर्गत निर्मित गौठानों में गोवर्धन पूजा के दिन गौठान दिवस मनाये जाने का ऐलान किया गया है.

कई गौशालाओं के संचालकों ने इस उपकरण को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. इस तकनीक का आविष्कार अपने आप में एक नई क्रांति है.

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    कोटा के एक चिकित्सक ने देशभर में घूम रहीं आवारा गायों को दुधारू बनाने के लिए एक अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप तैयार किया है और उनकी योजना देश के किसानों को अपने इस अभियान के साथ जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है. कोटा के चिकित्सक डा संजय सोनी ने एक अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप का निर्माण किया है, जो जानवरों की कई तरह की गहन चिकित्सकीय जांच के साथ ही चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि एवं शिक्षा में मददगार साबित होगा.

    डा संजय सोनी के मुताबिक इस उपकरण के जरिये दूरदराज के गांवों में रोगी और दूध न देने वाले पशुधन की जांच कर उनके रोग का पता लगाकर उपचार किया जा सकता है. उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कोटा में आवारा और दूध न देने वाली गायों को दुधारू बनाने की दिशा में कार्य करने का फैसला किया है. वो बताते हैं कि यहां चल रही 80-90 गौशालाओं के संचालकों ने इस उपकरण को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. उन्होंने बताया कि दस वर्ष के अनुसंधान एवं परीक्षण के बाद 25 हजार रूपये कीमत के इस उपकरण को लांच किया गया है. उन्होंने इस उपकरण का पेटेंट भी करा लिया है.

    कोटा की कोचिंग संस्था से जुड़ी एलन मेडिइनोवेशन्स प्रा. लिमिटेड के निदेशक डा. सोनी ने बताया कि उन्होंने एक पोर्टेबल डिजिटल माइक्रोस्कोप का आविष्कार किया है, जो सामान्य माइक्रोस्कोप के मुकाबले किसी भी वस्तु का परीक्षण अधिक स्पष्टता और व्यापकता के साथ करने में सक्षम हैं इस उपकरण के चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि एवं शिक्षा के क्षेत्र में वरदान होने का दावा करते हुए डा. सोनी ने कहा कि किसी भी वस्तु के गहन परीक्षण के साथ ही यह अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप उनके डिजिटल चित्र भी लेता है जिससे बीमारी का पता लगाने में आसानी हो जाती है. इसके जरिए पशुधन की बीमारी का पता लगाकर उनकी चिकित्सा आसान हो जाएगी.

    उन्होंने बताया कि नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल से इस उपकरण को मान्यता मिल चुकी है. उन्होंने बताया कि इस डिजिटल माइक्रोस्कोप के जरिए रक्त की पेरिफेरियल ब्लड स्मीयर, पीबीएफ, हिस्टोपैथोलोजी, सेल काउंट, फ्लोरोसेन्ट, माइक्रोस्कोपी, कॉन्ट्रास्ट माइक्रोस्कोपी आदि जांच की जा सकती है, इमेज को दूर बैठे पैथोलॉजिस्ट देख सकेंगे, इस उपकरण को कोई भी ऑपरेट कर सकता है, जहां बिजली की सुविधा नहीं है वहां इसे यूएसबी अथवा सेलफोन के माध्यम से चलाया जा सकता है. वो उपचार के बाद उन्हें दुधारू बनाने और किसानों को दुग्धपालन व्यवसाय से जोड़कर उन्हें आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने को लेकर आशान्वित हैं.

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